Drishyam 3 Review: अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित क्राइम-थ्रिलर फिल्म ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ दर्शकों के सामने है। अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के किरदार में नजर आते हैं। फिल्म में तब्बू, श्रिया सरन, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव, रजत कपूर, प्रकाश राज और जयदीप अहलावत भी अहम भूमिकाओं में हैं। यह कहानी विजय और उसके परिवार के उस संघर्ष को आगे बढ़ाती है, जिसका सिलसिला पिछली फिल्मों से चला आ रहा है।
2 अक्टूबर का राज फिर बना कहानी का केंद्र
फिल्म की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है, जहां ‘दृश्यम 2′ की कहानी खत्म हुई थी। वक्त गुजर चुका है, लेकिन 2 अक्टूबर की घटना का रहस्य अब भी कहानी के केंद्र में बना हुआ है।
मीरा देशमुख के किरदार में तब्बू एक बार फिर अपने बेटे के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ती दिखाई देती हैं। इस बार भी कानून और परिवार के बीच संघर्ष बना रहता है। दूसरी तरफ विजय सलगांवकर अपने परिवार को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करता है।
फिल्म की कहानी का असली रोमांच इसी बात में है कि सच आखिर सामने आएगा या विजय एक बार फिर अपने परिवार को कानून के शिकंजे से बचाने में कामयाब होगा।
अजय देवगन और तब्बू की एक्टिंग बनी मजबूत कड़ी
विजय सलगांवकर के किरदार में अजय देवगन एक बार फिर अपने शांत और संयमित अंदाज से प्रभाव छोड़ते हैं। उनके चेहरे के भाव और कम संवादों के जरिए स्थिति को संभालने वाला अंदाज किरदार को मजबूती देता है।
वहीं तब्बू ने मीरा देशमुख के किरदार में भावनात्मक तनाव को अच्छी तरह पकड़ा है। उनके किरदार में एक मां का दर्द और बेटे के लिए इंसाफ पाने की जिद दोनों नजर आती हैं।
फिल्म में जयदीप अहलावत की एंट्री कहानी को नया मोड़ देती है। क्राइम ब्रांच अधिकारी के रूप में उनका किरदार जांच और सस्पेंस को आगे बढ़ाता है। प्रकाश राज भी वकील के किरदार में संतुलित नजर आते हैं।
इंटरवल के बाद बढ़ता है सस्पेंस
अभिषेक पाठक का निर्देशन फिल्म की शुरुआत में कहानी को धीरे-धीरे आगे बढ़ाता है। हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार बढ़ती है और कहानी में लगातार नए मोड़ आने लगते हैं।
दूसरे हाफ में जांच, सस्पेंस और माइंड गेम पर ज्यादा जोर दिया गया है। दर्शकों को यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है कि विजय इस बार कौन-सा रास्ता अपनाएगा और क्या पुलिस उसके परिवार तक पहुंच पाएगी।
फिल्म में पिछली कड़ियों की तरह पारिवारिक भावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इस बार कहानी का फोकस थ्रिल और जांच-पड़ताल की तरफ ज्यादा दिखाई देता है।
कैसी है ‘दृश्यम 3’?
अगर आपको क्राइम, सस्पेंस और ट्विस्ट वाली फिल्में पसंद हैं और आपने दृश्यम सीरीज की पिछली दोनों फिल्में देखी हैं, तो तीसरा अध्याय कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। अजय देवगन का अभिनय, तब्बू की मजबूत मौजूदगी और जयदीप अहलावत का किरदार फिल्म के रोमांच को बढ़ाते हैं।
कुल मिलाकर, ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ में परिवार, कानून, सच और झूठ के बीच चलने वाला खेल एक बार फिर देखने को मिलता है। खासकर फिल्म का दूसरा भाग सस्पेंस पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ज्यादा दिलचस्प हो सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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