National News: सीबीआई (CBI) ने उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड मामले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को प्रमुख रूप से धोखाधड़ी का शिकार बताया गया है।
CBI ने मामले की पुष्टि करते हुए अनिल अंबानी से जुड़े परिसरों और कंपनी के कार्यालयों पर छापेमारी की है। इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 23 जुलाई 2025 को यस बैंक से लिए गए 3,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे थे।
CBI की कार्रवाई की वजह
मामला 2017 से 2019 के बीच यस बैंक द्वारा रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को दिए गए लोन से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि ये फंड कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और रिलायंस ग्रुप की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किए गए।
CBI ने इन कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की
CBI ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन मामलों में यस बैंक के पूर्व CEO राणा कपूर का भी नाम सामने आया है।
जांच में अब तक क्या सामने आया है?
ED की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक पूर्व-नियोजित योजना थी, जिसमें बैंकों, निवेशकों और संस्थागत भागीदारों को धोखा देकर फंड की हेराफेरी की गई। प्रमुख अनियमितताएं:
- कमजोर या बिना सत्यापन वाली कंपनियों को लोन
- फर्जी कंपनियों में पैसे ट्रांसफर
- जरूरी दस्तावेजों का अभाव
- एक ही एड्रेस और डायरेक्टर से जुड़ी कई कंपनियां
- “लोन एवरग्रीनिंग” के जरिए पुराने कर्ज चुकाने का प्रयास
क्या अनिल अंबानी पर व्यक्तिगत आरोप भी हैं?
SBI ने हाल ही में रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी को “फ्रॉड” घोषित किया। आरोप है कि RCom ने बैंक से लिए गए 31,580 करोड़ रुपए में से:
- 13,667 करोड़ रुपए अन्य कंपनियों के कर्ज चुकाने में खर्च किए
- 12,692 करोड़ रुपए रिलायंस ग्रुप की ही अन्य कंपनियों को ट्रांसफर किए
इस मामले में SBI ने CBI में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही, अनिल अंबानी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में पर्सनल इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही भी चल रही है।
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