रांची: राजधानी रांची में बाइक सवार चेन स्नैचरों की सक्रियता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। डोरंडा थाना क्षेत्र में AG ऑफिस के गेट के पास पूर्व अधिकारी शांतनु राय के गले से करीब 80 ग्राम वजन की दो सोने की चेन झपटकर बदमाश फरार हो गए। घटना 12 अक्टूबर की शाम करीब सात बजे की है। पीड़ित अपने स्टाफ के साथ पैदल घर लौट रहे थे। पीछे से बाइक पर आए हेलमेट पहने दो बदमाशों ने झपट्टा मारा और AG मोड़ की तरफ भाग निकले। झपट्टा इतना जोरदार था कि शांतनु राय सड़क पर गिर पड़े।
मामले में डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल और संभावित भागने के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज पुलिस के लिए अहम हो सकती है।
लेकिन यह घटना अपने आप में अलग मामला नहीं दिखती। पिछले करीब एक महीने की सार्वजनिक रूप से सामने आई घटनाओं को देखें तो रांची के अलग-अलग इलाकों में चेन स्नैचिंग का एक दोहराता हुआ पैटर्न दिखाई देता है। कई मामलों में बाइक पर सवार दो अपराधी, हेलमेट से चेहरा ढका होना, पैदल या स्कूटी से जा रहे लोगों को निशाना बनाना और कुछ ही सेकंड में फरार हो जाना सामने आया है।
एक महीने में अलग-अलग इलाकों में सामने आईं कई घटनाएं
सितंबर के मध्य से अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक रांची में चेन छिनतई की कई घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इनमें पंडरा, मोरहाबादी, बरियातू, कोकर और अब डोरंडा जैसे इलाके शामिल हैं।
11 सितंबर को पंडरा ओपी क्षेत्र के हेहल ग्रीन पार्क कॉलोनी में रंजना कुमारी नाम की महिला से बाइक सवार दो बदमाशों ने करीब 25 ग्राम की सोने की चेन छीन ली थी। महिला दो अन्य महिलाओं के साथ टहलते हुए घर लौट रही थीं। डाकघर के पास बाइक सवार बदमाशों ने वारदात की और भाग निकले। आसपास के लोगों ने पीछा भी किया, लेकिन आरोपी पकड़ में नहीं आए।
इसके बाद 23 सितंबर को मोरहाबादी इलाके में मंदिर से पूजा कर लौट रही महिला को निशाना बनाया गया। परिवार के साथ स्कूटी से लौटते समय बाइक सवार दो अपराधियों ने महिला के गले से सोने की चेन झपट ली। मामले में लालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।
4 अक्टूबर को बरियातू थाना क्षेत्र की हाउसिंग कॉलोनी में सुबह टहलने निकली महिला से सोने की चेन छीन ली गई। महिला ने बदमाशों का पीछा करने की कोशिश की तो आरोपियों में से एक ने पिस्टल दिखाया, जिसके बाद वह पीछे हट गईं।
और अब 12 अक्टूबर को एक ही दिन दो अलग-अलग इलाकों में चेन छिनतई के मामले सामने आए। कोकर के खोरहा टोली इलाके में एक महिला से बाइक सवार बदमाशों ने चेन छीनी, जबकि उसी दिन शाम डोरंडा में AG ऑफिस के पास पूर्व अधिकारी शांतनु राय से दो सोने की चेन झपटी गईं।
इस तरह उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सितंबर के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक रांची में चेन स्नैचिंग की कम से कम पांच स्पष्ट घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा अन्य ऐसे मामले भी हो सकते हैं जो सार्वजनिक रिपोर्टिंग में नहीं आए हैं।
पुलिस ने 24 सितंबर को बनाई थी खास रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि लगातार घटनाओं के बीच रांची पुलिस ने 24 सितंबर को चेन स्नैचिंग रोकने के लिए विशेष रणनीति तैयार करने की जानकारी दी थी।
