Ranchi : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के चौंकाने वाले परिणामों के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने इन नतीजों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश का लोकतंत्र गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है।
जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है-फुरकान अंसारी
फुरकान अंसारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी चुनावी प्रक्रिया को इस कदर प्रभावित करती है कि परिणामों का स्वरूप ही बदल जाता है। उन्होंने कहा, “जब जनता भारी उत्साह के साथ मतदान करती है और परिणाम उनके मतों के विपरीत आते हैं, तो आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर वोट देने का मतलब ही क्या रह गया है?”
ध्रुवीकरण बनाम बंगाली अस्मिता
भाजपा की चुनावी रणनीति पर निशाना साधते हुए अंसारी ने कहा कि बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिशें नाकाम रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल की धरती एकता और संस्कृति की परिचायक है। उनके शब्दों में, “बंगाल में न हिंदू चलेगा, न मुसलमान-यहां सिर्फ ‘बंगाली’ चलेगा।” उन्होंने भाजपा की ‘बांटो और राज करो’ (Divide and Rule) की नीति को बंगाल की हार का मुख्य कारण बताया।
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2029 के लिए एकजुटता का आह्वान
पूर्व सांसद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब सत्ता खुद नियम लिखने लगे, तो लोकतंत्र केवल दिखावा रह जाता है। उन्होंने देश भर की जनता से आह्वान किया कि 2029 के आम चुनावों में सभी एकजुट हों ताकि नफरत की राजनीति करने वाली ताकतों का सफाया किया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 में जनता एकजुट होकर ऐसी शक्तियों को सत्ता से बेदखल कर देगी जो देश की लोकतांत्रिक भावना पर प्रहार कर रही हैं।
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