Hanuman Jayanti 2026: हिंदू धर्म में हनुमान जी की पूजा के लिए हनुमान जयंती का दिन बेहद खास माना जाता है। आमतौर पर बजरंगबली का जन्मोत्सव चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी नरक चतुर्दशी के दिन भी हनुमान जयंती मनाने की परंपरा है। साल 2026 में नरक चतुर्दशी 7 नवंबर को पड़ रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि छोटी दिवाली पर दूसरी हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है और इसका संबंध माता सीता के वरदान से कैसे जुड़ा है।
छोटी दिवाली पर कब मनाई जाएगी Hanuman Jayanti 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती मनाने की प्रमुख तिथि चैत्र पूर्णिमा है। वर्ष 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल को मनाया गया था। हालांकि, कुछ धार्मिक परंपराओं में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी हनुमान जी से जुड़ा विशेष दिन माना जाता है।
यह तिथि नरक चतुर्दशी के साथ पड़ती है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों को साहस, शक्ति और संकटों से लड़ने का संबल मिलता है। अलग-अलग क्षेत्रों में हनुमान जयंती मनाने की तिथियों और परंपराओं में अंतर देखने को मिलता है।
Chhoti Diwali Hanuman Jayanti: आखिर क्यों मनाया जाता है दूसरा जन्मोत्सव?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा और उनके उत्सव का संबंध माता सीता से जुड़े एक प्रसंग से है। कथा के मुताबिक, जब पवनपुत्र हनुमान भगवान श्रीराम का संदेश लेकर लंका पहुंचे, तब उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता से मुलाकात की थी। इस दौरान हनुमान जी ने माता जानकी को भगवान श्रीराम की मुद्रिका देकर यह विश्वास दिलाया कि वे प्रभु के दूत हैं। हनुमान जी की निष्ठा, बुद्धिमत्ता, पराक्रम और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति देखकर माता सीता अत्यंत प्रसन्न हुईं।
मान्यता है कि इसी प्रसन्नता में माता सीता ने हनुमान जी को विशेष आशीर्वाद दिया था। कुछ धार्मिक परंपराएं इस आशीर्वाद को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी से जोड़ती हैं। इसी वजह से कुछ स्थानों पर इस दिन हनुमान जी का विशेष पूजन किया जाता है और इसे उनके दूसरे जन्मोत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
Mata Sita Ka Vardan: माता सीता ने हनुमान जी को क्या दिया था आशीर्वाद?
रामभक्ति की परंपरा में माता सीता द्वारा हनुमान जी को दिए गए वरदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार, माता जानकी हनुमान जी की सेवा भावना और भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण से इतनी प्रसन्न हुईं कि उन्होंने उन्हें अष्ट सिद्धि और नव निधि प्रदान करने का आशीर्वाद दिया।
अष्ट सिद्धि का संबंध आठ प्रकार की आध्यात्मिक शक्तियों से माना जाता है, जबकि नव निधि नौ प्रकार की दिव्य संपदाओं का प्रतीक हैं। धार्मिक विश्वासों में हनुमान जी को चिरंजीवी भी माना जाता है, अर्थात वे उन दिव्य विभूतियों में शामिल हैं जो युगों तक जीवित रहते हैं। इसी मान्यता के चलते भक्त हनुमान जी को संकटमोचन, बल और बुद्धि के दाता तथा अपने भक्तों की रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजते हैं। हालांकि, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर वरदान मिलने की मान्यता सभी धार्मिक परंपराओं में एक समान नहीं है।
Hanuman Jayanti Story: रामायण में क्या है माता सीता और हनुमान जी की भेंट का प्रसंग?
वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में हनुमान जी की लंका यात्रा और अशोक वाटिका में माता सीता से उनकी मुलाकात का वर्णन मिलता है। भगवान श्रीराम की खोज में सहायता करने के लिए हनुमान जी समुद्र पार करके लंका पहुंचे थे। वहां उन्होंने माता सीता को खोजा और उन्हें श्रीराम की मुद्रिका सौंपकर प्रभु का संदेश सुनाया।
इस मुलाकात से माता सीता को विश्वास हुआ कि भगवान श्रीराम उन्हें वापस लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हनुमान जी ने अपनी भक्ति और सेवाभाव से माता जानकी का विश्वास जीता। इसी प्रसंग को रामभक्ति की परंपरा में हनुमान जी की महानता और उनके समर्पण के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। माता सीता के आशीर्वाद से जुड़ी मान्यताएं भी इसी भक्ति परंपरा में प्रचलित हैं। हालांकि, छोटी दिवाली को दूसरी हनुमान जयंती मानने की परंपरा का उल्लेख हर रामायण ग्रंथ में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता।
Ashta Siddhi Nav Nidhi: रामचरितमानस में हनुमान जी के लिए क्या कहा गया है?
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए अष्ट सिद्धि और नव निधि का उल्लेख मिलता है। इसकी प्रसिद्ध चौपाई है:
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
इस चौपाई का भावार्थ है कि माता जानकी ने हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधि प्रदान करने की शक्ति का वरदान दिया। भक्त इस चौपाई के माध्यम से हनुमान जी की कृपा, सामर्थ्य और माता सीता के आशीर्वाद का स्मरण करते हैं।
नरक चतुर्दशी पर कैसे करें हनुमान जी की पूजा?
छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी की पूजा करने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार विशेष आराधना कर सकते हैं। इस अवसर पर कुछ सामान्य धार्मिक विधियां अपनाई जाती हैं:
- सुबह स्नान के बाद हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं।
- बजरंगबली को सिंदूर, पुष्प और प्रसाद अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
- भगवान श्रीराम और माता सीता का स्मरण करते हुए हनुमान जी की आराधना करें।
- अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करें।
पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।
Hanuman Jayanti 2026: जानें छोटी दिवाली का धार्मिक महत्व
नरक चतुर्दशी को दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से भी जुड़ा है। इस दिन घरों की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व होता है।
कुछ क्षेत्रों में इसी दिन हनुमान जी की विशेष पूजा भी की जाती है। भक्तों के लिए यह अवसर भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के साहस, सेवा, विनम्रता और निष्ठा को याद करने का माध्यम है।
छोटी दिवाली पर दूसरी हनुमान जयंती मनाने की परंपरा माता सीता के वरदान से जुड़ी धार्मिक मान्यता पर आधारित है। जहां चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में व्यापक रूप से मनाया जाता है, वहीं कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर उनका विशेष पूजन कुछ क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।







