Jharkhand: 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 के छठे दिन झारखंड पवेलियन पूरी तरह से चर्चा में रहा। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इस बार हरित अर्थव्यवस्था और सतत विकास के अपने मॉडल को प्रमुखता से प्रदर्शित किया है। खासकर सिसल (एगेव) और जूट आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी ने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
सिसल खेती: झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ला रही बड़ा बदलाव
झारखंड में सिसल (एगेव) पौधे की खेती तेजी से ग्रामीण आजीविका का अभिनव माध्यम बन रही है। कम पानी और प्रतिकूल मौसम में उगने वाला यह पौधा प्राकृतिक फाइबर का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसका उपयोग रस्सी, मैट, बैग और विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पादों में किया जाता है।
इसके साथ ही सिसल रस से बायो-एथेनॉल उत्पादन की संभावनाएँ राज्य में स्वच्छ ऊर्जा मॉडल को मजबूती दे रही हैं।
अनितेश कुमार, SBO ने बताया कि राज्य में 450 हेक्टेयर क्षेत्र में सिसल रोपण पूरा किया जा चुका है और विभाग का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में 100 हेक्टेयर और बढ़ाने का है।
पिछले वर्ष 150 मीट्रिक टन सिसल का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष 82 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है।
वन विभाग सिसल आधारित गतिविधियों के माध्यम से हर वर्ष लगभग 90,000 मानव-दिवस का रोजगार सृजित कर रहा है, जो ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध करा रहा है।
जूट उत्पादों ने दिखाई झारखंड की समृद्ध कारीगरी
पवेलियन में प्रदर्शित जूट उत्पाद झारखंड की पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान दे रहे हैं। स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए ईको-फ्रेंडली जूट बैग, सजावटी वस्तुएँ और उपयोगी हस्तनिर्मित सामग्री घरेलू व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आकर्षित कर रही है।
ये उत्पाद न केवल कला-कौशल को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि राज्य के जूट कारीगरों के लिए बाजार और रोजगार के नए अवसर भी खोल रहे हैं।
राष्ट्रीय मंच पर झारखंड के हरित नवाचारों की प्रस्तुति
IITF 2025 में झारखंड स्टॉल सिसल और जूट आधारित विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है, ताकि निवेश, तकनीकी सहयोग और बाजार विस्तार के नए द्वार खोले जा सकें। राज्य का उद्देश्य हरित उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना और जलवायु-संवेदनशील विकास को गति देना है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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