रविवार, अक्टूबर 11, 2026
Khabar Mantra
No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
    • चतरा Chatra
    • चाईबासा Chaibasa
    • गोड्डा Godda
    • खूंटी Khunti
    • लातेहार Latehar
    • पाकुड़ Pakur
    • रामगढ़ Ramgarh
    • साहिबगंज Sahibganj
    • सरायकेला खरसावां Seraikela Kharsawan
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी
Khabar Mantra

16 साल नक्सली संगठन में रहा, 2010 में BDO को किया अगवा…अब 9 साल जेल के बाद घर लौटे कान्हु मुंडा

कान्हु मुंडा करीब 9 साल 7 महीने जेल में रहने के बाद घर लौटे। उन्होंने नक्सली संगठन से जुड़ने, 2010 के BDO अपहरण और आत्मसमर्पण के बाद की जिंदगी पर बात की। पढ़ें पूरी खबर...

सितम्बर 24, 2026
in खबर हटके
A A
झारखंड के पूर्व नक्सली कमांडर कान्हु मुंडा 9 साल 7 महीने बाद अपने गांव लौटे

घर लौटने के बाद खबर मंत्र के संवाददाता आदित्य सिंह से बातचीत करते पूर्व नक्सली कमांडर कान्हु मुंडा

Share on FacebookShare on Twitter
WhatsApp चैनल से जुड़ें ताजा समाचार सीधे WhatsApp पर पाएं
जॉइन करें
Google News पर खबर मन्त्र को फॉलो करेंझारखंड की हर ब्रेकिंग खबर के लिए स्टार दबाएं
फॉलो करें
यह खबर सुनेंऑडियो
समय: ~14 मिनट•हिंदी बुलेटिन

Jharkhand: कभी नक्सली संगठन में सक्रिय रहे पूर्व नक्सली कमांडर सह जोनल सचिव कान्हु मुंडा करीब नौ साल सात महीने जेल में रहने के बाद अब अपने घर लौट आए हैं। 11 सितंबर 2026 को गुड़ाबांदा प्रखंड के जियान गांव स्थित बनगोड़ा टोला पहुंचने के बाद उन्होंने खबर मंत्र के प्रतिनिधि से बातचीत में अपने जीवन के कई पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह क्षेत्र में कथित शोषण और पुलिस प्रताड़ना की घटनाओं ने उनके भीतर व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश पैदा किया और किस तरह उन्होंने साल 2010 में धालधालभूमगढ़ के तत्कालीन बीडीओ को अगवा किया। जिसने पूरे राज्य में खलबली मचा दी थी।

Table of Contents

Toggle
  • पुलिस प्रताड़ना ने हथियार उठाने पर किया मजबूर
    • सेल कमेटी से शुरू हुआ था सफर, स्टेड कमेटी तक पहुंचे
      • 72 मामलों में दर्ज था नाम, 37 मामलों से हटाया गया
      • पुनर्वास नीति के तहत मिली 30 लाख रुपये की सहायता
    • अब हथियार नहीं, लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे लोगों की आवाज
      • सरेंडर के समय विकास और सड़क का मिला था आश्वासन
      • झारखंड बनने के बाद सोशल पुलिसिंग से बदला माहौल
    • 2010 में BDO प्रशांत कुमार लायक का किया गया था अपहरण
      • अब क्षेत्र के विकास को लेकर सक्रिय होने की बात

कान्हु मुंडा ने बताया कि, वर्ष 1998 में उन्होंने नक्सली संगठन का दामन थामा था। इसके बाद करीब 16-17 वर्षों तक वह संगठन से जुड़े रहे। संगठन में रहते हुए उन्होंने अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में स्टेड कमेटी के सदस्य तक पहुंचे। हालांकि, वर्ष 2017 में उन्होंने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। जिसके तहत उन्होंने 15 फरवरी 2017 को अपने सात अन्य साथियों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार की नक्सली पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने यह कदम उठाया था।

📌 यह भी पढ़ें:
  • मां रूपी सोरेन की जिंदगी से सीखिए वो बातें, जो शायद हमें बहुत देर से समझ आती हैं
  • जानिए महात्मा गांधी जी के पास कैसे पहुंचे वो 3 बंदर की अनोखी कहानी
  • गांधी जयंती: सोना चुराकर जब रो पड़े थे 15 साल के गांधी... पिता के एक फैसले ने बदल दी दुनिया!

