Ranchi: राजधानी Ranchi में सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने एक बार फिर बड़ा आदेश जारी किया है। अब SWM Rules-2026 के तहत प्रत्येक घर, प्रतिष्ठान, सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों में चार अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बड़े अपार्टमेंट, होटल, अस्पताल, शिक्षण संस्थान और अन्य बल्क वेस्ट जेनरेटर (BWG) को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर पंजीकरण कराने का निर्देश भी दिया गया है।
नगर निगम का कहना है कि इस व्यवस्था से कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण होगा और वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण किया जा सकेगा। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को लेकर कोई बड़ा फरमान जारी किया हो।
पिछले पांच-छह वर्षों में रांचीवासियों ने दो डस्टबिन से लेकर RFID तकनीक, CCTV निगरानी, प्लास्टिक प्रतिबंध, झिरी बायोगैस प्लांट, विजिबल क्लीनलीनेस अभियान और अब चार डस्टबिन तक कई योजनाएं और आदेश देखे हैं।
इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में आज भी गंदगी, कूड़े के ढेर, जाम नालियां और अनियमित कचरा उठाव जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
यही वजह है कि नया आदेश सामने आते ही एक सवाल फिर खड़ा हो गया है—
क्या इस बार केवल आदेश बदला है, या फिर व्यवस्था भी बदलेगी?
हर साल नया आदेश… लेकिन क्या बदली जमीनी हकीकत?
Ranchi Nagar Nigam लगातार दावा करता रहा है कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर मशीनें और नई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
सफाई व्यवस्था पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आधुनिक मशीनें खरीदी गईं, ठोस कचरा प्रबंधन परियोजनाएं शुरू हुईं, निजी एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई और स्मार्ट निगरानी तंत्र विकसित किया गया।
इसके बावजूद शहर के कई वार्डों में आज भी सड़क किनारे कूड़े के ढेर, नालियों में जमा गंदगी, खाली प्लॉटों में फेंका गया कचरा और समय पर कचरा संग्रहण नहीं होने जैसी शिकायतें आम हैं।
स्वच्छ सर्वेक्षण ने भी खड़े किए सवाल
नगर निगम के दावों के उलट स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्टें लगातार चिंता बढ़ाती रही हैं।
हालिया सर्वेक्षण में रांची की रैंकिंग और नीचे चली गई। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रांची देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शहरों में शामिल रहा।
रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां सामने आईं—
- सभी घरों तक नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नहीं।
- सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था कमजोर।
- सार्वजनिक शौचालयों की सफाई संतोषजनक नहीं।
- कई क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा।
यानी करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे।
पिछले वर्षों में नगर निगम के बड़े आदेश और अभियान
1. दो डस्टबिन अनिवार्य करने का अभियान
सबसे पहले नगर निगम ने हर घर और दुकान में हरा और नीला डस्टबिन रखने का आदेश दिया।
लोगों से कहा गया कि गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखें। बाजारों में अभियान चलाकर कई दुकानों पर जुर्माना भी लगाया गया।
लेकिन सवाल वहीं रहा।
कई इलाकों में लोग कचरा अलग-अलग रखते थे, जबकि संग्रहण के दौरान दोनों कचरे को एक ही वाहन में डाल दिया जाता था।
2. RFID टैगिंग से कचरा उठाव की निगरानी
नगर निगम ने लगभग ढाई लाख घरों में RFID टैग लगाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की।
दावा किया गया कि प्रत्येक घर का यूनिक कोड होगा और कंट्रोल रूम से यह देखा जाएगा कि कचरा वाहन तय समय पर पहुंचा या नहीं।
लेकिन काफी समय बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
कई मोहल्लों में आज भी नियमित कचरा उठाव को लेकर शिकायतें सामने आती हैं।
3. CCTV और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों पर नजर रखने के लिए CCTV निगरानी शुरू की गई।
साथ ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग की बात कही गई।
कुछ स्थानों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन शहर के कई हिस्सों में खुले स्थानों पर कूड़े के ढेर आज भी दिखाई देते हैं।
4. जीरो टॉलरेंस अभियान
नगर निगम ने बाजार क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर कई दुकानों और प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाया।
दो डस्टबिन नहीं रखने, सड़क पर कचरा फेंकने और सफाई नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
लेकिन कुछ समय बाद अधिकांश इलाकों में स्थिति पहले जैसी ही नजर आने लगी।
5. सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान
प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ लगातार छापेमारी की गई।
सैकड़ों किलो प्लास्टिक जब्त किया गया और लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला गया।
इसके बावजूद शहर के कई बाजारों में आज भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है।
6. झिरी बायोगैस प्लांट और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन
गीले कचरे से गैस और जैविक खाद बनाने के लिए झिरी में आधुनिक बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया।
योजना थी कि प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा।
बाद की समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को प्लांट तक पर्याप्त मात्रा में कचरा उपलब्ध कराने के निर्देश देने पड़े।
यानी प्लांट बनने के बाद भी पूरी क्षमता से संचालन एक चुनौती बना रहा।
7. विजिबल क्लीनलीनेस अभियान
स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर अंक पाने के लिए मुख्य सड़कें, बाजार, रेड स्पॉट, येलो स्पॉट और नालों की विशेष सफाई का अभियान शुरू किया गया।
कई जगह पेंटिंग और सौंदर्यीकरण भी हुआ।
लेकिन शहर के अंदरूनी मोहल्लों और कई नालों की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।
8. निर्माण स्थलों पर ग्रीन शीट अनिवार्य
धूल प्रदूषण कम करने के लिए निर्माणाधीन भवनों को ग्रीन शीट से ढकना अनिवार्य किया गया।
इसके उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
इसके बावजूद कई निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन होता नजर नहीं आता।
9. अब आया चार डस्टबिन का नया नियम
अब नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को और सख्त बनाते हुए चार डस्टबिन रखने का आदेश जारी किया है।
इसके तहत—
- नीला डस्टबिन – सूखा कचरा
- हरा डस्टबिन – गीला कचरा
- लाल डस्टबिन – सैनिटरी वेस्ट
- काला डस्टबिन – ई-वेस्ट
इसके अलावा बड़े संस्थानों को CPCB के SWM पोर्टल पर पंजीकरण कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
नियमों की कमी नहीं, क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती
रांची नगर निगम के पास आज लगभग हर तरह की व्यवस्था मौजूद है।
RFID है।
CCTV निगरानी है।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर है।
झिरी बायोगैस प्लांट है।
सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान है।
अब चार डस्टबिन का नया नियम भी आ गया।
फिर भी शहर के कई इलाकों में लोग नियमित कचरा उठाव, जाम नालियां, सड़क किनारे कूड़े के ढेर और बदहाल सफाई व्यवस्था की शिकायत करते हैं।
यह स्थिति साफ बताती है कि समस्या नियम बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की है।
क्या इस बार बदलेगी तस्वीर?
चार डस्टबिन का नया आदेश कागजों पर निश्चित रूप से ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। लेकिन पिछले वर्षों का अनुभव बताता है कि केवल आदेश जारी करने से शहर साफ नहीं होता।
जब तक हर वार्ड में नियमित कचरा उठाव, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, एजेंसियों की जवाबदेही, प्रभावी निगरानी और नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक नए आदेशों का असर सीमित ही रहेगा।
Ranchi के नागरिक अब नए आदेश से ज्यादा उसके परिणाम देखना चाहते हैं। क्योंकि शहर ने फरमान बहुत देखे हैं, अब उम्मीद अमल की है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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