एसएसपी की अध्यक्षता में हुई बैठक में चेन स्नैचिंग के पैटर्न, अपराधियों के संभावित रूट, एग्जिट प्वाइंट और संवेदनशील इलाकों की समीक्षा की गई थी। हॉटस्पॉट पर नियमित गश्ती के साथ सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती, संभावित रास्तों पर वाहन जांच और CCTV फुटेज के विश्लेषण की रणनीति बनाई गई थी।
पूर्व की घटनाओं के त्वरित उद्भेदन के लिए SIT के गठन की बात भी सामने आई थी। पुलिस ने ऐसे अपराधियों की प्रोफाइलिंग और सत्यापन का निर्देश दिया था जो पहले चेन स्नैचिंग या समान अपराधों में शामिल रहे हैं।
लेकिन इस रणनीति के बाद भी अक्टूबर में बरियातू, कोकर और डोरंडा से चेन स्नैचिंग की घटनाएं सामने आईं। इससे सवाल यह है कि क्या हॉटस्पॉट की पहचान और रणनीति जमीन पर उतनी प्रभावी हो पा रही है, जितनी कागज पर दिखाई देती है?
कोढ़ा गैंग पर कार्रवाई, फिर भी नहीं थमा सिलसिला
अक्टूबर की शुरुआत में रांची पुलिस ने कथित कोढ़ा गैंग के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की। पुलिस कार्रवाई में गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी हुई और पुलिस के अनुसार इस गिरोह को करीब 40 स्नैचिंग मामलों से जोड़ा गया है।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चेन स्नैचिंग की कई घटनाओं में एक जैसा तरीका सामने आता रहा है—बाइक पर दो व्यक्ति, पीछे बैठा व्यक्ति चेन झपटता है और बाइक सवार कुछ ही सेकंड में इलाके से निकल जाता है।
ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ एक आरोपी को पकड़ने की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क, बाइक, मोबाइल, चोरी के गहनों की खपत और अपराधियों के संभावित रूट तक पहुंचने की है।
अगर किसी गैंग के सदस्य पकड़े जाने के बाद भी उसी तरह की नई घटनाएं सामने आती हैं, तो पुलिस को यह देखना होगा कि क्या नए अपराधी सक्रिय हैं या पुराने नेटवर्क के दूसरे सदस्य अब भी शहर में काम कर रहे हैं।
हाईकोर्ट की टिप्पणी ने भी CCTV व्यवस्था पर सवाल उठाया
चेन स्नैचिंग की जांच में CCTV सबसे अहम तकनीकी सबूतों में से एक हो सकता है। लेकिन इसी मोर्चे पर रांची की व्यवस्था को लेकर हाल में हाईकोर्ट में भी सवाल उठे हैं।
12 अक्टूबर की सुनवाई में झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के सभी पुलिस थानों और प्रमुख मार्गों-चौराहों पर CCTV कैमरों को चालू रखने पर जोर दिया। अदालत के सामने सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार रांची जिले के 32 थानों में अभी CCTV कैमरे नहीं लगे हैं। इनमें शहर के आठ थाने/इकाइयां भी शामिल हैं। शहर के 17 थानों और ओपी में 123 CCTV कैमरे काम कर रहे होने की जानकारी दी गई।
अदालत ने गृह सचिव, रांची एसएसपी और DGP से CCTV लगाने की समय-सीमा को लेकर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण और सड़क हादसों में शामिल वाहनों की पहचान के लिए CCTV का चालू रहना जरूरी है।
डोरंडा CCTV को लेकर पहले भी उठ चुका है सवाल
CCTV की समस्या सिर्फ शहर की सड़कों तक सीमित नहीं है। सितंबर में एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि डोरंडा थाना का CCTV खराब था और संबंधित अवधि की फुटेज उपलब्ध नहीं थी।
इसके बाद अदालत ने रांची एसएसपी को जिले के सभी थानों में लगे CCTV कैमरों की स्थिति की जांच कराने और खराब कैमरों को तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश दिया था।
