रांची: Doranda की एक धार्मिक महफिल में बुधवार को झारखंड की सियासत से जुड़े एक चर्चित चेहरे की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा। जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य फिरदौस नगर, मनिटोला स्थित खानकाह मजहरिया मुनअमिया में आयोजित दो दिवसीय उर्स-ए-गौसुल आजम में शामिल हुए। खास बात यह रही कि सूफियाना कव्वाली की महफिल सजी तो सुप्रियो भट्टाचार्य सिर्फ श्रोता बनकर नहीं बैठे, बल्कि खुद तबला बजाते नजर आए।
उनके तबला बजाने का वीडियो और तस्वीरें महफिल में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय रहीं। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने भी इस पल का आनंद लिया। सुप्रियो भट्टाचार्य ने खानकाह के सज्जादानशीन और देश-प्रदेश के लोगों को उर्स की मुबारकबाद दी।
उर्स का आयोजन ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर खानकाह के सज्जादानशीन अल्हाज सैय्यद शाह अल्कमा शिब्ली कादरी की ओर से किया गया था। दूसरे दिन बड़ी संख्या में अकीदतमंद और जायरीन खानकाह पहुंचे।
सुप्रियो भट्टाचार्य के साथ कई गणमान्य लोग पहुंचे
उर्स की महफिल में सुप्रियो भट्टाचार्य के अलावा झारखंड के पूर्व डीजीपी डीके पांडेय और इदार-ए-शरिया के नाजिम-ए-आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
झारखंड के अलग-अलग जिलों के अलावा देश के दूसरे राज्यों से भी जायरीन खानकाह पहुंचे थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक माहौल के साथ सूफियाना संगीत की महफिल भी सजी रही।
कव्वाली के बीच तबला बजाते नजर आए सुप्रियो
कार्यक्रम का सबसे खास नजारा उस समय देखने को मिला, जब सूफियाना कव्वाली शुरू हुई। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कव्वाली का आनंद लेते हुए खुद तबला बजाना शुरू कर दिया। इससे महफिल में मौजूद लोगों का उत्साह और बढ़ गया।
उन्होंने इस मौके पर सज्जादानशीन को उर्स की बधाई दी और राज्य व देशवासियों के लिए भी शुभकामनाएं दीं।
मिलाद से लेकर फातिहाखानी और लंगर तक आयोजन
उर्स के अंतिम दिन सुबह 10 बजे से मिलाद शरीफ और जलसा-ए-गौसुल आजम का आयोजन हुआ। इसके बाद दोपहर 12 बजे से फातिहाखानी, महफिल-ए-समा और लंगर तकसीम किया गया।
शाम को नमाज-ए-मगरिब के बाद आखिरी कुल और सूफियाना कव्वाली का आयोजन हुआ। इसके बाद लंगर का वितरण किया गया। राज्य और देश की खुशहाली, कामयाबी और आपसी मोहब्बत के लिए दुआ के साथ दो दिवसीय उर्स का समापन हुआ।
हर महीने 11वीं शरीफ पर होता है आयोजन
खानकाह के सज्जादानशीन ने बताया कि यहां हर महीने उर्दू महीने की 11वीं तारीख को नमाज-ए-मगरिब के बाद सरकार गौसुल आजम के नाम पर फातिहाखानी और लंगर का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने अकीदतमंदों से इन आयोजनों में शामिल होने की अपील की।
कार्यक्रम में मौलाना सैय्यद अबू राफे तिबरानी, मौलाना शमीम रिजवी, मोहम्मद रिजवान हुसैन, मोहम्मद बाबर, नवाब चिश्ती, मोहम्मद नदीम खान, शब्बीर अहमद, मोहम्मद इमदाद, मोहम्मद रहमत अली, यासीन अंसारी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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