Toxic Movie Review: रॉकिंग स्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। KGF के बाद यश को एक नए अंदाज में देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए फिल्म में एक्शन, खून-खराबा, दमदार लुक्स और भरपूर स्वैग मौजूद है। हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले नजर आती है। करीब 3 घंटे 14 मिनट लंबी यह फिल्म कई जगह अपनी रफ्तार खो देती है।
Toxic Movie Review: क्या है फिल्म की कहानी?
‘टॉक्सिक’ की कहानी गोवा की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। कहानी की शुरुआत 1947 से होती है, जब अंग्रेजी शासन के बाद गोवा में ड्रग्स, गैंगवार और अपराध की दुनिया अपना पैर पसार रही है। इसी माहौल में यश का किरदार राया एंट्री करता है। राया के साथ उसकी बहन गंगा (नयनतारा) भी कहानी का अहम हिस्सा है। दोनों अपने अतीत और माता-पिता से जुड़े बदले की कहानी को लेकर इस दुनिया में कदम रखते हैं। इसके बाद राया की मुलाकात रेबेका (तारा सुतारिया) से होती है, जिसके पिता का गोवा में काफी दबदबा है।
कहानी आगे बढ़ती है तो राया की जिंदगी में नादिया (कियारा आडवाणी) की एंट्री होती है। नादिया सर्कस में परफॉर्म करती है और यहीं से रिश्तों का उलझा हुआ सिलसिला शुरू होता है। एक तरफ रेबेका है तो दूसरी तरफ नादिया, जिसके बीच राया की जिंदगी प्यार और उलझनों में फंसती चली जाती है। इसी बीच एलिजाबेथ (हुमा कुरैशी) अपने भाई (अक्षय ओबेरॉय) के साथ यश की गैंग का हिस्सा बनती है। लेकिन कहानी में धोखे का खेल तब सामने आता है जब एलिजाबेथ अपने ही भाई की हत्या कर देती है।
राया और नादिया के रिश्ते से एक बेटे का जन्म होता है और इसके बाद कहानी एक बड़े मोड़ पर पहुंचती है। प्यार, धोखा, गैंगवार और बदले के बीच कहानी का केंद्र बाप-बेटे के रिश्ते की ओर बढ़ता है। इसके बाद कहानी किस दिशा में जाती है, यही फिल्म का मुख्य ड्रामा है।
कहानी और स्क्रीनप्ले में कितना दम?
अगर ‘टॉक्सिक’ को सिर्फ एक्शन और यश के स्टारडम के पैमाने पर देखा जाए तो फिल्म कई जगह प्रभावित करती है। लेकिन कहानी के स्तर पर फिल्म उतनी मजबूत नजर नहीं आती। फिल्म के शुरुआती 30 से 40 मिनट दर्शकों को यह समझने में लग सकते हैं कि आखिर कहानी किस दिशा में जा रही है। कई किरदारों की लगातार एंट्री होती है और उन्हें स्थापित करने में समय लगता है। इसका असर फिल्म की गति पर दिखाई देता है।
शुरुआत में कियारा आडवाणी के किरदार की भावनाओं को जगह दी गई है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, स्क्रीनप्ले बिखरता हुआ महसूस होता है। इंटरवल से पहले फिल्म कुछ हद तक अपनी पकड़ बनाती है, लेकिन सेकेंड हाफ में कहानी का फ्लो फिर कमजोर पड़ जाता है। इसके बावजूद यश का स्वैग फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। जब भी वह स्क्रीन पर आते हैं, माहौल पूरी तरह बदल जाता है। जबरदस्त एक्शन, गोलियों की तड़तड़ाहट, खून-खराबा और बोल्ड सीन्स फिल्म को एक खास मास अपील देते हैं।
Toxic में एक्शन और स्टाइल कैसा है?
‘टॉक्सिक’ का सबसे मजबूत पक्ष इसका एक्शन है। फिल्म में बड़े स्तर पर एक्शन सीक्वेंस तैयार किए गए हैं। कई दृश्यों में हिंसा और खून-खराबा काफी ज्यादा है, इसलिए यह फिल्म हर तरह के दर्शक के लिए नहीं है। यश के लुक्स और उनका स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को लगातार मजबूती देता है। एक्शन के दौरान उनका अंदाज और स्वैग साफ तौर पर दिखाई देता है।
फिल्म का BGM भी प्रभावशाली है। कई अहम डायलॉग्स के साथ बजने वाला बैकग्राउंड म्यूजिक दृश्यों को और ज्यादा इम्पैक्ट देता है।
Toxic का डायरेक्शन कैसा है?
फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। कहानी भी गीतू मोहनदास ने यश के साथ मिलकर लिखी है। निर्देशक ने फिल्म को बड़े स्केल पर पेश करने की कोशिश की है।
फिल्म के सेट्स बड़े हैं और VFX का इस्तेमाल भी अच्छा किया गया है। हालांकि, कई जगह ऐसा लगता है कि कहानी को मजबूत करने के बजाय फिल्म के स्टाइल, विजुअल्स और स्वैग पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।
एक्शन सीन्स फिल्म की खासियत हैं, जबकि स्क्रीनप्ले को और बेहतर तरीके से बांधा जा सकता था। इसके बावजूद फिल्म में कुछ ऐसे डायलॉग्स हैं जो दर्शकों को याद रह जाते हैं।
सिनेमैटोग्राफी और म्यूजिक
‘टॉक्सिक’ की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मजबूत पक्षों में शामिल है। राजीव रवि ने कैमरे के जरिए फिल्म की दुनिया और एक्शन को बड़े स्तर पर दिखाने में अच्छा काम किया है।
फिल्म में बार-बार सुनाई देने वाला BGM भी माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। खासकर एक्शन और दमदार डायलॉग्स के दौरान म्यूजिक स्क्रीन पर चल रहे दृश्यों का प्रभाव बढ़ाता है।
Toxic में कलाकारों की एक्टिंग कैसी है?
यश
‘टॉक्सिक’ को काफी हद तक यश की फिल्म कहा जा सकता है। फिल्म में यश डबल रोल में नजर आते हैं और दोनों किरदारों में उनका अलग अंदाज देखने को मिलता है।
उनके लुक्स, स्क्रीन प्रेजेंस और एक्शन फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में हैं। यश ने एक्शन सीन्स में पूरी ताकत झोंकी है और उनका स्वैग फिल्म को संभालने का काम करता है।
नयनतारा
नयनतारा ने गंगा के किरदार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। उनके अभिनय में भावनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन उनके किरदार को कहानी में और ज्यादा विस्तार दिया जा सकता था।
खास तौर पर यश और नयनतारा के भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत तरीके से दिखाने की गुंजाइश थी।
कियारा आडवाणी
कियारा आडवाणी नादिया के किरदार में भावनात्मक पक्ष लेकर आती हैं। उनकी और यश की केमिस्ट्री में संभावनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन कहानी अगर इस रिश्ते पर थोड़ा ज्यादा फोकस करती तो इसका प्रभाव और बेहतर हो सकता था।
तारा सुतारिया
तारा सुतारिया ने रेबेका के किरदार के साथ न्याय किया है। उनके किरदार को कहानी में एक महत्वपूर्ण जगह मिलती है और उन्होंने अपनी भूमिका को अच्छी तरह निभाया है।
हुमा कुरैशी
हुमा कुरैशी का एलिजाबेथ वाला किरदार प्रभावशाली है। हालांकि, कहानी में कुछ जगह यह सवाल जरूर उठता है कि उनके किरदार की जरूरत को और बेहतर तरीके से क्यों नहीं जोड़ा गया।
रुक्मणी वसंत और अक्षय ओबेरॉय
रुक्मणी वसंत ने अपनी भूमिका के हिसाब से अच्छा काम किया है। वहीं अक्षय ओबेरॉय का किरदार सीमित नजर आता है और उनकी मौजूदगी ज्यादा देर तक स्क्रीन पर नहीं रहती।
Toxic Movie Review: फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां
- यश का जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस
- दमदार एक्शन सीक्वेंस
- शानदार लुक्स और स्वैग
- बड़े स्तर पर तैयार किए गए सेट्स
- अच्छा VFX
- प्रभावशाली BGM
- शानदार सिनेमैटोग्राफी
- कुछ याद रह जाने वाले डायलॉग्स
Toxic Movie Review: कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?
- कहानी कई जगह उलझी हुई लगती है
- शुरुआती हिस्से में कहानी समझने में समय लगता है
- कई किरदारों की एंट्री कहानी को बिखेरती है
- सेकेंड हाफ में स्क्रीनप्ले का फ्लो कमजोर पड़ता है
- कुछ किरदारों को पर्याप्त स्पेस नहीं मिलता
- यश और नयनतारा के भाई-बहन के रिश्ते को और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था
Toxic Movie Review: देखें या नहीं?
अगर आप यश के फैन हैं और बड़े पर्दे पर भरपूर एक्शन, स्वैग और मास एंटरटेनमेंट देखना पसंद करते हैं, तो ‘टॉक्सिक’ आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। फिल्म में यश का अंदाज, एक्शन और विजुअल ट्रीटमेंट कई जगह प्रभावित करता है। लेकिन अगर आप फिल्म से मजबूत कहानी और कसावट भरा स्क्रीनप्ले चाहते हैं, तो यहां आपको निराशा हो सकती है। कहानी में कई मोड़ हैं, लेकिन उन्हें जोड़ने का तरीका हर जगह उतना प्रभावी नहीं है। फिल्म का क्लाइमैक्स कहानी की दिशा से अलग जाकर दर्शकों को चौंकाता है, हालांकि इसे किरदारों के साथ और मजबूती से जोड़ा जा सकता था।
यश का स्वैग और एक्शन देखने के लिए ‘टॉक्सिक’ देखी जा सकती है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले के मामले में फिल्म और बेहतर हो सकती थी।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