ऐसे में AG ऑफिस के पास हुई ताजा घटना में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि घटनास्थल से लेकर AG मोड़ तक अपराधियों की बाइक किस-किस कैमरे में कैद हुई है और क्या उस फुटेज से उनकी पहचान या भागने का रास्ता पता लगाया जा सकता है।
पैटर्न एक जैसा, जगहें अलग
पिछले करीब एक महीने की घटनाओं को एक साथ रखने पर कुछ समानताएं साफ दिखाई देती हैं।
- बाइक पर दो अपराधियों का इस्तेमाल
- पीछे बैठा अपराधी चेन झपटता है
- कई मामलों में हेलमेट से चेहरा ढका होना
- सुबह या शाम के समय लोगों को निशाना बनाना
- पैदल चल रही महिलाओं या बुजुर्ग/अकेले लोगों को टारगेट करना
- वारदात के बाद मुख्य सड़क या दूसरे रास्ते से तेजी से फरार होना
यही वजह है कि पुलिस के लिए केवल घटना के बाद जांच करना पर्याप्त नहीं होगा। अपराधियों के संभावित रूट, पुराने मामलों के आरोपियों, जेल से बाहर आए अपराधियों, चोरी के गहनों की बिक्री और CCTV नेटवर्क को एक साथ जोड़कर जांच करने की जरूरत है।
AG ऑफिस के पास की घटना क्यों महत्वपूर्ण?
डोरंडा की ताजा घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वारदात AG ऑफिस जैसे प्रमुख सरकारी कार्यालय के गेट के पास हुई। शाम के समय बाइक सवार दो अपराधियों का वहां पहुंचना और करीब 80 ग्राम सोने की दो चेन झपटकर निकल जाना यह बताता है कि अपराधी भीड़भाड़ या महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास वारदात करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना के पीछे वही गैंग है जिसके सदस्यों को अक्टूबर की शुरुआत में पकड़ा गया था। पुलिस की जांच और CCTV फुटेज से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपी कौन हैं और उनका किसी पुराने गिरोह से संबंध है या नहीं।
अब पुलिस के सामने पांच बड़े सवाल
पहला— AG ऑफिस से लेकर AG मोड़ तक कितने CCTV कैमरे काम कर रहे थे?
दूसरा— क्या उन कैमरों से बाइक का नंबर या अपराधियों का हुलिया स्पष्ट हो सकता है?
तीसरा— क्या डोरंडा, कोकर और बरियातू की घटनाओं में इस्तेमाल हुआ तरीका एक ही नेटवर्क की ओर इशारा करता है?
चौथा— कोढ़ा गैंग पर कार्रवाई के बाद क्या उसके बाकी सदस्यों की तलाश और निगरानी जारी है?
पांचवां— 24 सितंबर को घोषित हॉटस्पॉट पेट्रोलिंग और सादे कपड़ों में पुलिस की तैनाती का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क तोड़ना जरूरी
रांची में चेन स्नैचिंग के खिलाफ पुलिस ने गिरफ्तारी, गैंग पर कार्रवाई, हॉटस्पॉट चिन्हित करने और CCTV विश्लेषण जैसी कई पहल की हैं। लेकिन ताजा घटनाएं बताती हैं कि चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
एक तरफ पुलिस गैंग के सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, दूसरी तरफ शहर के अलग-अलग इलाकों में उसी तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में असली सफलता सिर्फ कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि चेन स्नैचिंग के पूरे नेटवर्क को तोड़ने और वारदातों की पुनरावृत्ति रोकने से मापी जाएगी।
फिलहाल डोरंडा की ताजा घटना में पुलिस CCTV फुटेज और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। AG ऑफिस के आसपास लगे कैमरों की फुटेज इस मामले में जांच की सबसे अहम कड़ी बन सकती है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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