सावन 2025: भारत की सांस्कृतिक परंपराएं ऋतु परिवर्तन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती हैं, और उनमें सबसे सुंदर और भावनात्मक रूप से समृद्ध पर्व है सावन. वर्षा ऋतु में पड़ने वाला यह महीना सिर्फ मौसम की ताजगी नहीं, बल्कि मन और आत्मा की भी शुद्धि लेकर आता है. खासतौर पर यह महीना भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के लिए समर्पित होता है. इस बार सावन 11 जुलाई से शुरू होगा और 9 अगस्त तक चलेगा.
महिलाओं के लिए सावन का विशेष महत्व
सावन का महीना भारतीय महिलाओं के लिए पारंपरिक श्रृंगार, भक्ति और सौभाग्य की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति बन जाता है. इस महीने में सुहागिन स्त्रियाँ हरे रंग की साड़ी और कांच की चूड़ियां पहनती हैं. इसके पीछे न केवल धार्मिक आस्था है, बल्कि गहरी सांस्कृतिक संवेदना भी जुड़ी है:
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– हरा रंग हरियाली, नवीनता और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक है. मान्यता है कि इस रंग से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं.
– हरी चूड़ियों की खनक केवल सौंदर्य का हिस्सा नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी मानी जाती है.
– सावन में मेहंदी रचाना, लोकगीत गाना, और झूले झूलना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नारी उत्सव का स्वरूप बन गया है.
धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपराएं
सावन के हर सोमवार को श्रद्धालु शिवजी की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा जैसी परंपराएं भी इसी महीने में चरम पर होती हैं. इस पूरे समय को शुद्धि, तप और भक्ति का अवसर माना जाता है.











