नई दिल्ली: देश की राजनीति और चुनावी प्रक्रिया को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी ख़बर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित करने और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों की समीक्षा करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।
अदालत ने सख्त लहजे में साफ कर दिया है कि भले ही वह चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर शुरू में कानून के मुताबिक चलने का अनुमान लगाती है, लेकिन अगर आयोग का कोई भी फैसला कानून के खिलाफ पाया गया—तो उसे तुरंत रद्द (Annul) कर दिया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद? (Why is this happening?)
विपक्ष और याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनावी नामावलियों (Electoral Rolls) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले बिना अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) की सहमति के एकतरफा लिए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने-घटाने और फॉर्म-6 (Form 6) में बदलाव जैसे मुद्दों पर पिछले 10 महीनों में 14 से ज्यादा बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
याचिकाकर्ता का दावा: ‘कानून की उड़ाई गई धज्जियां’
याचिका में 2023 के चुनाव आयोग कानून की धारा 18 (Section 18) का हवाला दिया गया है। इसके तहत बहु-सदस्यीय आयोग का कोई भी फैसला या तो सर्वसम्मति से होना चाहिए या बहुमत (Majority) के आधार पर। आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य आयुक्तों को दरकिनार कर खुद सारे फैसले ले लिए, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और 1 हफ्ते की मोहलत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant), न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागछी और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और चुनाव आयोग से एक सप्ताह (7 दिनों) के भीतर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा: “अगर चुनाव आयोग द्वारा लिया गया कोई भी फैसला गैर-कानूनी पाया गया, तो अदालत उसे बिना किसी हिचकिचाहट के रद्द कर देगी।”
देश भर में प्रदर्शन और गरमाई राजनीति
इस खुलासे के बाद से देश भर में सियासत पूरी तरह गरमा गई है:
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विपक्षी दलों की मांग: कांग्रेस, टीएमसी, आप, सपा, शिवसेना (UBT) समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषणExclusive -
सड़कों पर विरोध: दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक तक में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में भी अनुमति न मिलने के बावजूद हज़ारों लोगों ने जुटकर प्रदर्शन किया।
चुनाव आयोग का पक्ष
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने एकतरफा फैसलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आंतरिक मतभेद और टिप्पणियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, SIR और मतदाता सूचियों से जुड़े सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
अगर सुप्रीम कोर्ट जांच के बाद ज्ञानेश कुमार के फैसलों को अवैध ठहराता है, तो देश भर में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के तहत किए गए हजारों वोटर लिस्ट बदलाव, नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया रद्द या दोबारा हो सकती है। अदालत का अंतिम फैसला देश की चुनावी साख और पारदर्शिता को तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगा।
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक। झारखंड, बिहार और राष्ट्रीय राजनीति, शिक्षा, प्रशासनिक मामलों और विकास नीतियों पर 10+ वर्षों का जमीनी पत्रकारिता अनुभव। निष्पक्ष और प्रमाणिक समाचार रिपोर्टिंग के लिए समर्पित।












