Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने MMDR संशोधन बिल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को ‘राज्यहित’ बताकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर राज्य और यहां की जनता का वैधानिक एवं आर्थिक अधिकार है। ऐसे में केंद्र के स्तर पर होने वाले किसी भी संशोधन को लेकर यह स्पष्ट होना चाहिए कि इससे राज्य के खनिज राजस्व, नीति-निर्धारण की क्षमता और खनन प्रभावित लोगों के हितों पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ेगा।
उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि यदि MMDR संशोधन बिल पूरी तरह झारखंड के हित में है, तो इसके बाद राज्यों के राजस्व अधिकार, Mineral Bearing Land Cess और खनिज से होने वाली आय की सुरक्षा की ठोस कानूनी गारंटी क्या है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केवल यह कहना कि खनिज से मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा राज्यों को मिलता है, पर्याप्त जवाब नहीं है। असली सवाल यह है कि राज्यों के अधिकार और निर्णय लेने की क्षमता कितनी सुरक्षित रहेगी।
‘रघुवर दास अपने कार्यकाल का भी हिसाब दें’
केशव महतो कमलेश ने रघुवर दास के ‘पारदर्शी लीगल माइनिंग’ वाले बयान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा किसी राजनीतिक दल या केंद्र सरकार की निजी संपत्ति नहीं है। यह राज्य की जनता, आदिवासी और मूलवासी समुदायों की प्राकृतिक संपदा है।
उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास के लिए होना चाहिए। कांग्रेस नेता ने रघुवर दास से पूछा कि उनके मुख्यमंत्री रहते खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार की स्थिति में कितना सुधार हुआ।
चाईबासा, धनबाद, चतरा, पाकुड़ सहित खनन प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन इलाकों के लोगों की समस्याएं आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
DMFT को लेकर भी भाजपा पर निशाना
DMFT को लेकर भाजपा द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि District Mineral Foundation Trust (DMFT) कानून के तहत बनी व्यवस्था है। इसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं DMFT की राशि के इस्तेमाल की गति धीमी है तो उसे सुधारने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, लेकिन इसके नाम पर खनिज नीति से जुड़ी पुरानी समस्याओं की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डालना उचित नहीं है।
कांग्रेस ने भाजपा से पूछे पांच सवाल
केशव महतो कमलेश ने MMDR संशोधन बिल को लेकर भाजपा के सामने पांच सवाल रखे हैं—
- MMDR संशोधन के बाद झारखंड के खनिज राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा, इसकी कानूनी गारंटी क्या है?
- Mineral Bearing Land Cess पर राज्य के अधिकार को कमजोर करने की जरूरत क्यों पड़ी?
- खनिज दोहन में स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदायों के हितों की सुरक्षा कैसे होगी?
- खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ और रोजगार में झारखंड की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्र ने क्या ठोस कदम उठाए हैं?
- यदि बिल पूरी तरह राज्यहित में है, तो इसकी प्रत्येक धारा पर राजनीतिक दलों और खनिज प्रभावित समुदायों के साथ चर्चा करने में भाजपा को आपत्ति क्यों है?
‘झारखंड के खनिज पर पहला अधिकार जनता का’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने रघुवर दास के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने MMDR संशोधन का विरोध करने वाली कांग्रेस पर किसी ‘सिंडिकेट’ को बचाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सवाल साफ है कि झारखंड के खनिज संसाधनों का लाभ सबसे पहले राज्य की जनता को मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति का मॉडल ‘झारखंड की जमीन, जंगल और खनिज, लेकिन फैसला दिल्ली में’ नहीं हो सकता। कांग्रेस ऐसे मॉडल का विरोध करेगी।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस वैज्ञानिक, पारदर्शी और वैध तरीके से खनिज संसाधनों के दोहन के खिलाफ नहीं है। लेकिन ऐसा कोई कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता जिससे राज्यों के अधिकार कमजोर हों या खनिज संसाधनों से होने वाला लाभ स्थानीय जनता तक पर्याप्त रूप से न पहुंच पाए।
उन्होंने रघुवर दास पर पलटवार करते हुए कहा कि झारखंड की जनता को उपदेश देने से पहले उन्हें अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा पर झारखंड का अधिकार किसी राजनीतिक दल की कृपा नहीं, बल्कि जनता का हक है और कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क और संसद तक उठाती रहेगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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