करवा चौथ सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है. यह पर्व भारतीय संस्कृति में वैवाहिक जीवन की स्थायित्व और पवित्रता को दर्शाता है. आज पूरे देश में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक आस्था के साथ मनाया जा रहा है.
व्रत की शुरुआत ‘सरगी’ से होती है
इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. व्रत की शुरुआत सास द्वारा दी गई “सरगी” से होती है, जिसमें मिठाई, फल, सूखे मेवे और श्रृंगार सामग्री शामिल होती है. इसे सूर्योदय से पहले ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है.
व्रत के नियम: संयम और शुद्धता का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाओं को जल्दी उठकर स्नान और पूजन की तैयारी करनी चाहिए. उन्हें अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए और किसी से विवाद, अपमान या क्रोध से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इनसे व्रत का फल कम हो जाता है.
क्या करें और क्या नहीं
करवा चौथ के दिन काले या भूरे रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि ये रंग अशुभ माने जाते हैं. लाल रंग को सबसे शुभ माना जाता है, जो प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है. साथ ही, महिलाओं को नुकीली चीजों जैसे सुई-धागा, सिलाई-कढ़ाई से भी दूर रहना चाहिए.
पूजा का समय और चांद निकलने का वक्त
इस वर्ष करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:16 से 6:29 बजे तक रहेगा, जब महिलाएं चांद देखकर व्रत खोलेंगी.
करवा चौथ की तैयारी और पूजा
करवा चौथ के दिन हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है. इसके साथ ही सुहाग के प्रतीक जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर और मांगटीका लगाकर पूरी तरह से श्रृंगार करें. इस खास अवसर पर लाल रंग के पारंपरिक वस्त्र पहनना चाहिए, जो प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक हैं. आप साड़ी, लहंगा या सूट पहन सकती हैं, जो आपको आरामदायक लगे. पूजा की थाली में मिट्टी या तांबे का करवा, दीपक, मठरी, अक्षत (चावल), फूल, रोली और अन्य पूजा सामग्री रखकर घर की सजावट भी खासतौर पर की जाती है.
व्रत पालन और व्रत खोलने की विधि
शाम को चंद्रमा के निकलने से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती, शिव और करवा माता की पूजा की जाती है, साथ ही करवा चौथ की कथा सुनी जाती है. चंद्रमा के दर्शन के बाद दीपक से भरी छलनी से पहले चंद्रमा को देखें और फिर उसी छलनी से अपने पति का मुखमंडल देखें. व्रत खोलने के लिए पति के हाथ से पानी और मठरी ग्रहण करें, उसके बाद मिठाई खाकर व्रत पूर्ण करें. अंत में पति के साथ रात्रि भोजन करें. व्रत के दौरान कुछ भी खाने-पीने से बचना चाहिए, और व्रत खोलने के बाद हल्का भोजन करना चाहिए. गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्रत रखें या फलाहारी व्रत करें.













