Ranchi : जसोवा दिवाली मेला का आज दूसरा दिन झारखंड की कला, संस्कृति, और परंपरा का जीवंत उदाहरण बना। यहां मंच पर अलग-अलग प्रस्तुतिया, व्यावसायिक स्टॉल्स और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले को यादगार बना दिया।
मुख्य आकर्षण का केन्द्र
दीप्तशिखा और एकस्थ बैंड ने (St Michael’s School for the Blind ) ने प्रेरणादायक संगीत प्रदर्शन दिया,जिसके संगीत और नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
ज्ञातव्य हो कि यह बैंड नेत्रहीन विद्यार्थियों द्वारा संचालित है।
प्रभात कुमार महतो और उनकी टीम ने मानव शैली की छऊ नृत्य प्रस्तुतियों से महिषासुर मर्दिनी की कथा जीवंत की। बता दें कि प्रभात महतो अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं, जिनकी प्रस्तुति को खूब सराहा जाता है।
वहीं लोक कलाकार लखन गुड़िया और उनकी टीम ने पारंपरिक मुंडारी लोकगीतों और वेशभूषा के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।
नाबार्ड के तहत 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए
राजकीय नेत्रहीन एवं मूक बधिर विद्यालय,हरमू के द्वारा बच्चों की बनाई पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसकी कीमत ₹50 से ₹500 तक हैं।
नाबार्ड के तहत 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए है, जिनमें होम डेकोर से लेकर अचार, पापड़ और दिवाली के दीये जो ₹10 से ₹500 तक की कीमतों पर मिल रहे हैं।इस पहल से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को मजबूती मिल रही है।
दिवाली मेला झारखंड की सांस्कृतिक विविधता के अलावा महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का भी एक महत्वपूर्ण मंच है, जिससे कला, व्यापार और समाजसेवा को एक साथ इस मेले में बढ़ावा मिल रहा है।













