Breaking News: झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुनवाई हुई। अदालत में अभ्यर्थियों, राज्य सरकार और हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अलग-अलग दलीलें पेश की गईं। मामले में अगली सुनवाई सोमवार को दोपहर 2:15 बजे निर्धारित है।
Breaking News: अभ्यर्थियों ने फैसले को बताया अनुचित
प्रार्थियों के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और प्रेरणा झुनझुनवाला ने दलील दी कि संबंधित परीक्षाओं में पेपर लीक के ठोस आरोप नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षाओं के जरिए सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां पहले ही हो चुकी हैं। वकीलों ने अपने पक्ष में पुराने न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने के सरकारी निर्णय को चुनौती दी।
Breaking News: सरकार ने गड़बड़ियों का दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाया। सरकार का पक्ष था कि जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और सामग्री मिले हैं। सरकार ने यह भी दलील दी कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना संभव नहीं होने के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया रद्द करने का निर्णय लिया गया।
Breaking News: SOP के पालन पर भी सवाल
हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता सुभाशीष रसिक सोरेन ने JPSC परीक्षा की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पालन पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि JPSC ने अपने शपथ पत्र में SOP का पूरी तरह पालन नहीं होने की बात स्वीकार की है।
अब सोमवार की सुनवाई में मामले पर आगे की बहस होगी। परीक्षा रद्द करने के फैसले पर अंतिम निर्णय अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।

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