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Ranchi में खुले नालों ने 7 साल में ली कई जिंदगियां, क्या नगर निगम अब भी किसी नए हादसे का इंतजार कर रहा है?

Ranchi में खुले नालों और जलजमाव से पिछले वर्षों में कई मौतें हुईं। जानिए हादसों का रिकॉर्ड, निगम की तैयारी और 2026 मानसून का खतरा।

जून 5, 2026
in झारखंड Jharkhand News, रांची Ranchi
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Open drains in Ranchi have claimed many lives in 7 years. Is the Municipal Corporation still waiting for a new accident?

Open drains in Ranchi have claimed many lives in 7 years. Is the Municipal Corporation still waiting for a new accident?

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भारी बारिश, खुले नाले और प्रशासनिक लापरवाही के बीच हर मानसून में बढ़ रहा खतरा

रांची: झारखंड की राजधानी Ranchi में हर साल मानसून के साथ एक पुराना डर लौट आता है—खुले नालों और जलजमाव का डर। बीते सात वर्षों में शहर के विभिन्न इलाकों में खुले नालों, उफनती जल निकासी संरचनाओं और बाढ़ जैसी स्थिति के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। इनमें मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग और युवा तक शामिल हैं।

Table of Contents

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  • भारी बारिश, खुले नाले और प्रशासनिक लापरवाही के बीच हर मानसून में बढ़ रहा खतरा
  • मासूमों की मौत ने उठाए गंभीर सवाल
  • बारिश के साथ क्यों बढ़ जाता है खतरा?
  • पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं
  • नगर निगम क्या कर रहा है?
  • क्या 2026 का मानसून फिर बन सकता है चुनौती?
  • जवाबदेही का सवाल
  • समाधान क्या है?

शहर के हिंदपीढ़ी, कोकर, पंडरा, सराईटांड़, गोंडा और सदर जैसे इलाकों में हुई घटनाएं बताती हैं कि जल निकासी व्यवस्था की खामियां केवल असुविधा का कारण नहीं, बल्कि जानलेवा संकट बन चुकी हैं।

मासूमों की मौत ने उठाए गंभीर सवाल

जुलाई 2019 में हिंदपीढ़ी की चार वर्षीय बच्ची फलक बारिश के दौरान खुले नाले में बह गई थी। उसका शव कई किलोमीटर दूर बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था और नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

जनवरी 2026 में सदर थाना क्षेत्र की मौलाना आजाद कॉलोनी में दो वर्षीय फरहान की नाले में गिरकर मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप था कि इलाके का नाला लंबे समय से खुला पड़ा था और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।

इन दोनों घटनाओं के बीच भी कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें लोग बारिश के पानी के तेज बहाव में बह गए या खुले नालों में गिरकर अपनी जान गंवा बैठे।

बारिश के साथ क्यों बढ़ जाता है खतरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि रांची की समस्या केवल खुले नालों तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में नालों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण कूड़ा-कचरा जमा हो जाता है। बारिश के दौरान पानी का बहाव रुक जाता है और सड़कें छोटी नदियों में तब्दील हो जाती हैं।

कई स्थानों पर नालों की ऊंचाई और सड़क निर्माण में समन्वय की कमी भी जलजमाव की बड़ी वजह बन रही है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में खुले नालों पर सुरक्षा जालियां या कंक्रीट कवर नहीं होने से दुर्घटनाओं का जोखिम और बढ़ जाता है।

पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं

  • 2019: हिंदपीढ़ी में चार वर्षीय फलक की नाले में बहने से मौत।
  • 2019: करबला चौक में सात वर्षीय बच्चे को स्थानीय लोगों ने नाले में बहने से बचाया।
  • 2020: कोकर के खोराटोली क्षेत्र में एक युवक मोटरसाइकिल समेत बह गया, जिसका शव नहीं मिल सका।
  • 2021: पंडरा के पंचशील नगर में 55 वर्षीय व्यक्ति बारिश के पानी में बह गया, अगले दिन शव कांके डैम क्षेत्र से मिला।
  • 2023: सराईटांड़ और गोंडा क्षेत्र में दो अलग-अलग घटनाओं में लोगों की मौत हुई।
  • 2026: मौलाना आजाद कॉलोनी में दो वर्षीय फरहान की नाले में गिरकर मौत।

आप इस पैराग्राफ में यह बिंदु जोड़ सकते हैं:

नगर निगम क्या कर रहा है?

Ranchi Nagar Nigam ने मानसून 2026 को देखते हुए नालों की सफाई, चौड़ीकरण और नए ड्रेनेज प्रोजेक्टों पर काम तेज करने का दावा किया है। निगम की ओर से वार्ड स्तर पर सफाई व्यवस्था की समीक्षा, जल निकासी मार्गों की पहचान और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी की बात कही गई है।

हर वर्ष मानसून से पहले शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई का अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन कई इलाकों में सफाई के दौरान हटाए गए नालों के ढक्कन और लोहे की जालियां समय पर दोबारा नहीं लगाई जाती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह खुले मैनहोल और बिना ढक्कन वाले नाले दिनों तक खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे राहगीरों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। बारिश के दौरान पानी भर जाने पर ये खुले नाले और मैनहोल दिखाई नहीं देते, जिसके कारण कई बार हादसे भी हो चुके हैं।

महापौर और निगम अधिकारियों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद खुले नालों को सुरक्षित बनाने और जलजमाव की समस्या कम करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, कई इलाकों में अब भी अधूरे निर्माण कार्य, टूटी जालियां, खुले नाले और बिना ढक्कन वाले मैनहोल लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मानसून से पहले केवल सफाई अभियान पर्याप्त है, या फिर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन भी उतना ही जरूरी है।

क्या 2026 का मानसून फिर बन सकता है चुनौती?

मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य से बेहतर बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में यदि समय रहते नालों की सफाई, कवरिंग और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो शहर के कई हिस्सों में जलजमाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मानसून से पहले की सफाई अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए स्थायी शहरी योजना, नालों की वैज्ञानिक डिजाइनिंग और नियमित निगरानी जरूरी है।

जवाबदेही का सवाल

हर बड़ी दुर्घटना के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी और मुआवजे की मांग उठती रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर खुले और असुरक्षित नालों के कारण होने वाली मौतों में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

नागरिक संगठनों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय जोखिम वाले इलाकों की पहले से पहचान कर सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए।

समाधान क्या है?

  • सभी प्रमुख नालों को चरणबद्ध तरीके से ढका जाए।
  • मानसून से पहले व्यापक सफाई अभियान चलाया जाए।
  • संवेदनशील इलाकों में चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड लगाए जाएं।
  • स्कूलों और मोहल्लों में जागरूकता अभियान चलाया जाए।
  • हादसों की जवाबदेही तय कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
  • जल निकासी व्यवस्था का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए।

Ranchi में खुले नालों से होने वाली दुर्घटनाएं कोई नई समस्या नहीं हैं, लेकिन हर मानसून के साथ यह संकट और गंभीर होता जा रहा है। पिछले वर्षों की घटनाएं चेतावनी देती हैं कि यदि बुनियादी ढांचे की खामियों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और भी परिवार इस त्रासदी का शिकार हो सकते हैं। शहर को सुरक्षित बनाने के लिए अब केवल वादों नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

 

 

V Kumar
V Kumar

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