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क्या फिर ठप होगी ट्रेनें? 20 सितंबर से कुड़मी समाज का बड़ा आंदोलन, तीन बड़ी मांगें, रेलवे और पुलिस अलर्ट!

कुड़मी समाज ने 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में रेल टेका डहर छेका आंदोलन का ऐलान किया है। जानें कहां रुकेगी ट्रेनें, क्या हैं कुड़मी समाज की तीन बड़ी मांगें और रेलवे की क्या तैयारी है।

सितम्बर 19, 2025
in झारखंड Jharkhand News
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Will trains be halted again? A major protest by the Kudmi community begins on September 20th, with three major demands, and the railway and police are on high alert!

Will trains be halted again? A major protest by the Kudmi community begins on September 20th, with three major demands, and the railway and police are on high alert!

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Jharkhand: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल कुड़मी समाज एक बार फिर बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 सितंबर को एक दिवसीय धरना देने के बाद अब कुड़मी समाज ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अनिश्चितकालीन “रेल टेका-डहर छेका” आंदोलन की घोषणा की है। आंदोलन की शुरुआत 20 सितंबर की सुबह 5 बजे से होगी।

Table of Contents

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  • क्या है ‘रेल टेका-डहर छेका’?
  • किन जगहों पर रुकेगी ट्रेनें?
  • आदिवासी समाज का विरोध और जवाब
  • रेलवे और पुलिस की तैयारी
  • आंदोलन का इतिहास
  • राजनीति की खामोशी
  • बड़ा सवाल

कुड़मी समाज का कहना है कि उनकी तीन प्रमुख मांगों को पूरा करने तक आंदोलन जारी रहेगा। इनमें अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा, कुड़माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करना और सर्ना धर्म कोड लागू करना शामिल है। आंदोलन को समर्थन देने के लिए झारखंड में टोटेमिक कुड़मी एकता मंच ने भी ऐलान कर दिया है।

क्या है ‘रेल टेका-डहर छेका’?

स्थानीय भाषा में रेल रोकने को “रेल टेका” कहा जाता है, जबकि सड़क जाम करने को “डहर छेका” कहते हैं। इस तरह आंदोलन का सीधा मतलब है कि रेल और सड़क दोनों को ठप करना।

किन जगहों पर रुकेगी ट्रेनें?

इस आंदोलन के तहत झारखंड में सोनुआ, गम्हरिया, गालुडीह, मुरी, बरकाकाना, गद्दी, पारसनाथ और चंद्रपुरा में रेल रोको की तैयारी की जा रही है। वहीं पश्चिम बंगाल में चार जगह और ओडिशा में एक जगह रेल टेका होगा। आंदोलन स्थल पर ही कुड़मी समाज के लोग खाना बनाएंगे और डेरा डालेंगे। समाज का दावा है कि इस बार आंदोलन में “हर घर से लोग” शामिल होंगे।

आदिवासी समाज का विरोध और जवाब

हालांकि कुछ आदिवासी संगठनों ने इस मांग का विरोध किया है। इस पर कुड़मी नेताओं का कहना है कि विरोध करने वाले ज्यादातर मिशनरी से जुड़े लोग हैं और उन्हें इस मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। कुड़मी समाज का दावा है कि कोल्हान क्षेत्र में संथाल और हो समाज उनकी मांगों पर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।

रेलवे और पुलिस की तैयारी

कुड़मी समाज के इस आंदोलन को देखते हुए रेलवे और पुलिस ने कमर कस ली है। रांची रेल मंडल ने हर आपात स्थिति से निपटने का प्लान तैयार किया है। आरपीएफ और राज्य पुलिस ने संयुक्त रूप से सुरक्षा की रूपरेखा बनाई है। जहां-जहां रेल रोको आंदोलन की संभावना है, वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही आंदोलन वाले इलाकों में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। रेलवे अधिकारियों ने साफ किया है कि रेल रोकने की कोशिश करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

आंदोलन का इतिहास

कुड़मी समाज का यह आंदोलन कोई नया नहीं है। 2022 में 20 सितंबर से आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जो लगातार 9 दिन तक चला। इसके बाद 2023 में भी 20 सितंबर को ही आंदोलन शुरू हुआ और 7-8 दिन तक जारी रहा। हालांकि 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने के कारण आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। अब 2025 में कुड़मी समाज का आंदोलन दिल्ली तक पहुंच चुका है।

राजनीति की खामोशी

इस मामले पर राजनीतिक दलों का रुख दिलचस्प है। कोई भी पार्टी इस पर खुलकर न तो समर्थन कर रही है और न ही विरोध। कुड़मी नेताओं का आरोप है कि आजादी के बाद एक साजिश के तहत उन्हें आदिवासी की सूची से हटाकर OBC श्रेणी में डाल दिया गया, और यही सबसे बड़ी वजह है कि आंदोलन बार-बार उभर कर सामने आ रहा है।

बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 20 सितंबर से रेलवे की पटरियां और सड़कें फिर ठप होंगी या फिर रेलवे-पुलिस की तैयारी इस आंदोलन को कमजोर कर पाएगी? इसका जवाब आंदोलन शुरू होने के बाद ही मिलेगा।

 

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