NITI Aayog Meeting 2026 : नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद (Governing Council) की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के समग्र विकास की एक बेहद विस्तृत और महत्वाकांक्षी रूपरेखा प्रस्तुत की है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड को अब तक केवल खनिज निकालने वाले राज्य के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन इस पुरानी परंपरा को बदलने का वक्त आ गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि झारखंड को विकास की इस यात्रा में महज एक ‘खनिज स्रोत’ नहीं, बल्कि एक बराबर का ‘साझेदार’ बनाया जाए।
खनिज संपदा का वैल्यू एडिशन: सिर्फ माइनिंग नहीं, अब राज्य में ही लगेंगे उद्योग
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विकास की नई विचारधारा रखते हुए कहा कि झारखंड की अकूत खनिज संपदा तभी सार्थक होगी, जब उसे यहाँ की ‘मानव पूंजी’ (Human Capital) से जोड़ा जाएगा। उन्होंने वकालत की कि राज्य के संसाधनों का प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन झारखंड के भीतर ही होना चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से:
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क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) आधारित उद्योग विकसित करने,
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नॉलेज, रिसर्च और इनोवेशन के केंद्र स्थापित करने,
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टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन-एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे बड़े सेक्टर्स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष सहयोग और मार्गदर्शन की मांग की।
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कोयला कंपनियों पर ₹1.36 लाख करोड़ का बकाया, जल जीवन मिशन के पैसों पर भी घेरा
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग के मंच से केंद्र सरकार के सामने झारखंड के हक की आवाज बुलंद की। उन्होंने केंद्र सरकार के उपक्रमों और कोयला कंपनियों पर राज्य के 1.36 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बकाए भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा, उन्होंने ‘जल जीवन मिशन’ के तहत राज्य की शेष 6000 करोड़ रुपये की राशि को भी जल्द से जल्द जारी करने की मांग की, ताकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट को दूर किया जा सके।
NITI Aayog Meeting 2026: शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास: झारखंड मॉडल की सफलता
मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में राज्य द्वारा उठाए गए कदमों का ब्योरा दिया:
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शिक्षा में क्रांति: ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ (CM School of Excellence) के जरिए अब गरीब बच्चे भी IIT और मेडिकल परीक्षाओं में चयनित हो रहे हैं। राज्य सरकार 5000 ऐसे उत्कृष्ट विद्यालय बना रही है। हेमंत सोरेन ने झारखंड में NCERT का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की मांग की।
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आंगनबाड़ी और कुपोषण पर प्रहार: राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास भवन नहीं हैं, फिर भी ‘पोषण अभियान’ और ‘SAAMAR’ योजना से कुपोषण की दर में भारी सुधार हुआ है। बच्चों को रोजाना अंडे दिए जा रहे हैं और राज्य अपने दम पर 5000 नए आंगनबाड़ी भवन बना रहा है।
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रोजगार और कौशल विकास: झारखंड हर साल 1 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ रहा है। ‘सारथी योजना’ के तहत 6.76 लाख युवाओं को AI, EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल), ड्रोन और सोलर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें 53 हजार महिलाएं भी शामिल हैं।
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स्वास्थ्य सुविधाएं: स्वास्थ्य सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 1276 दवा दुकानें खोली गई हैं। राज्य अब AI-आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल और PPP मोड में 6 नए मेडिकल कॉलेजों (4 को मंजूरी मिल चुकी है, 2 शेष हैं) पर काम कर रहा है।
कृषि से लेकर खेल तक: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचा झारखंड का आम
झारखंड की उपलब्धियों को गिनाते हुए सीएम ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक ‘पोषण वाटिकाएं’ विकसित की गई हैं और 1.5 लाख एकड़ में फलदार पौधरोपण हुआ है, जिसके कारण आज झारखंड का आम अंतरराष्ट्रीय बाजार तक धूम मचा रहा है। खेल के क्षेत्र में उन्होंने झारखंड के खिलाड़ियों (हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स) के शानदार प्रदर्शन का हवाला देते हुए राज्य में ‘स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी’ और ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की मांग की। उन्होंने देश से अपील की कि झारखंड को राष्ट्रीय और एशियाई खेल महाकुंभों की मेजबानी का अवसर दिया जाए।
NITI Aayog Meeting 2026: नियमों में सरलीकरण की मांग: DVC और माइनिंग कमांड एरिया में छूट
मुख्यमंत्री ने अंत में नीति आयोग के सामने एक बड़ी व्यावहारिक समस्या रखी। उन्होंने बताया कि झारखंड के 7 जिले DVC कमांड एरिया और 12-13 जिले CCL, ECL जैसे केंद्रीय उपक्रमों के उच्च कमांड एरिया में आते हैं। इन क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल और सड़कें (सामाजिक आधारभूत संरचना) बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि स्वामित्व संबंधी अनुमति प्रक्रियाओं में राज्य सरकार को आवश्यक छूट और सरलीकरण दिया जाए, ताकि विकास कार्य न अटकें।

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