रांची: झारखंड की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में लगाए गए सरकारी वाहन और सुरक्षाकर्मियों को राज्य सरकार को वापस लौटा दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खास बात यह भी रही कि दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन में, जहां झारखंड सरकार ने करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े एमओयू पर हस्ताक्षर किए, वहां भी वित्त मंत्री की मौजूदगी नहीं दिखी।
हालांकि सरकार की ओर से उनकी अनुपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए इसे उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कुछ समय पहले पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा में तैनात 16 पुलिसकर्मियों की आवाजाही के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि तीन वाहनों में सभी सुरक्षाकर्मियों को बैठाना व्यावहारिक और सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।
मंत्री के अनुसार, इस अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके उलट पुलिस मुख्यालय की ओर से उनके कार्यालय को एक सरकारी वाहन वापस करने का नोटिस भेज दिया गया। इसी बात से नाराज होकर उन्होंने अपनी सुरक्षा में लगे 16 सुरक्षाकर्मियों और तीन सरकारी वाहनों को सरकार को वापस करने का फैसला ले लिया।
पत्र में जताई नाराजगी
वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त वाहन की मांग की थी, लेकिन उस पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद वाहन वापस करने का नोटिस भेजा जाना उनके लिए “शर्मिंदगी का विषय” है।
उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि तीन वाहनों में 16 पुलिस जवानों को ठूंसकर बैठाना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है। इसलिए उन्होंने वाहन सहित पूरी सुरक्षा व्यवस्था सरकार को वापस करने का निर्णय लिया।
बिना सुरक्षा कार्यक्रमों में पहुंचे मंत्री
शुक्रवार को राधाकृष्ण किशोर पहले खेलगांव स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे और उसके बाद प्रोजेक्ट भवन सचिवालय भी गए। इस दौरान उनके साथ सामान्य सुरक्षा काफिला या सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आए। इससे उनके फैसले की चर्चा और तेज हो गई।
दिल्ली के निवेश कार्यक्रम से भी रहे दूर
इसी बीच दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के दौरान झारखंड सरकार ने करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू किए। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे, लेकिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर नजर नहीं आए।
हालांकि उनकी अनुपस्थिति को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इसे हालिया नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक चर्चाएं तेज
राधाकृष्ण किशोर कांग्रेस कोटे से झारखंड सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में उनका सरकारी वाहन और सुरक्षा व्यवस्था लौटाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और आगे क्या समाधान निकलता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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