Jharkhand PHD Admission 2026: अब आरक्षण रोस्टर से होगा नामांकन, बदल गए नियम
Jharkhand PHD Admission 2026: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में पीएचडी (PHD) दाखिले की प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलने जा रही है। यूजीसी रेगुलेशन-2022 के तहत राज्य के 10 विश्वविद्यालयों में इसी सत्र से नया सिस्टम और आरक्षण रोस्टर लागू किया जा रहा है।
सीधे एडमिशन पर रोक, अब सिस्टम से होगा चयन
अब तक झारखंड में यूजीसी जेआरएफ (JRF), नेट (NET) या प्रवेश परीक्षा पास छात्र सीधे गाइड से संपर्क कर एडमिशन ले लेते थे। इस ‘डायरेक्ट कांटेक्ट’ सिस्टम के कारण आरक्षण नीति का पालन सही से नहीं हो पाता था। लेकिन अब
- सीट मैट्रिक्स अनिवार्य: हर विभाग को खाली सीटों और उपलब्ध गाइड्स का पूरा ब्योरा देना होगा।
- मेरिट और रोस्टर: नामांकन केवल मेरिट और राज्य सरकार के आरक्षण नियमों के आधार पर ही होगा।
- पारदर्शिता: सिफारिश या व्यक्तिगत संपर्क के बजाय पूरी प्रक्रिया केंद्रीकृत और पारदर्शी होगी।
Jharkhand PHD आरक्षण गणित
नई नियमावली के अनुसार, झारखंड के विश्वविद्यालयों में सीटों का बंटवारा निम्नलिखित श्रेणियों के आधार पर होगा:
| श्रेणी | आरक्षण प्रतिशत |
| सामान्य वर्ग (UR) | 40% |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 26% |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 14% |
| अनुसूचित जाति (SC) | 10% |
| ईडब्ल्यूएस (EWS) | 10% |
शिक्षकों की कमी, शोध के सामने सबसे बड़ी चुनौती
झारखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र में संसाधनों और शिक्षकों की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है:
- 40% पद खाली: राज्य के विश्वविद्यालयों में करीब 2400 शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
- गाइड का संकट: नियमों के अनुसार, एक शिक्षक सीमित संख्या में ही छात्रों को रिसर्च करा सकता है। पदों के खाली होने से पीएचडी की सीटें भी कम हो जाती हैं।
- रांची यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव: शिक्षकों की कमी को देखते हुए रांची यूनिवर्सिटी ने ‘नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर’ को भी रिसर्च गाइड बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।
यूजीसी (UGC) के अनुसार गाइड का कोटा
यूजीसी के नए रेगुलेशन के तहत एक शिक्षक के तहत शोधार्थियों (Scholars) की अधिकतम संख्या तय कर दी गई है:
- प्रोफेसर: अधिकतम 8 शोधार्थी
- एसोसिएट प्रोफेसर: अधिकतम 6 शोधार्थी
- असिस्टेंट प्रोफेसर: अधिकतम 4 शोधार्थी
Jharkhand PHD Admission: विशेषज्ञ की राय
“पीएचडी में आरक्षण लागू करने से रिसर्च में सामाजिक विविधता आएगी। अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र आएंगे तो शोध का दायरा भी व्यापक होगा। हालांकि, इसकी सफलता के लिए पारदर्शी चयन और पर्याप्त लैब संसाधनों का होना अनिवार्य है।”
— डॉ. परवेज हसन, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, जेपीएससी।
झारखंड सरकार का यह कदम उच्च शिक्षा में समानता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रिक्त पदों को भरना और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना सरकार के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।












