नई दिल्ली: पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनकी सेहत लगातार कमजोर होने की खबरें सामने आ रही हैं। डॉक्टरों ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। इसी बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि उनकी जान को गंभीर खतरा होता है, तो अदालत या प्रशासन के निर्देश पर उन्हें Force Feeding (जबरन पोषण देना) कराया जा सकता है।
इस मुद्दे ने देश को एक बार फिर मणिपुर की ‘आयरन लेडी’ Irom Chanu Sharmila की याद दिला दी है, जिन्होंने दुनिया के सबसे लंबे भूख हड़ताल आंदोलनों में से एक का नेतृत्व किया था।
Force Feeding क्या होती है?
Force Feeding वह चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए उसकी इच्छा के विरुद्ध शरीर में पोषण पहुंचाया जाता है। आमतौर पर इसके लिए नाक के जरिए पेट तक एक पतली ट्यूब (Nasogastric Tube) डाली जाती है, जिसके माध्यम से तरल भोजन, विटामिन, ग्लूकोज और आवश्यक पोषक तत्व दिए जाते हैं।
यह प्रक्रिया आमतौर पर तब अपनाई जाती है, जब डॉक्टरों को लगता है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण व्यक्ति के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
कौन हैं Irom Chanu Sharmila?
इरोम शर्मिला मणिपुर की प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें उनकी अदम्य इच्छाशक्ति के कारण ‘आयरन लेडी ऑफ मणिपुर’ कहा जाता है। उनका नाम दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने अपना आंदोलन किसी निजी कारण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर शुरू किया था।
16 साल तक क्यों किया अनशन?
साल 2000 में मणिपुर के मालोम इलाके में एक बस स्टैंड के पास सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 10 नागरिकों की मौत हो गई थी। इस घटना ने इरोम शर्मिला को गहराई से प्रभावित किया।
इसके बाद उन्होंने 5 नवंबर 2000 को यह संकल्प लिया कि जब तक सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) को मणिपुर से नहीं हटाया जाएगा, तब तक वह भोजन और पानी ग्रहण नहीं करेंगी। उन्होंने अपने बालों में कंघी तक नहीं करने का फैसला किया।
उनका यह अनशन लगभग 5,793 दिनों (करीब 16 साल) तक चला और 9 अगस्त 2016 को उन्होंने इसे समाप्त किया।
बिना खाना खाए 16 साल तक कैसे रहीं जीवित?
जब Irom Chanu Sharmila ने अनशन शुरू किया था, उस समय भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 309 के तहत आत्महत्या का प्रयास अपराध माना जाता था। इसी कारण उन्हें बार-बार हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया जाता था।
उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने उनकी नाक के जरिए एक मेडिकल ट्यूब डाली, जिसके माध्यम से उन्हें तरल पोषण, सूप, जूस, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व दिए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया को Force Feeding कहा जाता है।
इरोम शर्मिला ने पूरे 16 वर्षों तक अपनी इच्छा से मुंह से भोजन का एक निवाला भी नहीं खाया। चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में दी गई यह फोर्स फीडिंग दुनिया के सबसे चर्चित मामलों में गिनी जाती है।
सोनम वांगचुक के मामले में क्यों हो रही है चर्चा?
सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि उनकी स्थिति गंभीर होती है, तो क्या उन्हें भी अदालत या प्रशासन के निर्देश पर Force Feeding कराई जा सकती है। इस संबंध में कानूनी और चिकित्सीय पहलुओं पर चर्चा जारी है। हालांकि, किसी भी निर्णय का आधार संबंधित अदालत के आदेश, चिकित्सकीय राय और लागू कानूनी प्रक्रिया होगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक भूख हड़ताल शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टरों का पहला उद्देश्य मरीज की जान बचाना होता है। वहीं, मानवाधिकार और व्यक्तिगत स्वायत्तता के अधिकार को लेकर भी ऐसे मामलों में अलग-अलग कानूनी और नैतिक बहस होती रही है।