पुलिस प्रताड़ना ने हथियार उठाने पर किया मजबूर

कान्हु मुंडा ने नक्सली संगठन से जुड़ने के पीछे अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया। उनका कहना है कि संगठन में शामिल होने से पहले गुड़ाबांदा थाना की पुलिस ने उन्हें एक हत्या के मामले में पकड़कर थाने ले गई थी। उनके मुताबिक, उस दौरान उन्हें कथित तौर पर काफी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। कान्हु मुंडा के अनुसार, इस घटना ने उनके मन में पुलिस और तत्कालीन व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश पैदा किया।

इसके साथ ही स्थानीय लोगों और मजदूरों के कथित शोषण, विभागीय अधिकारियों तथा ठेकेदारों की कार्यप्रणाली को लेकर भी उनके मन में असंतोष था। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों ने उन्हें सशस्त्र क्रांति की विचारधारा की ओर आकर्षित किया। साथ ही उन्होंने बताया कि उस समय छत्तीसगढ़ से आए माओवादी नेता श्रीधर की विचारधारा से भी वह प्रभावित हुए और इसी के बाद संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ती चली गई।

खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट
Exclusive Report
खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट

सेल कमेटी से शुरू हुआ था सफर, स्टेड कमेटी तक पहुंचे

कान्हु मुंडा ने बताया कि वर्ष 1998 में संगठन में शामिल होने के बाद शुरुआत में उन्हें सेल कमेटी में जिम्मेदारी मिली। इसके बाद संगठन के भीतर अलग-अलग स्तर पर काम करते हुए वह धीरे-धीरे आगे बढ़े। उनके अनुसार, वर्षों तक संगठन में काम करने के दौरान उन्होंने क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ ग्रामीणों से जुड़े कई मुद्दों पर भी काम किया। बाद में वह स्टेड कमेटी के सदस्य बने और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।

झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
Special Report

72 मामलों में दर्ज था नाम, 37 मामलों से हटाया गया

अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी देते हुए कान्हु मुंडा ने बताया कि झारखंड और पश्चिम बंगाल में उनके खिलाफ कुल 72 नक्सली मामले दर्ज थे। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद जब मामलों की जांच हुई तो 37 मामलों को हटा दिया गया। बाकी 35 मामलों में अदालत में मुकदमे चले। इनमें से 33 मामलों में उन्हें अदालत से बरी कर दिया गया, जबकि दो मामलों में उन्हें जमानत मिली। इसके बाद वह जेल से बाहर आए और 11 सितंबर को अपने घर लौटे।

पुनर्वास नीति के तहत मिली 30 लाख रुपये की सहायता

आत्मसमर्पण के बाद सरकार की ओर से मिले लाभ के बारे में कान्हु मुंडा ने बताया कि झारखंड सरकार की नक्सली पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सहायता मिली है। उनके मुताबिक, उन पर घोषित 25 लाख रुपये की इनामी राशि तथा 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा सरकार की ओर से भूमि भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास पैकेज से जुड़ी कुछ सुविधाएं अभी बाकी हैं। इन्हें हासिल करने के लिए वह जल्द ही जिले के वरीय अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और अपनी मांग रखेंगे।

झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण
Special Coverage
झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण

अब हथियार नहीं, लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे लोगों की आवाज

नक्सली संगठन छोड़ने के बाद भविष्य की भूमिका के सवाल पर कान्हु मुंडा ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनका कहना है कि जिस समय वह संगठन में शामिल हुए थे, उस समय की परिस्थितियां और आज की परिस्थितियों में अंतर है। उन्होंने कहा कि अब वह क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर किसी तरह की हिंसा या हथियार का रास्ता नहीं अपनाएंगे। जनसमस्याओं को सांसद, विधायक, स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के सामने रखकर उनके समाधान की कोशिश करेंगे।

