Dhanbad: बाघमारा प्रखंड के 65 गांवों की जल संकट की समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2018 में 92.69 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई मेगा जलापूर्ति योजना (फेज-1) आज सात साल बाद भी अधूरी है। इस वर्ष की भीषण गर्मी में भी ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया है, जिससे लोगों में निराशा और नाराजगी है।
प्लान के तहत दामोदर नदी से पानी लाकर उसे शुद्ध कर छह जलमीनारों के माध्यम से 20 पंचायतों के 65 गांवों तक आपूर्ति की जानी थी। इससे एक लाख से अधिक की आबादी को राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन योजना शुरुआत से ही कई अड़चनों का शिकार होती रही।
कोरोना काल और धीमी कार्यप्रगति
योजना का कार्य पहले कोरोना महामारी के चलते बाधित हुआ। फिर जब काम शुरू हुआ, तो रफ्तार काफी धीमी रही। बाद में विभागीय दबाव से जलमीनारों का निर्माण और प्लांट से पाइप बिछाने का काम हुआ, लेकिन सबसे अहम – गांवों तक वितरण पाइपलाइन – अब भी अधूरी है।
रेलवे की अनापत्ति बनी थी रोड़ा
पाइपलाइन को नदी पार कर प्लांट तक लाने में कई जगह रेलवे लाइन के नीचे से पाइप डालने की जरूरत थी, जिसके लिए रेलवे की मंजूरी लंबा समय लेती रही। विभाग के अनुसार अब अनापत्ति मिल चुकी है और काम प्रगति पर है।
राजनीतिक मंच पर उठा मामला
23 मार्च 2021 को विधानसभा बजट सत्र के दौरान तत्कालीन विधायक ढुलू महतो ने इस मुद्दे को उठाया था। तब सरकार ने उसी वर्ष कार्य पूरा कराने का आश्वासन दिया था। अब 2025 में एक बार फिर यह मामला सदन में उठ चुका है, लेकिन परिणाम अभी भी धरातल पर नहीं दिख रहा।
पीएचइडी एसडीओ जे. पी. सिंह ने कहा: “काम को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।”
इन गांवों को मिलनी थी जल आपूर्ति
खानुडीह, दग्दो, गोपालपुर, नारायणपुर, घोराठी, बांसजोरिया, भेलवाटांड़, तिलैया, हुरसोडीह, निचितपुर, छोटा मंझलाडीह, आमडीह, भीमकनाली, हरिणा, नावाडीह, माटीगढ़ा, नदखुरकी, केसरगढ़ा, लुतीपहाड़ी, बाघमारा, बकसपुरा, मंदरा, जयरामडीह, गणेशपुर, तेलोटांड़, बरोरा, टुंडु, जमुआ, महथाडीह, दरिदा, कोलमुरना, शामडीह, बरमसिया, सोनाडीह समेत 65 गांव शामिल हैं।
बाघमारा की मेगा जलापूर्ति योजना ग्रामीणों की वर्षों से चली आ रही जल संकट की समस्या का समाधान बन सकती थी, परंतु प्रशासनिक ढिलाई और तकनीकी अड़चनों के कारण यह योजना अब तक पूर्ण नहीं हो सकी है। जनता अब ठोस कार्रवाई और समयबद्ध परिणाम चाहती है, न कि केवल आश्वासन।









