रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने स्पेशल PMLA कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान फिलहाल हेमंत सोरेन को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। अदालत ने मामले में ED का जवाब मांगा है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, यह मामला ECIR Case No. 06/2023 से जुड़ा है।
PMLA कोर्ट के आदेश को दी चुनौती
हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी। उनकी याचिका का संबंध PMLA मामले में आगे की कार्यवाही और आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया से है।
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को एक अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी थी। उस मामले में दलील दी गई थी कि अभियोजन के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित मामले में कार्यवाही रोकने का आधार नहीं बनता और PMLA कोर्ट को कानून के अनुसार आगे बढ़ने को कहा।
जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हो रही सुनवाई
ED का मामला रांची के बरियातू-बड़गाईं क्षेत्र की जमीन से जुड़े कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है। हाईकोर्ट के 18 सितंबर के आदेश में ED की जांच के दौरान 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े आरोपों और रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का भी उल्लेख किया गया है। ये आरोप जांच एजेंसी के पक्ष का हिस्सा हैं।
इस मामले में PMLA कोर्ट ने जून 2026 में हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका भी खारिज की थी। इसके बाद मामले में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। सितंबर में इस प्रक्रिया को लेकर कई बार सुनवाई की तारीख बदली गई।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट में अब मामले की आगे की सुनवाई ED के जवाब के बाद होगी। अदालत के सामने मुख्य सवालों में निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका और आरोप तय करने की प्रक्रिया से जुड़े कानूनी मुद्दे शामिल हैं।
फिलहाल PMLA मामले की निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर हाईकोर्ट से रोक का आदेश नहीं मिला है। 18 सितंबर के हाईकोर्ट आदेश में भी ट्रायल कोर्ट को मामले में कानून के मुताबिक आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया था।
अब 30 नवंबर को होगी सुनवाई
हाईकोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी। कोर्ट ने ED को सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 30 नवंबर को होगी।
याचिका की मेंटनेबिलिटी यानी स्वीकार्यता समेत मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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