Ranchi: राज्य के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान RIMS (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस निर्णय का विरोध करते हुए राज्य सरकार और रिम्स प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि रिम्स में मीडिया की एंट्री पर रोक लगाने का फैसला अलोकतांत्रिक और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रशासन अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, मरीजों की समस्याओं और प्रशासनिक कमियों को जनता से छिपाना चाहते हैं।
महतो ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मीडिया जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही तय करने का काम करती है। ऐसे में मीडिया को अस्पताल परिसर से दूर रखने का निर्णय कई तरह के सवाल खड़े करता है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आने से डर रही है। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, रिम्स में व्याप्त अव्यवस्थाओं और विभिन्न प्रशासनिक खामियों को छिपाने के लिए इस तरह के प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
रमाकांत महतो ने कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की मानसिकता कांग्रेस की कार्यसंस्कृति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि देश ने आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों को देखा है और झारखंड में भी उसी सोच की झलक दिखाई दे रही है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य विभाग में दवा खरीद, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, एएनएम नियुक्ति और सुरक्षा गार्ड बहाली सहित कई मामलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे समय में मीडिया की स्वतंत्र निगरानी और रिपोर्टिंग पहले से अधिक जरूरी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि देश के अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में मीडिया के प्रवेश पर इस प्रकार की रोक देखने को नहीं मिलती। सरकार को प्रतिबंध लगाने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, मरीजों को बेहतर इलाज और अस्पताल प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा ने राज्य सरकार से RIMS में मीडिया प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को तत्काल वापस लेने तथा प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की मांग की है।








