Koderma: कोडरमा जिले के प्रसिद्ध केशरिया कलाकंद को अब भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिल गया है। इस उपलब्धि के बाद स्थानीय मिठाई कारोबारियों और लोगों में खुशी की लहर है। यह मान्यता न सिर्फ इस पारंपरिक मिठाई की पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई ऊंचाई भी देगी।
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झारखंड के 11 उत्पादों को मिला GI टैग
GI टैग मिलने के साथ ही झारखंड के कुल 11 पारंपरिक उत्पादों को यह विशेष पहचान मिली है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- कोडरमा का केशरिया कलाकंद
- गोड्डा का भगैया सिल्क
- सरायकेला-खरसावां का कुचाई सिल्क
- मुंडा ज्वेलरी
- खूंटी का बांस शिल्प
- डोकरा क्राफ्ट
- दुमका के चंदर बदोनी पपेट्स
- तसर सिल्क और साड़ी
- जादूपटुआ पेंटिंग
- पंची साड़ी
- झारखंड हैंडीक्राफ्ट उत्पाद
इस प्रक्रिया में नाबार्ड (NABARD) की भी अहम भूमिका रही है, जिसने GI टैग की पुष्टि की।
कोडरमा के केशरिया कलाकंद का ऐतिहासिक सफर
कोडरमा के झुमरीतिलैया का केशरिया कलाकंद आज सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पहचान बन चुका है। इसका इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।
स्थानीय व्यापारी संदीप खेतान के अनुसार, विभाजन के बाद पाकिस्तान के रावलपिंडी से आए भाटिया परिवार ने कोडरमा में इस मिठाई की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में इसे “भाटिया स्वीट्स” के नाम से बेचा जाता था, और उस समय सफेद कलाकंद प्रसिद्ध था।
1975 में बना केशरिया कलाकंद
1975 में झुमरीतिलैया के आदर्श जलपान के एक कारीगर ने प्रयोग करते हुए पहली बार केशरिया कलाकंद तैयार किया। इसके बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और 1977 में यह दुकान “आनंद बिहार मिठाई” के रूप में स्थापित हुई।
आज भी झुमरीतिलैया की कई दुकानों में यह मिठाई बनाई जाती है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
विदेशों तक पहुंची कोडरमा की मिठास
केशरिया कलाकंद की पहचान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग बनी हुई है। प्रवासी भारतीय जब अपने देश लौटते हैं तो वे अक्सर यह मिठाई अपने साथ ले जाना नहीं भूलते।
स्थानीय लोगों का मानना है कि झुमरीतिलैया की जलवायु और परंपरागत बनाने की विधि इसके स्वाद को खास बनाती है।
GI टैग से मिलेगा बड़ा लाभ
GI टैग मिलने के बाद कोडरमा के केशरिया कलाकंद को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। इससे—
- उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी
- स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि होगी
- नकली उत्पादों पर रोक लगेगी
- पारंपरिक विरासत को कानूनी सुरक्षा मिलेगी
GI टैग किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र के उत्पाद को दी जाने वाली पहचान है, जो उसकी विशिष्टता और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। कोडरमा के केशरिया कलाकंद को मिला GI टैग झारखंड की सांस्कृतिक और पाक विरासत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल स्थानीय पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि इस पारंपरिक मिठाई को वैश्विक मंच पर भी नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा।
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कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









