हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटे
Jharkhand पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों ने 11 हथियार और 1,562 जिंदा गोलियां भी पुलिस को सौंपी हैं। इनमें अलग-अलग रैंक के कमांडर शामिल हैं, जिनमें RCM, ZCM, SZCM और ACM स्तर के सदस्य भी हैं। इस कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश यह है कि पुलिस केवल निचले स्तर के कैडरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि संगठन की नेतृत्व संरचना से जुड़े लोगों को भी मुख्यधारा में लाने में सफल हुई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ये सभी कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगलों की गहरी जानकारी रखने वाले सक्रिय सदस्य थे, जिनकी भूमिका माओवादी अभियानों में अहम मानी जाती थी।इन बड़े हमलों में रहे शामिल
पुलिस द्वारा जारी “इम्पोर्टेंट केस” दस्तावेज के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सली निम्नलिखित बड़ी घटनाओं में शामिल रहे— • वर्ष 2021 में टोंटो थाना क्षेत्र में IED विस्फोट, जिसमें झारखंड जगुआर के जवान शहीद और घायल हुए। • 2022 में सुरक्षा बलों पर हमला और हथियार लूट की घटना। • 2023 में टोंटो क्षेत्र में CRPF और पुलिस पर घात लगाकर हमला। • 2024 में ग्रामीण की हत्या। • 2025 में कई IED विस्फोट, जिनमें CRPF और कोबरा बटालियन के जवान घायल हुए तथा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। • 2026 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ और IED विस्फोट की घटना। इन मामलों से स्पष्ट होता है कि आत्मसमर्पण करने वाले सदस्य केवल संगठन के साधारण कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि कई हिंसक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे। Read More: झारखंड-छत्तीसगढ़ के लगभग 24 नक्सलियों ने किया सरेंडर, ऑपरेशन नवजीवन-2…2026 में लगातार मिल रही सफलता
Jharkhand पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक— • 93 नक्सलियों की गिरफ्तारी • 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया • 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए इसके पहले भी मई, जुलाई और अन्य अभियानों में कई इनामी नक्सलियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण हो चुका है। पुनर्वास नीति का दिख रहा असर पुलिस का कहना है कि लगातार सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। संगठन के भीतर बढ़ते दबाव, आंतरिक असंतोष और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण कई नक्सली हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का फैसला कर रहे हैं।कोल्हान और सारंडा में कमजोर पड़ता माओवादी नेटवर्क
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश सदस्य पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, खूंटी, हजारीबाग, बोकारो, रांची, सरायकेला-खरसावां और गिरिडीह समेत विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं। पुलिस का दावा है कि इनके आत्मसमर्पण के बाद विशेष रूप से पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियां अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही हैं।
विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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