रांची: राजधानी रांची के कांके स्थित नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित RIMS-2 अस्पताल परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। गुरुवार को नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन देने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष को बताया कि जिस भूमि पर सरकार RIMS-2 का निर्माण कराना चाहती है, वह आदिवासी परिवारों की पुश्तैनी जमीन है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले ही रिंग रोड परियोजना के लिए अपनी बड़ी मात्रा में जमीन दे चुके हैं। अब जो थोड़ी-बहुत खेती योग्य जमीन बची है, वही उनके परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है। ऐसे में यदि यह जमीन भी अधिग्रहित कर ली जाती है तो उनका जीवन और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
21 जून से जारी है अनिश्चितकालीन धरना
संघर्ष समिति ने बताया कि 21 जून से नगड़ी में अनिश्चितकालीन धरना जारी है। इस आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने बाबूलाल मरांडी से आग्रह किया कि वे भी इस आंदोलन के समर्थन में आगे आएं और आदिवासी परिवारों की जमीन बचाने की लड़ाई में साथ दें।
समिति के सदस्यों का कहना है कि उनका विरोध किसी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि कानून के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया अपनाई जाए और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो।
‘आदिवासियों को बेदखल करने की कोशिश सरकार पर भारी पड़ेगी’ : बाबूलाल मरांडी
प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीब आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार आदिवासी समाज के अधिकारों की अनदेखी करती रही तो इसका राजनीतिक परिणाम भी सामने आएगा। मरांडी ने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आदिवासियों के संवैधानिक और भूमि अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने के लिए आंदोलनकारियों के साथ खड़ी रहेगी।
ज्ञापन में लगाए गंभीर आरोप
प्रतिनिधिमंडल ने बाबूलाल मरांडी को एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कांके के नगड़ी क्षेत्र में RIMS-2 के निर्माण का कार्य बिना विधिवत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए शुरू कर दिया गया है।
संघर्ष समिति का दावा है कि यह कार्रवाई भूमि अधिग्रहण, उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन है। समिति ने मांग की कि जब तक अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती और प्रभावित परिवारों के अधिकार सुनिश्चित नहीं किए जाते, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
क्या है पूरा मामला?
रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, जिस जमीन पर इस परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है, उसे लेकर स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी परिवार लगातार विरोध जता रहे हैं।
आंदोलनकारी परिवारों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, पहचान और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। वहीं सरकार की ओर से परियोजना को राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया गया है। ऐसे में विकास और भूमि अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सरकार के सामने बनी हुई है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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