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World News: नेपाल ने बीते 5 दिनों में इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव देखा। सोशल मीडिया बैन और करप्शन के खिलाफ शुरू हुए GenZ मूवमेंट ने देश की सत्ता पलट दी। संसद जली, कोर्ट्स ध्वस्त हुए और केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा।
अब पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उनके नेतृत्व में कोई भी राजनीतिक पार्टी सरकार का हिस्सा नहीं है। सरकार को GenZ एडवाइजरी ग्रुप बाहर से कंट्रोल करेगा।
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
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कैसे भड़का आंदोलन?
- 8 सितंबर: GenZ युवाओं ने काठमांडू में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध शुरू किया।
- 9 सितंबर: आंदोलन हिंसक हो गया, संसद, सुप्रीम कोर्ट, पार्टी दफ्तर और कई VIP घरों में आगजनी।
- 10-12 सितंबर: नेपाल आर्मी ने मोर्चा संभाला और GenZ नेताओं से 3 दौर की बातचीत की।
- 12 सितंबर: संसद भंग, नई अंतरिम सरकार का गठन, सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
GenZ नेताओं की मांगें क्या थीं?
- सरकार में कोई भी राजनीतिक पार्टी शामिल नहीं होगी।
- सुशीला कार्की ही अंतरिम PM होंगी, लेकिन सभी मंत्रालय उनके पास रहेंगे।
- एक GenZ एडवाइजरी ग्रुप बनाएगा जो कैबिनेट की तरह काम करेगा।
- प्रधानमंत्री सुशीला कार्की GenZ समूह की सलाह से फैसले लेंगी।
सुशीला कार्की क्यों बनीं सबकी पहली पसंद?
- बालेन शाह PM नहीं बनना चाहते थे, लेकिन उनकी पहली पसंद सुशीला कार्की थीं।
- सुशीला को GenZ आंदोलन में निष्पक्ष, ईमानदार और समझदार चेहरे के रूप में पेश किया गया।
- हालांकि, उनके भारत के प्रति सकारात्मक रुख पर कुछ GenZ गुटों को आपत्ति थी, लेकिन बाद में सहमति बन गई।
पर्दे के पीछे से बालेन शाह की भूमिका
- बालेन शाह अब GenZ और सुशीला सरकार के सलाहकार की भूमिका में रहेंगे।
- अगले 6 महीनों में वे चुनाव की तैयारी करेंगे और जनता के समर्थन से PM पद के लिए दावेदारी पेश करेंगे।
नेपाली सेना ने निभाई किंगमेकर की भूमिका
- आर्मी चीफ अशोक राज सिगडेल ने तख्तापलट के बाद शांति व्यवस्था संभाली।
- बालेन शाह ने खुद सेना से सरकार गठन में सहयोग मांगा था।
- सेना ने GenZ आंदोलनकारियों और सुशीला कार्की के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
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