बिरनी : बिरनी प्रखंड मुख्यालय से महज़ 30 किलोमीटर दूर बसे आदिवासी बहुलक क्षेत्र बेरहीटांड गांव में नल-जल योजना की पोल खुल गई है। लाखों की लागत से बनी पानी टंकी अब गांव के लिए शो-पीस बनकर रह गई है। गुड़ा सोरेन, रूपलाल टुडू, कुकरी मुनि मुर्मू, लालमुन्ना हेमरन, मंजू मरांडी, पूजा सोरेन, छोटकी बेसरा जैसी दर्जनों ग्रामीण महिलाएं व पुरुषों का कहना है कि “सरकार ने वादे किए थे कि हर घर जल पहुंचेगा, लेकिन यहां तो हमें गंदा पानी पीने पर मजबूर किया जा रहा है।”
टंकी है, पानी नहीं – जिम्मेदार मौन
ग्रामीणों का आरोप है कि पानी टंकी बनते ही ठेकेदार गायब हो गया। दो महीने से टंकी बेकार पड़ी है, लेकिन न कोई मिस्त्री आया, न ही कोई अधिकारी। इन हालातों में ग्रामीणों को दूर-दराज़ से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
गांव की महिलाएं कहती हैं कि उन्हें घंटों दूर से पानी लाना पड़ता है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि पीएचईडी (PHD) विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। जब विभाग से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा।
मुखिया प्रतिनिधि की दो टूक – “जल्दी सुधार नहीं हुआ तो सड़क जाम”
स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ईश्वर मंडल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर दो दिनों के अंदर विभाग ने संज्ञान नहीं लिया और पानी टंकी को दुरुस्त नहीं किया, तो तीसरे दिन मैं खुद कोवाड़ा कोडरमा मुख्य मार्ग को ग्रामीणों के साथ जाम करूंगा। जनता पानी के लिए तरसे और अधिकारी AC दफ्तर में बैठें – ये बर्दाश्त नहीं होगा।”
सरकार के दावों की खुली पोल
जहां एक ओर सरकार ‘हर घर जल’ योजना की ढिंढोरा पीट रही है, वहीं जमीन पर हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। बेरहीटांड जैसे गांव इस योजना की असफलता की सटीक तस्वीर बनकर उभरे हैं।












