झारखंड में होने जा रहे नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के अंतिम आंकड़े जारी कर दिए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक राज्य के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को मिलाकर कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष, 21 लाख 26 हजार 227 महिला और 144 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं।
राज्य के बड़े नगर निगमों में वोटरों की स्थिति
मतदाताओं के लिहाज से राजधानी रांची नगर निगम राज्य में सबसे बड़ा निकाय बनकर उभरा है। रांची के अलावा धनबाद, जमशेदपुर (आदित्यपुर), हजारीबाग और देवघर जैसे नगर निगमों में भी मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े नगर निगमों के नतीजे ही पूरे राज्य के चुनावी रुझान को तय करेंगे।
रांची नगर निगम: करीब 9 लाख वोटर, चुनाव का केंद्र बना शहर
राजधानी रांची नगर निगम में कुल 8,97,871 मतदाता हैं। यह संख्या कई जिलों की कुल आबादी के बराबर मानी जा रही है।
रांची नगर निगम क्षेत्र में—
- पुरुष मतदाता: लगभग 4.26 लाख
- महिला मतदाता: लगभग 4.62 लाख
- तृतीय लिंग मतदाता: सीमित संख्या
मतदाताओं की इस भारी संख्या के कारण रांची नगर निगम का चुनाव राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
वार्डवार वोटर गणित: कहां ज्यादा, कहां कम
रांची नगर निगम के 50 वार्डों में मतदाताओं का वितरण एक समान नहीं है।
- वार्ड 32 में सबसे ज्यादा 53,083 मतदाता दर्ज हैं
- वार्ड 21 में सबसे कम 28,830 मतदाता हैं
- 50 में से 21 वार्ड ऐसे हैं, जहां 21 हजार से ज्यादा वोटर हैं
इस असमान वितरण के कारण हर वार्ड में अलग-अलग चुनावी रणनीति अपनानी पड़ेगी।
वार्ड 32 क्यों बना सबसे अहम?
वार्ड 32 को इस चुनाव का पावर वार्ड माना जा रहा है। यहां जीत-हार का अंतर सिर्फ एक वार्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर आसपास के कई वार्डों की राजनीति पर भी पड़ेगा। माना जा रहा है कि राजनीतिक दल यहां—
- मजबूत उम्मीदवार उतारेंगे
- ज्यादा संसाधन और प्रचार झोंकेंगे
- स्थानीय मुद्दों के साथ बड़े शहर स्तर के वादों को भी आगे रखेंगे
कम वोटर वाले वार्डों में उलटफेर की संभावना
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वहीं वार्ड 21 जैसे कम मतदाता वाले इलाकों में चुनावी समीकरण अलग होंगे। यहां—
- थोड़े से वोटों से नतीजा पलट सकता है
- स्थानीय चेहरे और निर्दलीय उम्मीदवार असर दिखा सकते हैं
- घर-घर संपर्क सबसे कारगर हथियार होगा
महिला मतदाता बनेंगी निर्णायक
कई वार्डों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के बराबर या उससे अधिक है। ऐसे में—
- पानी, सड़क, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मुद्दे
- इस बार सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि वोटिंग ट्रेंड तय करेंगे
क्या होगा कुल असर?
रांची का चुनाव कुछ हाई-वोटर वार्डों के इर्द-गिर्द सिमट सकता है
बड़े वार्डों में हार-जीत पूरे नगर निगम की तस्वीर बदल सकती है
छोटे वार्डों में चौंकाने वाले नतीजे आने की संभावना
महिला वोटरों की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा सकती है
झारखंड नगर निकाय चुनाव में जीत उसी दल की होगी, जो सिर्फ राज्यस्तरीय लहर नहीं, बल्कि रांची जैसे बड़े नगर निगम और उसके वार्डवार वोटर गणित को सही ढंग से समझ पाएगा। यह चुनाव संख्या से ज्यादा रणनीति और माइक्रो मैनेजमेंट का है।