कान्हु मुंडा ने कहा कि संगठन में रहते हुए भी उन्होंने क्षेत्र के लोगों के लिए काम किया था और आगे भी लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाने का प्रयास करेंगे। हालांकि अब इसके लिए उनका रास्ता लोकतांत्रिक होगा।

सरेंडर के समय विकास और सड़क का मिला था आश्वासन

कान्हु मुंडा ने अपने गांव में विकास की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में आत्मसमर्पण के दौरान अधिकारियों की ओर से क्षेत्र में विकास कार्य कराने और सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था। उनका कहना है कि आज भी उनके टोला और घर तक पक्की सड़क नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार या टोला में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब हो जाए तो उसे इलाज के लिए खटिया पर लेटाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

कान्हु मुंडा के अनुसार, टोला में सोलर पानी टंकी का निर्माण हुआ है। कुछ परिवारों को अबुआ आवास अथवा प्रधानमंत्री आवास भी मिला है, लेकिन क्षेत्र में अभी कई विकास कार्य किए जाने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य केवल पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाना नहीं, बल्कि उनके क्षेत्रों में विकास का माहौल तैयार करना भी होना चाहिए।

झारखंड बनने के बाद सोशल पुलिसिंग से बदला माहौल

कान्हु मुंडा ने झारखंड राज्य बनने के बाद पुलिस की कार्यशैली में आए बदलाव का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, पहले जिन इलाकों में पुलिस और ग्रामीणों के बीच दूरी थी, वहां बाद में सोशल पुलिसिंग के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से स्कूली बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री का वितरण, युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताएं और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे ग्रामीणों के बीच पुलिस को लेकर धारणा में बदलाव आया। उनके मुताबिक, पुलिस और प्रशासन की ओर से किए गए इन प्रयासों के बाद लोगों में यह समझ विकसित हुई कि समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यधारा से जुड़कर भी रास्ता निकाला जा सकता है।

खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
Exclusive

2010 में BDO प्रशांत कुमार लायक का किया गया था अपहरण

कान्हु मुंडा ने संगठन में रहते हुए हुई कई बड़ी वारदातों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि साल 2010 में उनके दस्ते ने राज्य के सबसे बड़े अपहरण की घटनाओं में से एक को अंजाम दिया था। इस दौरान तत्कालीन ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) प्रशांत कुमार लायक को अगवा कर लिया गया था। कान्हु मुंडा के मुताबिक, प्रशांत कुमार लायक को उनके संगठन ने करीब छह दिनों तक बंधक बनाकर रखा था।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने कुछ निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन्हीं लोगों की रिहाई की मांग को लेकर BDO का अपहरण किया गया था। कान्हु मुंडा ने बताया कि बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के कहने पर प्रशांत कुमार लायक को रिहा कर दिया गया था। उन्होंने संगठन में रहते हुए इस घटना समेत कई अन्य वारदातों का भी जिक्र किया।

अब क्षेत्र के विकास को लेकर सक्रिय होने की बात

करीब नौ साल सात महीने जेल में बिताने के बाद घर लौटे कान्हु मुंडा अब अपने क्षेत्र के विकास को लेकर सक्रिय होने की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक संघर्ष और संगठन में रहने के बाद अब वह सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र की सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी समस्याओं को लेकर वह जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अब उनका रास्ता लोकतांत्रिक होगा और वह इसी माध्यम से क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास करेंगे।

कान्हु मुंडा की कहानी में एक तरफ नक्सली संगठन में उनके लंबे समय तक सक्रिय रहने और गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमों का उल्लेख है, वहीं दूसरी ओर आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास नीति के जरिए मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया भी सामने आती है। अब घर वापसी के बाद वह अपने क्षेत्र में विकास और स्थानीय समस्याओं को लेकर आवाज उठाने की बात कह रहे हैं।

Ritika Singh
Ritika Singh

कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।

ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स
Top Updates
ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स

Related Posts

रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर बैठी हैं और उनके पास हेमंत सोरेन सफेद वस्त्रों में बैठे नजर आ रहे हैं।
झारखंड Jharkhand News

