सोचिए… आप शाम के वक्त सफर पर हैं, गाड़ियां फर्राटा भर रही हैं और तभी अचानक सामने आ जाएं 18 विशाल जंगली हाथी! न हॉर्न काम आए, न ब्रेक… बस थम जाए पूरी सड़क।
बुधवार की देर शाम रांची–रामगढ़ के व्यस्त NH-33 पर कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब हाथियों के झुंड ने न सिर्फ हाईवे को जाम कर दिया, बल्कि सड़क से लेकर रेलवे ट्रैक तक पूरे इलाके का यातायात अस्त-व्यस्त हो गया। हालात इतने गंभीर हो गए कि यात्रियों को गाड़ियों में दुबकना पड़ा और ट्रेनें तक रद्द करनी पड़ीं। आखिर क्या है पूरा मामला और कितनी बड़ी थी यह चुनौती? पढ़िए पूरी खबर…
हाथियों की वजह से हाईवे पर थमा यातायात
जानकारी के अनुसार, हाथियों का झुंड चुटूपालू घाटी के पास सड़क के किनारे आ गया था। जैसे ही यह खबर फैली, रांची और रामगढ़ दोनों दिशाओं से आने-जाने वाले वाहनों को रोक दिया गया। रामगढ़ की ओर से आने वाले वाहनों को मायाटुंगरी पहाड़ के पास, जबकि रांची की ओर से आने वालों को खराबेड़ा क्षेत्र में ही रोक दिया गया। इससे NH-33 के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
यात्री अपने-अपने वाहनों में दुबके रहे और किसी अनहोनी की आशंका से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
वन विभाग और प्रशासन मौके पर तैनात
हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस और वनकर्मियों ने लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी।
हाथियों को सड़क पर आने से रोकने के लिए मशाल जलाई गई, बड़े टॉर्च से रोशनी डाली गई और सायरन बजाए गए। इसके बावजूद झुंड करीब आधे घंटे तक एनएच के किनारे खड़ा रहा। इस दौरान हाथियों के अचानक आक्रामक होने पर वनकर्मियों को कई बार पीछे हटना पड़ा।
सायरन से खदेड़े गए हाथी, टली बड़ी दुर्घटना
बाद में वन विभाग के दो विशेष वाहन बुलाए गए, जिनके तेज सायरन की मदद से हाथियों को धीरे-धीरे जंगल की ओर खदेड़ा गया। करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद झुंड सड़क से हटकर घने जंगल की ओर चला गया। इसके बाद एक-एक कर वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई और यातायात सामान्य हो सका।
Read More: सर्द रातों में गरीबों का आशियाना-6 डिग्री पारे के बीच बेघरों का सहारा
इस दौरान कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए, जिससे हाथियों के उग्र होने का खतरा बना रहा। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि ऐसे हालात में संयम बरतें और नियमों का पालन करें।
एक हफ्ते में 6 मौतें, बढ़ाई गई निगरानी
वन विभाग के अनुसार, बीते एक सप्ताह में हाथियों के हमले से छह लोगों की मौत हो चुकी है। हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए एनएच के आसपास पांच टीमों को लगातार गश्त पर लगाया गया है, ताकि किसी बड़ी घटना को रोका जा सके।
रेल यातायात भी प्रभावित, कई ट्रेनें रद्द
सड़क के साथ-साथ हाथियों का असर रेल यातायात पर भी देखने को मिल रहा है। चक्रधरपुर रेल डिवीजन में मनोहरपुर से झारसुगड़ा सेक्शन के बीच हाथियों की आवाजाही के कारण ट्रेनों का परिचालन बार-बार बाधित हो रहा है।
चक्रधरपुर रेल मंडल से जारी सर्कुलर के मुताबिक, 25 से 28 दिसंबर के बीच 18 लोकल ट्रेनों को चार दिनों के लिए रद्द किया गया है। इसमें टाटानगर-राउरकेला मेमू, चक्रधरपुर-राउरकेला मेमू, टाटा-बड़बिल मेमू, टाटा-गुवा मेमू और टाटा-खड़गपुर मेमू जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं।
लगातार ट्रेनें रद्द होने से छोटे स्टेशनों से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं रेलवे को भी टिकट बिक्री में नुकसान हो रहा है।
22 हाथियों की जान बचाने में थमीं 12 ट्रेनें
इसी बीच, हाथियों की सुरक्षा को लेकर चक्रधरपुर रेल मंडल की सराहनीय पहल भी सामने आई है। हाल ही में हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर बिसरा और बंडामुंडा के बीच 22 हाथियों का झुंड पटरी पार कर रहा था। खतरे को भांपते हुए रेलवे ने तत्काल निर्णय लेते हुए उस रूट की 12 लंबी दूरी की ट्रेनों को रोक दिया।
इस त्वरित कार्रवाई से किसी भी तरह की अनहोनी नहीं हुई और पूरा झुंड सुरक्षित निकल गया। इसके लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा चक्रधरपुर रेल मंडल को सम्मानित भी किया गया।
विकास और वन्यजीव संरक्षण की चुनौती
झारखंड में हाथियों की बढ़ती आवाजाही एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक ओर यातायात और जनजीवन प्रभावित हो रहा है, तो दूसरी ओर हाथियों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
वन विभाग और रेलवे ने आम लोगों से अपील की है कि हाथियों को देखकर नजदीक न जाएं, शोर न करें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।












