रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 1 जुलाई को देय काल्पनिक वार्षिक वेतनवृद्धि (Notional Increment) का लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि यह लाभ केवल 11 अप्रैल 2023 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के वित्त विभाग की 16 मार्च 2024 की अधिसूचना की व्याख्या करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि Notional Increment का लाभ 1 जनवरी 2006 से लागू व्यवस्था के आधार पर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही संबंधित कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन कर एरियर समेत भुगतान आठ सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।
दो सेवानिवृत्त अधिकारियों ने दायर की थी याचिका
यह मामला सड़क निर्माण विभाग के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों की याचिकाओं से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख यानी 30 जून तक एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी।
नियम के मुताबिक उन्हें अगले दिन यानी 1 जुलाई को वार्षिक वेतनवृद्धि मिलनी थी। हालांकि 30 जून को ही सेवानिवृत्त हो जाने के कारण उन्हें उस इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिल पाया। इससे उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ भी प्रभावित हुए।
इसी आधार पर सेवानिवृत्त अधिकारियों ने हाईकोर्ट से अपनी पेंशन और संबंधित लाभों को संशोधित करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया गया था हवाला
याचिकाकर्ताओं ने अपने दावे के समर्थन में 11 अप्रैल 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में 30 जून को रिटायर होने वाले कर्मचारियों को 1 जुलाई को मिलने वाले एक काल्पनिक इंक्रीमेंट का लाभ देने का सिद्धांत स्वीकार किया गया था।
हालांकि झारखंड सरकार ने अपने स्तर पर जारी अधिसूचना में इस लाभ का दायरा सीमित कर दिया था।
सरकार ने 11 अप्रैल 2023 के बाद के मामलों तक सीमित किया था लाभ
राज्य के वित्त विभाग ने 16 मार्च 2024 को अधिसूचना जारी कर Notional Increment का प्रावधान स्वीकार किया था। लेकिन इसमें लाभ को उन कर्मचारियों तक सीमित रखा गया था, जो 11 अप्रैल 2023 के बाद 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए थे।
सरकार का पक्ष था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला 11 अप्रैल 2023 के बाद के मामलों पर लागू माना जाना चाहिए। इसलिए उससे पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इस लाभ के दायरे में नहीं रखा जा सकता।
हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को नहीं माना
हाईकोर्ट ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट किसी फैसले को स्पष्ट रूप से केवल भविष्य के मामलों पर लागू नहीं करता है, तो उसके जरिए स्पष्ट की गई कानूनी स्थिति को पुराने मामलों में भी लागू किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि 11 अप्रैल 2023 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला कोई नया अधिकार पैदा नहीं करता, बल्कि पहले से मौजूद कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है।
इसी वजह से केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख के आधार पर पुराने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को Notional Increment से बाहर करना उचित नहीं है।
1 जनवरी 2006 से लागू माना गया लाभ
अदालत ने अपने फैसले में छठे वेतन आयोग की सिफारिशों और उनसे जुड़ी वेतन व्यवस्था का भी उल्लेख किया। कोर्ट के अनुसार संबंधित व्यवस्था 1 जनवरी 2006 से प्रभावी थी।
ऐसे में Notional Increment के लिए केवल 11 अप्रैल 2023 को कटऑफ तारीख मानने का कोई उचित आधार नहीं बनता। अदालत ने सरकार की अधिसूचना को उसी सीमा तक सीमित करते हुए पढ़ा और कहा कि पात्र कर्मचारियों को उनकी संबंधित सेवानिवृत्ति तिथि के आधार पर लाभ दिया जाना चाहिए।
हालांकि इसके लिए यह शर्त रहेगी कि संबंधित कर्मचारी 1 जनवरी 2006 के बाद सेवानिवृत्त हुआ हो।
पुराने पेंशनरों के लिए भी खुला रास्ता
झारखंड हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य के उन कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत का रास्ता खुल गया है, जो 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे और केवल एक दिन के अंतर के कारण 1 जुलाई के वार्षिक इंक्रीमेंट से वंचित रह गए थे।
पात्र कर्मचारियों की पेंशन का दोबारा निर्धारण किया जा सकता है और उन्हें बकाया राशि यानी एरियर भी मिल सकती है। कोर्ट ने संबंधित लाभ आठ सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया है।
यह फैसला खास तौर पर उन पुराने पेंशनरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो 11 अप्रैल 2023 से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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