Ranchi: रांची स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में 26 जून को भगवान जगन्नाथ का नेत्रदान अनुष्ठान एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर होगा. यह दिन भक्तों के लिए आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम लेकर आता है. भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा, 15 दिनों के एकांतवास (अनासर) के बाद आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के दिन, गुरुवार को भक्तों के दर्शन के लिए प्रकट होंगे. इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा, जो भक्तों को एक दिव्य अनुभव प्रदान करेगा. यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि रांची की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं का भी अभिन्न हिस्सा है.
नेत्रदान अनुष्ठान का दिनभर कार्यक्रम
26 जून को होने वाले नेत्रदान अनुष्ठान की दिनभर की रूपरेखा भक्तों के लिए खास तैयार की गई है. सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियाँ शुरू हो जाएंगी. सुबह सबसे पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की नित्य पूजा और अर्चना स्नान मंडप में की जाएगी, जिसमें विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे. इसके बाद ब्लुए भोग का आयोजन होगा. दोपहर 12 बजे अन्न भोग अर्पित करने के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे, ताकि भगवान को विश्राम मिल सके. इसके बाद दोपहर 3 बजे पट पुनः खोले जाएंगे और श्रद्धालु राधा-कृष्ण व अन्य देवताओं के दर्शन कर सकेंगे. शाम 4 बजे फिर से दर्शन बंद कर दिए जाएंगे और भगवान को स्नान मंडप में विराजमान किया जाएगा.
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शाम 5 बजे से नेत्रदान अनुष्ठान की शुरुआत होगी, जिसमें पूजा, धूप आरती और मालपुआ का भोग अर्पित किया जाएगा. इस समय 108 दीपों से भव्य मंगल आरती का आयोजन भी होगा, जो भक्तों के लिए अत्यधिक आकर्षण का केंद्र रहेगा. शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन और पूजा का अवसर मिलेगा. यह समय भक्तों के लिए विशेष होता है, क्योंकि इस दौरान भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्त बड़ी संख्या में मंदिर में उपस्थित रहते हैं.
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा – 27 जून
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून को निकाली जाएगी, जो विशेष धार्मिक महत्व रखती है. इस दिन भगवान को अन्न भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें चावल, दाल, सब्ज़ी, मोठा पुलाव और खोर जैसी विशेष पकवान शामिल होते हैं. सुबह 4 बजे से विशेष पूजा की शुरुआत होगी, और इसके बाद 4:30 बजे अन्न भोग अर्पित किया जाएगा. भगवान के दर्शन सुबह 5 बजे से भक्तों के लिए सुलभ हो जाएंगे, और दोपहर 12 बजे मंदिर के पट फिर से बंद कर दिए जाएंगे. इसके बाद भगवान के विग्रहों को रथ पर विराजमान किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य अनुभव होगा.
रथ यात्रा का शुभारंभ 5 बजे होगा, और रथ शाम 6 बजे तक मौसीबाड़ी पहुंचेगा. यहाँ पर महिलाओं द्वारा विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आरती, भोग और ‘जगन्नाथ अष्टकम’ का पाठ किया जाएगा. रात 9 बजे के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे और भगवान विश्राम करेंगे. रथ यात्रा का यह आयोजन रांची में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है और देशभर से श्रद्धालु इस अवसर पर भाग लेने के लिए आते हैं.
रथ यात्रा की मान्यताएँ और महत्व
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को खींचने की परंपरा है, जो विशेष रूप से भक्तों के लिए शुभ और फलदायी मानी जाती है. हर साल, रांची और आसपास के क्षेत्रों जैसे रामगढ़, खूंटी, गुमला, हजारीबाग, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथ खींचने के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि रथ की रस्सी खींचने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह एक आध्यात्मिक अनुभव होता है, जिसमें हर श्रद्धालु की भक्ति और विश्वास जुड़ा होता है. विशेष रूप से महिलाएं भी इस अनुष्ठान में बड़े श्रद्धा भाव से भाग लेती हैं.
333 वर्षों से चली आ रही रथ यात्रा की परंपरा
रांची में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपरा 333 वर्षों से निरंतर चल रही है. यह यात्रा ओडिशा के पुरी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी और भव्य रथ यात्रा मानी जाती है. रांची के इस धार्मिक अनुष्ठान में लाखों श्रद्धालु हर साल शामिल होते हैं और इसे लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिलती है. यह रथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि रांची की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखे हुए है.
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सुरक्षा इंतजाम और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार सिन्हा ने खुद सुरक्षा की निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है. प्रशासन ने महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए अलग कतारें, विश्राम स्थल और हेल्प डेस्क भी बनाए हैं. इसके अलावा, स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं भी प्रशासन के साथ मिलकर श्रद्धालुओं की सहायता कर रही हैं ताकि वे सुरक्षित और शांति से दर्शन कर सकें. प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि हर श्रद्धालु को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और वे पूरे आयोजन का सही तरीके से लाभ उठा सकें.
इस प्रकार, रांची स्थित जगन्नाथपुर मंदिर में आयोजित होने वाली रथ यात्रा और नेत्रदान अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए एक भव्य और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ रांची की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी समृद्ध बनाए रखते हैं.











