Ranchi: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बरनवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का आकलन घोषणाओं से नहीं, बल्कि उस समय होना चाहिए जब किसी मरीज को आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़े।
बरनवाल ने एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर गिरिडीह के देवरी की घटना का हवाला दिया। उनके मुताबिक, कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस मरीज तक नहीं पहुंच सकी और ग्रामीणों को मरीज को खटिया पर रखकर करीब एक किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।
गैर-परिचालन और ऑक्सीजन समेत जरूरी उपकरणों की कमी
उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति पर भी सवाल उठाए। केंद्र के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की 16वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट में झारखंड के दौरे वाले जिलों में एंबुलेंस के रखरखाव और जरूरी उपकरणों की कमी दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में कुछ एंबुलेंस के लंबे समय तक गैर-परिचालन और ऑक्सीजन समेत जरूरी उपकरणों की कमी का भी उल्लेख है।
भाजपा ने RIMS की व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। जुलाई 2026 में झारखंड हाईकोर्ट ने RIMS में नियुक्तियों, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की मरम्मत में देरी पर नाराजगी जताई थी।
दवाओं की खरीद और उपलब्धता को लेकर भी जांच की मांग
बरनवाल ने दवाओं की खरीद और उपलब्धता को लेकर भी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी धन से खरीदी गई दवाओं के इस्तेमाल से पहले उनके एक्सपायर होने या अस्पतालों में दवाओं की कमी जैसी स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जून 2026 में खुद एंबुलेंस सेवाओं की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए उन्हें बेहतर और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया था।
भाजपा ने सरकार से एंबुलेंस की जिला-वार उपलब्धता, ऑक्सीजन व जीवनरक्षक उपकरणों, अस्पतालों में दवाओं और स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया का सार्वजनिक ऑडिट कराने की मांग की है।

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