Hazaribagh: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम यानी MMDR Amendment Act लागू होने के बाद केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व तथा रॉयल्टी चालान को लेकर विवाद अब कोयला कंपनियों के लिए भी चिंता का कारण बनता दिख रहा है। झारखंड में रॉयल्टी चालान जारी करने की प्रक्रिया में बने गतिरोध का सीधा असर Coal India की अनुषंगी कंपनियों BCCL, CCL और ECL के कोयला डिस्पैच पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मौजूदा स्थिति में सबसे ज्यादा चिंता भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) को लेकर है। कंपनी के पास रॉयल्टी मद में जमा अग्रिम राशि तेजी से खत्म हो रही है। यदि 30 अगस्त तक नई व्यवस्था के तहत चालान जारी करने का रास्ता साफ नहीं हुआ, तो 1 सितंबर से कोयला डिस्पैच प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
30 अगस्त तक खत्म हो सकती है BCCL की अग्रिम रॉयल्टी राशि
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक BCCL के पास रॉयल्टी के रूप में करीब 36 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जमा है। कंपनी के भुगतान खाते से प्रतिदिन लगभग 4.5 करोड़ रुपये की कटौती हो रही है। इस हिसाब से मौजूदा राशि 30 अगस्त के आसपास समाप्त होने की संभावना है। ऐसे में यदि इसके बाद नई व्यवस्था के तहत वैध रॉयल्टी चालान जारी नहीं होता है, तो 1 सितंबर से कोयले की निकासी और डिस्पैच में बाधा आ सकती है। इसका असर खदान से निकलने वाले कोयले की आगे की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, अभी इसे निश्चित रूप से डिस्पैच बंद होने की स्थिति कहना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति केंद्र और राज्य के बीच जारी राजस्व संबंधी गतिरोध के समाधान पर निर्भर करेगी।
BCCL के साथ CCL और ECL पर भी नजर
यह मामला केवल BCCL तक सीमित नहीं है। झारखंड में बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन करने वाली Central Coalfields Limited (CCL) और Eastern Coalfields Limited (ECL) भी रॉयल्टी और चालान व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं। यदि मौजूदा विवाद लंबा खिंचता है, तो इन कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला पर भी दबाव बढ़ सकता है। कोयला डिस्पैच में किसी भी तरह की रुकावट का असर रेलवे रैक, परिवहन व्यवस्था और कोयला उपभोक्ताओं तक आपूर्ति पर पड़ने की संभावना रहती है।
कोयला मंत्रालय से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक झारखंड से कोल इंडिया ने 2,541.14 करोड़ रुपये रॉयल्टी के रूप में जमा किए थे। इसी अवधि में DMF के तहत 763.75 करोड़ रुपये और NMET मद में 62.34 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया था।
झारखंड से करोड़ों रुपये की रॉयल्टी जमा करती हैं कोल इंडिया की कंपनियां
कोयला निर्देशिका 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डालें तो झारखंड में परिचालन से जुड़ी कंपनियों का रॉयल्टी भुगतान काफी बड़ा है।
- BCCL: 1,547.70 करोड़ रुपये
- CCL: 2,157.92 करोड़ रुपये
- ECL:38 करोड़ रुपये
ऐसे में रॉयल्टी भुगतान और चालान जारी करने की व्यवस्था में लंबे समय तक रुकावट रहने पर इसका असर केवल कंपनियों के परिचालन तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य के खनिज राजस्व और कोयले पर निर्भर उद्योगों की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है।
MMDR संशोधन को लेकर क्या है विवाद?
MMDR संशोधन को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा खनिज राजस्व, रॉयल्टी और खनिज-bearing जमीन पर कर या उपकर लगाने के अधिकार से जुड़ा है। साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि रॉयल्टी को टैक्स नहीं माना जा सकता और राज्यों के पास खनिज अधिकारों से जुड़े मामलों में कर लगाने की शक्ति है। इसी फैसले की पृष्ठभूमि में राज्यों और केंद्र के बीच खनिज राजस्व व्यवस्था को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
झारखंड में इसी विवाद का असर अब रॉयल्टी चालान व्यवस्था पर पड़ने की बात सामने आ रही है।
दूसरे राज्यों में भी बढ़ सकती है चुनौती
कोल इंडिया की केवल झारखंड में काम करने वाली कंपनियां ही इस मुद्दे से प्रभावित नहीं हो सकतीं। कंपनी की अन्य अनुषंगी कंपनियां जैसे SECL, MCL, NCL और WCL भी अलग-अलग राज्यों की खनिज राजस्व नीतियों के दायरे में आती हैं।
हालांकि, फिलहाल इन कंपनियों के कोयला डिस्पैच पर असर पड़ने का कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन यदि अलग-अलग राज्यों में खनिज राजस्व को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इसी तरह के मतभेद बढ़ते हैं, तो आने वाले समय में कोयला कंपनियों के संचालन पर दबाव बढ़ सकता है।
बिजली और उद्योगों की सप्लाई पर भी पड़ सकता है असर
झारखंड में कोयला डिस्पैच प्रभावित होने की स्थिति का असर खदानों तक सीमित नहीं रहेगा। BCCL, CCL और ECL से निकलने वाला कोयला बिजली संयंत्रों, स्टील प्लांट, सीमेंट उद्योग और दूसरी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचता है।
डिस्पैच में लगातार देरी होने पर कोयला स्टॉक, रेलवे रैक की उपलब्धता और परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक सप्लाई प्रभावित रहने की स्थिति में कोयला आधारित उद्योगों के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका होगी।
1 सितंबर पर टिकी निगाहें
फिलहाल केंद्र और झारखंड के बीच खनिज राजस्व और रॉयल्टी चालान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। BCCL की अग्रिम रॉयल्टी राशि 30 अगस्त के आसपास समाप्त होने की संभावना के चलते 1 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है।
यदि उससे पहले चालान जारी करने की प्रक्रिया को लेकर समाधान नहीं निकलता है, तो झारखंड में कोयला डिस्पैच को लेकर संकट गहरा सकता है। हालांकि, अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र और राज्य के बीच रॉयल्टी तथा खनिज राजस्व व्यवस्था को लेकर गतिरोध कितनी जल्दी दूर होता है।
ये भी पढ़ें: Vastu Rules: जूते-चप्पल रखने की ये गलती पड़ सकती है भारी! जानें वास्तु के नियम
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








