Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने Three Language Policy को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा (R3) की फिलहाल कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर (School-Based Assessment) पर किया जाएगा। हालांकि, 10वीं का CBSE पास सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए R3 में पास होना अनिवार्य होगा।
CBSE ने कहा कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE 2023) के तहत लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है, न कि उन पर अतिरिक्त परीक्षा का बोझ डालना।
R3 क्या है? जानिए आसान भाषा में
CBSE की नई भाषा नीति में R3 का अर्थ “Third Language” (तीसरी भाषा) है। यहां R1, R2 और R3 किसी विशेष भाषा के नाम नहीं हैं, बल्कि भाषा के तीन अलग-अलग स्लॉट (Language Slots) हैं।
- R1 (First Language): पहली या मुख्य भाषा
- R2 (Second Language): दूसरी भाषा
- R3 (Third Language): तीसरी भाषा, जो R1 और R2 दोनों से अलग होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी छात्र की पहली भाषा अंग्रेजी (English) और दूसरी भाषा हिंदी (Hindi) है, तो वह तीसरी भाषा (R3) के रूप में संस्कृत, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, गुजराती, पंजाबी, मलयालम, उर्दू या स्कूल में उपलब्ध अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषा चुन सकता है। CBSE के नियमों के अनुसार, तीन भाषाओं में कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है।
इस साल R3 की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान व्यवस्था में कक्षा 10 के लिए तीसरी भाषा (R3) की कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। छात्रों का मूल्यांकन केवल स्कूल द्वारा आयोजित आंतरिक परीक्षा के आधार पर होगा।
हालांकि, सत्र 2026-27 में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्र, जब भविष्य में कक्षा 10 तक पहुंचेंगे, तब उनके लिए R3 की बोर्ड परीक्षा लागू की जाएगी।
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कक्षा 9 में R3 में फेल होने पर भी मिलेगा प्रमोशन
बोर्ड के अनुसार, यदि कोई छात्र कक्षा 9 में R3 विषय में पास नहीं हो पाता, तो भी उसे कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा। हालांकि, छात्र को कक्षा 10 के दौरान तीसरी भाषा में आवश्यक योग्यता प्राप्त करनी होगी।
CBSE ने साफ किया है कि कक्षा 10 का पास सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाएगा, जब छात्र तीसरी भाषा (R3) में भी सफल होगा। यानी, फिलहाल भले ही R3 की बोर्ड परीक्षा न हो, लेकिन स्कूल-स्तर के मूल्यांकन में पास होना अनिवार्य रहेगा।
फेल होने पर मिलेगा री-असेसमेंट का मौका
यदि कोई छात्र कक्षा 10 में R3 विषय में सफल नहीं हो पाता, तो उसे फाइनल रिजल्ट जारी होने से पहले Re-assessment (दोबारा मूल्यांकन) का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम परिणाम घोषित होगा।
इन छात्रों को मिलेगी विशेष छूट
CBSE ने कुछ श्रेणी के छात्रों को R3 की अनिवार्यता से राहत भी दी है।
- विशेष आवश्यकता वाले छात्र (CwSN) को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के तहत तीसरी भाषा से छूट मिलेगी।
- भारत के बाहर स्थित CBSE स्कूलों के छात्रों के लिए तीसरी भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा।
- दूसरे राज्य में स्थानांतरित (Migration) होने वाले छात्र कक्षा 9 में चुनी गई भाषा को कक्षा 10 तक जारी रख सकेंगे।
नई नीति का उद्देश्य क्या है?
CBSE का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को रटने की संस्कृति से बाहर निकालकर समझ-आधारित शिक्षा की ओर ले जाना है। साथ ही, यह नीति भारतीय भाषाओं के संरक्षण, बहुभाषी क्षमता विकसित करने और छात्रों के लिए अधिक सहज एवं आनंददायक शिक्षण वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।








