Raksha Bandhan: रक्षाबंधन यानी राखी का त्योहार भारत में भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने के भाव का प्रतीक माना जाता है। सावन की पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व में बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तिलक लगाती है और उसके सुख-समृद्धि की कामना करती है। बदले में भाई बहन की रक्षा और साथ निभाने का संकल्प लेता है। लेकिन सवाल यह है कि भारत में रक्षाबंधन की शुरुआत कब हुई और इसकी परंपरा कितनी पुरानी है?
रक्षाबंधन की शुरुआत कब हुई?
इतिहास में रक्षाबंधन की शुरुआत की कोई एक निश्चित तारीख या वर्ष नहीं मिलता। इसकी वजह यह है कि आज जिस रूप में भाई-बहन राखी मनाते हैं, वह परंपरा एक लंबी सांस्कृतिक प्रक्रिया के दौरान विकसित हुई है।
प्राचीन भारतीय धार्मिक परंपराओं में रक्षासूत्र या सुरक्षा के लिए धागा बांधने की रस्म का उल्लेख मिलता है। वैदिक साहित्य में ऐसे सुरक्षात्मक धागों और अनुष्ठानों की परंपरा दिखाई देती है। हालांकि, इसे सीधे आज के भाई-बहन वाले रक्षाबंधन के समान मानना इतिहास की दृष्टि से सही नहीं होगा।
समय के साथ श्रावण पूर्णिमा से जुड़े रक्षासूत्र के धार्मिक अनुष्ठान और भाई-बहन के बीच राखी बांधने की लोकपरंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हुई। पुराने समय में इस दिन पुरोहितों द्वारा यजमानों को भी रक्षासूत्र बांधने की परंपरा रही है।
इंद्र-इंद्राणी की कथा भी जुड़ी है
रक्षाबंधन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में इंद्र और इंद्राणी की कथा का भी उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण से जुड़ी परंपरा के अनुसार, देवासुर संग्राम के दौरान इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था। इसे संकट से रक्षा और विजय की कामना से जोड़ा जाता है। यह धार्मिक कथा है, इतिहास में प्रमाणित घटना नहीं। इसी तरह कृष्ण-द्रौपदी और रानी कर्णावती-हुमायूं की कहानियां भी राखी के साथ लोकप्रिय रूप से जोड़ी जाती हैं। लेकिन इन कथाओं को लेकर ऐतिहासिक प्रमाणों की स्थिति अलग-अलग है।
खास तौर पर रानी कर्णावती द्वारा हुमायूं को राखी भेजने की कहानी बेहद लोकप्रिय है, लेकिन समकालीन स्रोतों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। इतिहासकारों ने इसलिए इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना मानने में सावधानी बरती है।
1905 में राखी बनी एकता का प्रतीक
रक्षाबंधन के इतिहास में 1905 का साल भी महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन किया था और यह फैसला 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ। उसी समय रवींद्रनाथ टैगोर समेत राष्ट्रवादी नेताओं ने राखी को हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर भाईचारे और एकजुटता का संदेश दिया। यानी राखी का अर्थ केवल परिवार तक सीमित नहीं रहा। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में यह सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक भी बनी।
आज क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन?
आज रक्षाबंधन मुख्य रूप से भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का पर्व है। हालांकि आधुनिक परिवारों में इसके मायने और भी व्यापक हुए हैं। कई जगह बहनें भाई के साथ-साथ परिवार के दूसरे करीबी रिश्तों में भी राखी बांधती हैं।
इस पर्व की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें महंगे उपहार से ज्यादा महत्व रिश्ते, भरोसे और साथ निभाने के भाव का है। शहरों से लेकर गांवों तक सावन की पूर्णिमा पर घरों में मिठाई बनती है, पूजा की थाली सजती है और दूर रहने वाले भाई-बहन भी मिलने या राखी भेजने की कोशिश करते हैं।

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