Ranchi: राजधानी रांची के चर्चित Raj Hospital में इलाज के दौरान कथित लापरवाही और मरीज की मौत के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। शनिवार को सदर अस्पताल और नगर निगम की संयुक्त जांच टीम राज अस्पताल पहुंची और पूरे मामले की जांच की। इस दौरान टीम ने मरीज से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपने साथ ले लिए।
जांच टीम में नगर निगम की परियोजना पदाधिकारी मनीषा तिर्की के साथ सदर अस्पताल के दो चिकित्सक शामिल थे। टीम ने अस्पताल प्रबंधन से इलाज से संबंधित दस्तावेजों की जांच की और मामले की विस्तृत जानकारी ली।
जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी
जांच टीम का नेतृत्व कर रहीं परियोजना पदाधिकारी मनीषा तिर्की ने बताया कि अस्पताल पर लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक जांच की गई है। मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन किया गया है। अब सभी तथ्यों को संकलित कर विस्तृत जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
राज अस्पताल ने सभी आरोपों को बताया निराधार
इधर, मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच Raj Hospital के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र कुमार मीडिया के सामने आए और अस्पताल का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि मरीज अस्पताल में पहले से ही बेहद गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था। मरीज को मल्टीपल फ्रैक्चर के साथ कई अन्य गंभीर बीमारियां भी थीं।
डॉ. कुमार के अनुसार—
- इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।
- मरीज की मौत संक्रमण (इन्फेक्शन) के कारण हुई।
- परिजनों द्वारा लगाए गए 22 लाख रुपये वसूलने के आरोप सही नहीं हैं।
- मरीज के इलाज पर लगभग 16 से 18 लाख रुपये खर्च हुए।
- जांच टीम को अस्पताल की ओर से पूरा सहयोग दिया गया है और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।
सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान
मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं इसका संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने रांची के उपायुक्त (DC) को तत्काल पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन या संबंधित डॉक्टर दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और इसकी रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराई जाए।
क्या है पूरा मामला?
परिजनों के अनुसार मरीज के पैर में फ्रैक्चर होने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए रांची के राज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि भर्ती के बाद शुरुआती दो से तीन दिनों तक घाव की नियमित ड्रेसिंग नहीं की गई, जिससे संक्रमण बढ़ता गया और बाद में पूरे शरीर में फैल गया।
परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब 22 लाख रुपये लिए गए, लेकिन अंततः मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी।
हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि मरीज पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था और उसकी मौत इलाज में लापरवाही नहीं बल्कि संक्रमण के कारण हुई।
जिला स्तरीय विशेष जांच टीम करेगी विस्तृत जांच
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद रांची जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय विशेष टीम गठित कर दी है। यह टीम अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज की प्रक्रिया, बिलिंग और अन्य सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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