रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के साझा मंच ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ 9 जुलाई को होने वाली राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल की विस्तृत योजना और मुख्य मांगों का ऐलान किया. रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल केवल एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि एक लंबे और निर्णायक संघर्ष की शुरुआत है.
केंद्र सरकार पर मजदूर-विरोधी और किसान-विरोधी होने का आरोप
नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को जबरन लागू करने में लगी है, जिससे स्थायी रोज़गार, ट्रेड यूनियन के अधिकार, हड़ताल का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा खत्म हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि यह नीतियाँ आम जनता, मज़दूरों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं.
17 सूत्री मांगों के साथ हड़ताल का ऐलान
संयुक्त मंच ने 17 प्रमुख मांगों को लेकर 9 जुलाई की हड़ताल का आह्वान किया है, जिनमें शामिल हैं:
- चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए
- सभी मज़दूरों के लिए ₹26000 न्यूनतम वेतन और ₹9000 पेंशन सुनिश्चित हो
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
- महंगाई पर रोक लगे और आवश्यक वस्तुओं पर GST हटाया जाए
- सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण बंद किया जाए
- यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाज़ी के अधिकारों की रक्षा हो
- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और पानी पर सार्वजनिक गारंटी दी जाए
- बिजली का निजीकरण रोका जाए, स्मार्ट मीटर हटाए जाएं
- किसानों को फसलों पर MSP की गारंटी दी जाए
- वन अधिकार कानून में जनविरोधी संशोधन रद्द हों
राज्य भर में जोरदार तैयारियाँ
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 18 जून तक पूरे राज्य में यूनियनों द्वारा हड़ताल की नोटिस दे दी गई है. रांची, धनबाद, हजारीबाग, देवघर समेत विभिन्न जिलों में सम्मेलन कर संयुक्त कार्यान्वयन समितियाँ बनाई जा चुकी हैं.
23 जून से 7 जुलाई तक नुक्कड़ सभाएं, जनसंपर्क अभियान, बाइक/साइकिल/जीप रैलियों के ज़रिए लोगों को जोड़ा जा रहा है. 30 जून को हूल दिवस पर श्रमिक संगठनों ने सिद्धू-कान्हू की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाकर विरोध जताया.
8 और 9 जुलाई को होंगे प्रदर्शन
8 जुलाई को मशाल जुलूस और 9 जुलाई को राज्य और जिला मुख्यालयों पर पुतला दहन, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क जाम जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
गैर-संगठित मज़दूरों को जोड़ने का अभियान तेज
संयुक्त मंच ने बताया कि हड़ताल में असंगठित और गैर-संगठित क्षेत्र के मज़दूरों को जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यह आंदोलन हर वर्ग की आवाज़ बने.
नेताओं ने क्या कहा
प्रेस वार्ता को एक्टू के शुभेंदु सेन, एटक के अशोक यादव और संतोष रजक, सीटू के अनिर्बान बोस, प्रतीक मिश्रा, एस.के. राय, बेफी के एम.एल. सिंह और किसान सभा के सुफल महतो, प्रफुल लिंडा और अजय सिंह ने संबोधित किया. सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन संविधान, अधिकार और रोटी की लड़ाई है — और इसे अब और टाला नहीं जा सकता.
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संयुक्त मंच ने साफ किया कि मज़दूर और किसान वर्ग अब पीछे नहीं हटेगा — यह संघर्ष आगे और तेज़ होगा.












