रांची: राजधानी रांची का समाहरणालय, जिसे आधिकारिक रूप से Ranchi Collectorate Building कहा जाता है, जिले की प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यहीं से पूरे जिले में कानून-व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण, राजस्व संग्रह, आपदा प्रबंधन, चुनाव संचालन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की निगरानी की जाती है।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी महत्वपूर्ण इमारत में आग से सुरक्षा के इंतजाम ही खुद असुरक्षित नजर आ रहे हैं।
समाहरणालय में कितने ब्लॉक और कितने कार्यालय?
रांची समाहरणालय परिसर में मुख्यतः ब्लॉक A, ब्लॉक B और अन्य सहायक भवन शामिल हैं। पूरे परिसर में अनुमानित तौर पर 80 से अधिक कक्ष (कमरे/कार्यालय) संचालित होते हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों कर्मचारी और आम नागरिक आते-जाते हैं।
प्रमुख कार्यालय और विभाग:
- उपायुक्त (Deputy Commissioner) कार्यालय
- अपर समाहर्ता (Additional Collector)
- जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (Land Acquisition Office)
- जिला आपूर्ति पदाधिकारी
- जिला पंचायती राज पदाधिकारी
- जिला समाज कल्याण विभाग
- आपदा प्रबंधन शाखा
- कोषागार (Treasury Office)
- स्थापना शाखा
- नजारत शाखा
- रिकॉर्ड रूम (महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भंडारण)
ब्लॉक B: सबसे संवेदनशील लेकिन सबसे असुरक्षित?
ब्लॉक B को प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यहां निम्न अधिकारियों के कार्यालय संचालित होते हैं:
- एसएसपी कार्यालय
- ग्रामीण एसपी कार्यालय
- सिटी एसपी कार्यालय
- एसडीओ (अनुमंडल पदाधिकारी) कार्यालय
- विभिन्न शाखाओं के प्रशासनिक कक्ष
इन कार्यालयों में प्रतिदिन आम जनता, पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मियों की आवाजाही बनी रहती है।
लेकिन जांच के दौरान पाया गया कि ब्लॉक B के प्रत्येक तल पर लगे कई फायर एक्सटिंग्विशर्स की वैधता फरवरी माह में ही समाप्त हो चुकी है।
फायर सेफ्टी सिस्टम की स्थिति क्या है?
- कई जगहों पर लगे फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके हैं
- कुछ सिलेंडरों पर सर्विसिंग की तिथि अपडेट नहीं
- फ्लोर पर फायर अलार्म सिस्टम की स्थिति स्पष्ट नहीं
- इमरजेंसी एग्जिट संकेतों की कमी
ऐसे में अगर किसी भी तल पर शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों से आग लगती है, तो शुरुआती नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।
रिकॉर्ड रूम और महत्वपूर्ण दस्तावेज खतरे में
समाहरणालय में हजारों जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, सरकारी फाइलें, भूमि अधिग्रहण के दस्तावेज और कोर्ट केस से संबंधित फाइलें सुरक्षित रखी जाती हैं।
अगर आग जैसी घटना होती है तो यह केवल जान-माल का ही नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के नुकसान का भी बड़ा खतरा बन सकता है।
हालांकि, सवाल यह है कि जब यह जिला प्रशासन का मुख्यालय है, तो फायर सेफ्टी ऑडिट नियमित रूप से क्यों नहीं किया गया?
बड़ा सवाल
जिस भवन से पूरे जिले की सुरक्षा व्यवस्था नियंत्रित होती है, अगर वही भवन अग्नि सुरक्षा के बुनियादी मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो जिम्मेदारी किसकी है?
क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेगा, या समय रहते फायर फाइटिंग सिस्टम को अपडेट किया जाएगा?













