NEET Protest : मोदी सरकार के खिलाफ CJP का आंदोलन जारी… लेकिन विपक्ष के लिए यह एक मौका… जानिए कैसे?
कांग्रेस, सपा, टीएमसी, शिवसेना, एनसीपी, आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आए है औऱ केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे है।
NEET Protest :20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो प्रदर्शन और इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई ने देश में शिक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाब देही के मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है। संसद की बात करे या सड़क की, हर जगह केवल औऱ केवल प्रदर्शन ही दिख रहा है। कांग्रेस, सपा, टीएमसी, शिवसेना, एनसीपी, आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आए है औऱ केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे है।
सारे विपक्षी दल उठाना चाहते है इसका लाभ
हाल की बात करे तो प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पोस्ट कर बताया है कि पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के तरह दोषियों को सजा सुनाया जाएगा। तो दूसरी तरफ विपक्ष द्वारा पीएम आवास के बाहर दिए गए धरने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद पीएम मोदी से छात्रों से माफी मांगने की बात कही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कॉकरोज जनता पार्टी के इस प्रदर्शन के जरिए पूरे विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ एक नया राजनीतिक मंच मिल गया है या फिर यह एक विपक्षी पार्टियों का एकजुट होना है। सवाल यह भी है कि इस गोलबंद का राजनीतिक लाभ किस दल को मिलने वाला है ? तो इसका जवाब है सभी को…
13 वें साल मिला विपक्ष को जनता का समर्थन
देखा जाए तो साल 2011 में भाजपा तब के कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मोर्चा खोले हुई थी, लेकिन आम जनता ने तब के विपक्षी दल भाजपा के बजाय अन्ना हजारे के नेतृत्व वाली इंडिया अगेंस्ट करप्षन मूवमेंट पर भरोसा जताया था। इसके बाद 2014 का जब परिणाम सामने आया तब कांग्रेस के हाथ से सत्ता चली गई औऱ नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की सरकार बनी थी। ऐसे में देखा जाए तो आज यही स्थिति विपक्ष के सामने है। विपक्ष जो लंबे समय से अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र को घेरती नजर आ रही थी। लेकिन उसे जनता का वो समर्थन नहीं मिल पा रहा था। मगर जब शिक्षा के मुद्दे को अभीजीत दीपके ने उठाया, तो लोगों ने खास कर युवाओं ने भरपूर समर्थन दिया और आज कॉकरोज जनता पार्टी जमीन पर उतर गई है। देखा जाए तो सीजपी ने सरकार के खिलाफ आम लोगों के मन में गुस्से की आवाज भर दी है। लेकिन 20 जुलाई के बाद से जिस प्रकार राजनीतिक दलों की एंट्री इस मुद्दे पर हुई है, उससे यह साफ है कि इस आंदोलन को विपक्षी दलों के लिए एक नया मौका बना दिया है।
इस विरोध को बरकरा रख पाना विपक्ष के हाथ
देखा जाए तो सभी क्षेत्रीय पार्टियां नीट मामले में केंद्र का विरोध तो कर रही है, लेकिन इस मुद्दें को विपक्षी पार्टियों के द्वारा कितनी दूर तक ले जाया जाता है, यह देखने वाली बात होगी… क्योंकि विरोध के मुख्य में जो भाजपा है उनके पास भी इसे कुचलने और तमाम विरोधों का सामना करने का रणनीति है।
देखा जाए तो 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद भाजपा पर दबाव तो बना हुआ है, लेकिन इस दवाब को विपक्षी पार्टियों के द्वारा बरकरार रख पाना विपक्ष के हाथ में है। विपक्ष जिस प्रकार संसद में नीट पेपर लीक मामले को लेकर चर्चा चाहती है। यह तो ठिक है लेकिन तमाम विपक्षी पार्टियां इसके आड़ में अपना राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।
आप पार्टी सीजेपी के समर्थन में लेकिन कांग्रेस से अलग क्यों
ऐसा हम सबसे पहले बात करते है आम आदमी पार्टी की क्योंकि दिल्ली में यह प्रदर्शन हो रहा है और दिल्ली में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी आम आदमी पार्टी है, जो फिलहाल सीजेपी के समर्थन में तो है। लेकिन कांग्रेस के साथ नहीं दिख रही है। इस विरोध के पीछे पंजाब का आगामी विधानसभा का चुनाव है। जहां उसके सामने कांग्रेस की ही चुनौती है। इस लिए आम आदमी पार्टी सीजेपी के समर्थन वाले मुद्दे पर भी कांग्रेस के साथ खड़ी नहीं दिखना चाहेगी।
लेकिन 20 जुलाई की घटना के बाद से विपक्ष ने एक सुर में इसका विरोध किया है। सपा, एनसीपी, शिवसेना, आम आदमी पार्टी और ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी के प्रमुख नेताओं ने जंतर-मंतर पर जाकर घायल प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता दिखा रहे है।
सपा के सामने आगामी यूपी का चुनाव
दूसरी तरफ सपा उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी आवा बुलंद कर रही है। वह लगातार संसद हो या संसद के बाहर अखिलेश यादव राहुल गांधी के साथ मिल कर सरकार के विरोध में नारे लगा रहे है। ताकी जब राज्य में चुनाव हो तो वे जनता से इस मुद्दें को रख सके औऱ जीत का ताज पहन सके।
ओडिशा के पूर्व सीएम ने भी मांगा इस्तीफा
उधर जनता दल के अध्यक्ष औऱ ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। देखा जाए तो नवीन पटनायक आमतौर पर किसी भी विवादित राजनीतिक मुद्दों पर अपना रूख नहीं रखते है और किसी पक्ष में खुलकर न आने के लिए जाने जाते है।
टीएमसी औऱ शिवसेना के सामने उम्मिद की नई किरण
ऐसे में यह समझना बेहद ही जरूरी है कि शिक्षा का मुद्दा हर राज्य से जुड़ा हुआ है। टीएमसी हो या शिवसेना दोनों दल फिलहाल अपने विभाजना का सामना कर रही है। ऐसे में यह मुद्दा अपना मतदाता आधार मजबूत करने का एक मजबूत मौका है। देखा जाए तो सभी को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की वह भीड़ दिख रही है, जो सालों बाद दिल्ली में देखने को मिली है। सपा का सीजेपी के समर्थन में उतरना भी उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए एक अहम मकसद है। इस लिए सपा भी सीजेपी और राहुल गांधी के साथ मौजूद है।
कांग्रेस नहीं दोहराना चाहती इतिहास
अब अगर कांग्रेस के प्रदर्शन पर नजर डाले तो अन्ना आंदोलन के समय के आंदोलनकारियों ने आम आदमी पार्टी बना ली थी। इसलिए कांग्रेस पार्टी अपनी अलग प्रदर्शन जारी रखे हुए है। वह इसी मुद्दे पर हो रहे सीजेपी आंदोलन के साथ नहीं बनना चाहती, बल्कि कांग्रेस खुद इस मुद्दे को आगे ले जाना चाहती है। देखा जाए तो कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद हुई घटना का परिणाम था। 20 जुलाई की घटना के बाद कांग्रेस ने अपने सेवा दल को जंतर मंतर में भेज और उसके अगले दिन राहुल गांधी खुद अस्पताल जाकर छात्रों के परिजनों से मुलाकात किए और फिर मंगलवार की शाम कांग्रेस नेतृत्व ने अचानक पीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया। प्रदर्शन के बाद से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सरकार पर दबाव बना रहे है। विपक्षी दलो का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा दे देना चाहिए…