प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. संजय कुमार यादव “योगी” ने अपनी नवीन कविता “बचपन, जवानी और बुढ़ापा” के माध्यम से मानव जीवन की तीनों अवस्थाओं का अत्यंत मार्मिक और प्रतीकात्मक चित्रण किया है। यह कविता जीवन को एक वृक्ष के रूपक में प्रस्तुत करती है, जहाँ बचपन अंकुर के रूप में, जवानी फलदायी पौधे के रूप में और बुढ़ापा जर्जर होती अवस्था के रूप में सामने आता है।
कविता के पहले भाग में बचपन को निष्कलुष, स्वतंत्र और स्वच्छंद बताया गया है, जहाँ दायित्वों का भार नहीं होता और जीवन खिलखिलाता प्रतीत होता है। दूसरे भाग में जवानी को जिम्मेदारियों और चुनौतियों से भरी अवस्था के रूप में दर्शाया गया है, जिसमें व्यक्ति स्वयं और समाज के प्रति उत्तरदायी बनता है। वहीं तीसरे भाग में बुढ़ापे की पीड़ा, एकाकीपन और शारीरिक जर्जरता को संवेदनशील शब्दों में उकेरा गया है, जो पाठक को गहरे आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
साहित्य प्रेमियों का कहना है कि डॉ. यादव की यह रचना केवल कविता नहीं, बल्कि जीवन का दार्शनिक सार है। सरल भाषा, गहन भाव और सशक्त प्रतीकों के कारण यह कविता पाठकों के हृदय को छू रही है।
डॉ. संजय कुमार यादव “योगी” की यह नई काव्य रचना साहित्य जगत में सराही जा रही है और जीवन की सच्चाइयों को समझने का एक प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरी है।
कविता का शीर्षक : बचपन, जवानी और बुढ़ापा
बचपन,-
अंकुर है, उस बीज का
सींच दे सहारा जिसे
तो पौधा बन जाता लहलहाता,
इठलाता और खिलखिलाता करता अठखेलियाँ,
वह प्रज्ज्वलित तेज, स्फुलिंग व स्फूर्ति देख मुग्ध ‘योगी’ कहे कि
कैसा मनमोहक बचपन्
मुक्त है भार व दायित्व से
वह स्वतंत्रऔर स्वच्छंद बचपन !
जवानी,-
अवस्था है उस पौधे की जब जड़े गहराती गयी बढ़ता गया भार ,
पत्ते और डालियों का
था बनता दायित्व अब
उस पौधे पर कि वह
फलदायी बने, उत्तरदायी बनें
स्वयं के अस्तित्व के लिए
सुखदायी बने कहैं , ‘योगी’
यह कुछ नहीं मात्र कहानी है चुनौतियों की जवानी !!
बुढ़ापा,-
आया जब तो जड़े अपने
अंतरिप को छू चुकी थी
पा चुकी थी गहराईयों का छोर
पत्तों ने भी अब साथ छोड दिया डालियाँ भी एक-2 कर टूटने लगी
यह देख मेरी जड़े हिल गयी
चिंता चिता बन मुझे जलाने लगी बन अपने जो करते थे कभी रैन बसेरा
वह भी अब दूर जाने लगे
पीड़ा जो नित्य सहने लगा
सोचने लगा क्या यही है ?
बुढ़ापा, खड़ा ‘योगी’ महसूस
करने लगा कि जर्जरता ही है बुढ़ापा !!!
रचित- डॉ. संजय कुमार यादव “योगी”







