Ranchi: भारत को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति देने के लिए झारखंड की राजधानी रांची में एक बड़े ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड द्वारा आयोजित राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत नेशनल टास्क फोर्स की दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक (11-12 जून, 2026) का उद्घाटन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने होटल रेडिसन ब्लू में किया।
झारखंड के इतिहास में यह पहली बार है जब देश के सभी 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से टीबी विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसर, जनस्वास्थ्य नीति-निर्माता और शोधकर्ता इस गंभीर विषय पर रणनीति तैयार करने रांची पहुंचे हैं। यह आयोजन झारखंड की मजबूत होती स्वास्थ्य व्यवस्था का सीधा प्रमाण है।
टीबी उन्मूलन को बनाएं जनआंदोलन–जनप्रतिनिधियों से स्वास्थ्य मंत्री का आह्वान
सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि टीबी को केवल एक सरकारी फाइल या कार्यक्रम के भरोसे खत्म नहीं किया जा सकता, इसके लिए इसे एक ‘जनआंदोलन’ बनाना होगा। उन्होंने राज्य के सभी सांसदों, विधायकों, मेयरों, पार्षदों और मुखियाओं से अपील की कि वे आगे आएं और अपने-अपने क्षेत्रों को टीबी मुक्त बनाने के अभियान का नेतृत्व करें।
मिशन 2029 की घोषणा: स्वास्थ्य मंत्री ने आधिकारिक घोषणा की कि झारखंड सरकार ने साल 2029 तक “टीबी मुक्त झारखंड” का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है।
चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव: एमबीबीएस और पीजी सीटें होंगी दोगुनी
राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने बड़े ढांचागत सुधारों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में:
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MBBS की सीटें 100 से बढ़ाकर सीधे 200 की जा रही हैं।
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PG (पोस्ट ग्रेजुएशन) की सीटें भी 50 से बढ़ाकर 200 करने की दिशा में काम तेज हो गया है।
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रांची को भविष्य में एक वैश्विक मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत ‘रिम्स-2’ (RIMS-2) के निर्माण की प्रक्रिया जारी है, जो पूरा होने के बाद एशिया के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार होगा।
गरीबों को बड़ी राहत: ₹15 लाख का अबुआ बीमा और टीबी मरीजों को हर महीने ₹1000
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए सरकार ने ‘अबुआ स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत मुफ्त इलाज की सीमा को बढ़ाकर सीधे 15 लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ही टीबी मरीजों के लिए विशेष राहत की घोषणा करते हुए डॉ. अंसारी ने बताया कि राज्य में मुफ्त जांच और दावों के अलावा, मरीजों को उनके पोषण के लिए इलाज की अवधि के दौरान प्रति माह ₹1000 की वित्तीय सहायता सीधे उनके खाते में दी जा रही है।
अब तक राज्यव्यापी अभियान के तहत अत्याधुनिक हैंड एक्स-रे तकनीक से 1.36 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। वहीं, टीबी से पूरी तरह ठीक हो चुके लोगों को ‘टीबी चैंपियन’ बनाकर समाज में जागरूकता फैलाने का जिम्मा सौंपा जाएगा।
झारखंड में 455 पंचायतें हुईं ‘टीबी मुक्त’, एआई तकनीक का मिलेगा साथ
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश ने जमीनी आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में राज्य में करीब 38,500 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है।
राहत की बात यह है कि राज्य की 455 पंचायतों को पूरी तरह टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। अब सरकार का अगला लक्ष्य राज्य की सभी पंचायतों को इस दायरे में लाना है, जिसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों और डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग का सहारा लिया जा रहा है।
पद्मश्री डॉक्टरों का सम्मान
इस राष्ट्रीय मंच पर स्वास्थ्य मंत्री ने टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में देश का नाम रोशन करने वाले दो महान चिकित्सकों, पद्मश्री डॉ. दिगम्बर बेहरा और पद्मश्री डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की उप महानिदेशक डॉ. शोभिनी राजन, नेशनल टास्क फोर्स के चेयरमैन डॉ. अशोक भारद्वाज सहित स्वास्थ्य विभाग के कई शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे।

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