मां रूपी सोरेन की जिंदगी से सीखिए वो बातें, जो शायद हमें बहुत देर से समझ आती हैं

अक्टूबर 7, 2026
Mahatma Gandhi three monkeys symbol image for Gandhi Jayanti story
खबर हटके

जानिए महात्मा गांधी जी के पास कैसे पहुंचे वो 3 बंदर की अनोखी कहानी

अक्टूबर 2, 2026
Mahatma Gandhi image for Gandhi Jayanti special story
खबर हटके

गांधी जयंती: सोना चुराकर जब रो पड़े थे 15 साल के गांधी… पिता के एक फैसले ने बदल दी दुनिया!

अक्टूबर 2, 2026
Next Post
Video of incident similar to the Jamui case goes viral in Samastipur; girl allegedly mistreated on the road.

समस्तीपुर में Jamui जैसी घटना का वीडियो वायरल, सड़क पर लड़की से बदसलूकी का आरोप

Minister Deepika Pandey Singh devastated by the loss of Trisha; a mother's grief visible at Ranchi Airport.

तृषा को खोकर टूट गईं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, Ranchi एयरपोर्ट पर दिखा मां का दर्द

Aaj Ka Rashifal 11 October 2026 शारदीय नवरात्र के पहले दिन सभी 12 राशियों का राशिफल

Horoscope 11 October 2026: शारदीय नवरात्र के पहले दिन धनु को बड़ा पैकेज तो सिंह को बंपर मुनाफा!

अक्टूबर 11, 2026

रास्ता भटके युवकों पर कोयला चोरी का शक, 7 घंटे हिरासत में रखने पर उठे सवाल

रांची विश्वविद्यालय वॉलीबॉल टूर्नामेंट में मारवाड़ी कॉलेज चैंपियन, संत जेवियर उपविजेता बनी

महालया के दिन आंदोलन को लेकर मरांडी का बयान, इंडी गठबंधन पर लगाए आरोप

महिला पर डायन होने का आरोप लगाने पर तथाकथित भगत की पिटाई, जूते-चप्पल की माला पहनाई

धनबाद में वाहन जांच अभियान, 35 वाहनों पर 13.70 लाख रुपये जुर्माना

Khabar Mantra

© 2025 Khabar Mantra

Navigate Site

  • Home
  • Privacy Policy
  • Corrections Policy
  • Editorial Policy
  • Terms of Service (नियम और शर्तें)
  • Contact Us
  • Sitemap

Follow Us

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
व्हाट्सएप शेयर ग्रुप से जुड़ें
✕
अगला लेख
✕

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
    • चतरा Chatra
    • चाईबासा Chaibasa
    • गोड्डा Godda
    • खूंटी Khunti
    • लातेहार Latehar
    • पाकुड़ Pakur
    • रामगढ़ Ramgarh
    • साहिबगंज Sahibganj
    • सरायकेला खरसावां Seraikela Kharsawan
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी

© 2025 Khabar Mantra

📍

अपना शहर / जिला चुनें

झारखंड व बिहार के प्रमुख जिलों की ताजा खबरें

🌟 रांची (Ranchi) राजधानी 🌟 धनबाद (Dhanbad) कोयलांचल 🌟 जमशेदपुर (Tata) इस्पात नगरी बोकारो (Bokaro) पलामू (Palamu) हजारीबाग (Hazaribagh) गिरिडीह (Giridih) देवघर (Deoghar) कोडरमा (Koderma) दुमका (Dumka) रामगढ़ (Ramgarh) गढ़वा (Garhwa) गुमला (Gumla) चाईबासा (Chaibasa) चतरा (Chatra) लोहरदगा (Lohardaga) सिमडेगा (Simdega) जामताड़ा (Jamtara) खूंटी (Khunti) लातेहार (Latehar) साहिबगंज (Sahibganj) पाकुड़ (Pakur) गोड्डा (Godda) सरायकेला (Seraikela) 🚩 बिहार (Bihar News) 🏹 पूरा झारखंड (All)
होम आप का शहर K जॉब्स Shorts