Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल RIMS रांची में इलाज के दौरान मरीजों के परिजनों और डॉक्टरों के बीच विवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में ट्रॉमा सेंटर में इलाज को लेकर नाराज मरीज के परिजनों पर एक डॉक्टर के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। घटना के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों के इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
RIMS में झारखंड के अलावा बिहार समेत आसपास के कई राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। गंभीर मरीजों के इलाज में ट्रॉमा सेंटर की भूमिका अहम है। ऐसे में यहां डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच बेहतर संवाद और विवाद की स्थिति को नियंत्रित करना अस्पताल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
इलाज को लेकर नाराजगी, फिर विवाद की स्थिति
बताया जा रहा है कि ट्रॉमा सेंटर में इलाज को लेकर मरीज के परिजन नाराज थे। इसी दौरान डॉक्टर और परिजनों के बीच विवाद बढ़ गया और डॉक्टर के साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया।
मरीज के परिजनों की ओर से इलाज में कथित लापरवाही या अपेक्षा के मुताबिक इलाज नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, किसी भी पक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
इस तरह की घटनाएं गंभीर मरीजों के इलाज वाले अस्पतालों में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच भरोसे की कमी तथा संवाद की समस्या को भी सामने लाती हैं।
RIMS प्रबंधन ने बनाई ट्रेनिंग की योजना
घटना के बाद RIMS प्रबंधन की ओर से डॉक्टरों और जूनियर डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग देने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना बताया जा रहा है।
ट्रेनिंग में विवाद की स्थिति में मरीज और उनके परिजनों से संवाद, तनावपूर्ण माहौल को नियंत्रित करने और स्थिति को बिगड़ने से रोकने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है।
अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि इलाज के दौरान कई बार परिजन तनाव और चिंता में होते हैं। ऐसे में डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के बीच प्रभावी संवाद विवाद को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है।
ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज की भूमिका पर भी नजर
पूरे मामले में ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान व्यवस्थाओं की निगरानी और किसी विवाद की स्थिति में समय पर हस्तक्षेप करना ट्रॉमा सेंटर प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है।
अब निगाह इस बात पर है कि प्रबंधन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस व्यवस्था लागू की जाती है।
डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ मरीजों की शिकायतों का समाधान भी जरूरी
RIMS जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। किसी भी स्थिति में डॉक्टर या अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट को सही नहीं ठहराया जा सकता। वहीं दूसरी ओर मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों को भी गंभीरता से सुनने और समय पर समाधान करने की व्यवस्था जरूरी है।
ट्रॉमा सेंटर जैसे संवेदनशील विभाग में इलाज को लेकर परिजनों की चिंता को दूर करने के लिए स्पष्ट सूचना व्यवस्था, जिम्मेदार अधिकारी से संवाद और शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था विवाद की संभावना को कम कर सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल
RIMS ट्रॉमा सेंटर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि मरीजों के परिजनों में इलाज को लेकर नाराजगी क्यों बढ़ रही है और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अस्पताल प्रबंधन क्या ठोस कदम उठाएगा?
डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने की पहल अगर प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो इससे तनावपूर्ण परिस्थितियों को संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अस्पताल में सुरक्षित माहौल बनाने के लिए डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी होगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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