रांची: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के साथ शुरू हुआ रांची का ऐतिहासिक Jagannathpur Mela इस बार केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन की झलक भी बन गया है। हर साल की तरह इस बार भी हजारों दुकानदार और लाखों श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं, लेकिन इस बार खरीदारी के लिए पहले से कहीं ज्यादा विविधता देखने को मिल रही है।
अगर आप इस बार जगन्नाथपुर मेला जाने की योजना बना रहे हैं, तो यहां जानिए कि मेले में कहां क्या मिलेगा और कौन-कौन सी चीजें इस बार आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
खेती-किसानी से जुड़े हर तरह के सामान की भरमार
ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए जगन्नाथपुर मेला हमेशा से खेती-बाड़ी के सामान खरीदने का बड़ा केंद्र रहा है। इस बार भी यहां किसानों के लिए कई तरह के पारंपरिक और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं।
मेले में मिलने वाले प्रमुख कृषि उपकरणों में शामिल हैं—
- कुमनी (मछली पकड़ने का पारंपरिक उपकरण)
- बांस और धागे से बने विभिन्न प्रकार के जाल
- चीनी (Chinese) फिशिंग नेट
- मछली पकड़ने के अन्य उपकरण
- खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाले छोटे-बड़े औजार
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग इन उपकरणों की खरीदारी बड़ी संख्या में करते हैं क्योंकि यहां एक ही जगह पर कई विकल्प उपलब्ध रहते हैं।
गांव के रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाले घरेलू औजार
मेले में घरेलू उपयोग के लोहे और स्टील के पारंपरिक औजारों की भी लंबी कतारें लगी हैं। आज भी गांवों में इनकी उपयोगिता बनी हुई है।
यहां आपको मिलेंगे—
- हंसुआ – धान और अन्य फसलों की कटाई के लिए
- चापड़ – मांस और बड़ी सब्जियां काटने के लिए
- फरसा – लकड़ी काटने और कृषि कार्यों में उपयोग
- भुजाली – पारंपरिक धारदार औजार
- बैसला (बसुला) – लकड़ी का काम करने वाला औजार
- कुल्हाड़ी, खुरपी, कुदाल सहित कई अन्य कृषि एवं घरेलू उपकरण
इन दुकानों पर कारीगर खुद अपने हाथों से बने औजार बेचते नजर आते हैं।
झारखंड की संस्कृति को जीवित रखती पारंपरिक वस्तुएं
Jagannathpur Mela केवल खरीदारी का बाजार नहीं बल्कि झारखंड की लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन भी है।
यहां आपको मिलेंगे—
- पैला – धान और चावल नापने का पारंपरिक लकड़ी का माप
- बांस और लकड़ी से बने घरेलू सामान
- हस्तनिर्मित पारंपरिक वस्तुएं
- ग्रामीण जीवन में उपयोग होने वाले अनेक स्थानीय उत्पाद
ये सामान आज भी झारखंड के कई गांवों में रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं।
लोक संगीत प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण
मेले में झारखंड की लोक संस्कृति से जुड़े पारंपरिक वाद्य यंत्र भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
यहां उपलब्ध हैं—
- शहनाई
- ढोल
- मांदर
- ढांक
- अन्य लोक वाद्य यंत्र
इन वाद्य यंत्रों की खरीदारी गांवों की सांस्कृतिक मंडलियां और कलाकार बड़ी संख्या में करते हैं।
बच्चों के लिए झूले और खिलौनों की पूरी दुनिया
अगर आप परिवार के साथ मेले जा रहे हैं तो बच्चों के लिए यहां आकर्षण की कोई कमी नहीं है।
मेले में मौजूद हैं—
- ड्रैगन झूला
- ब्रेक डांस झूला
- जायंट व्हील
- बच्चों के छोटे-छोटे झूले
- इलेक्ट्रॉनिक खिलौने
- पारंपरिक खिलौने
- बैट-बॉल, गुड़िया, कार, बंदूक सहित बच्चों के पसंदीदा खिलौने
शाम होते ही झूलों की रंग-बिरंगी रोशनी पूरे मेले को आकर्षक बना देती है।
खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी है खास इंतजाम
मेले में अलग-अलग राज्यों के व्यंजनों के साथ झारखंड के पारंपरिक स्वाद का भी आनंद लिया जा सकता है।
फूड स्टॉल पर उपलब्ध हैं—
- चाट
- गोलगप्पे
- जलेबी
- पकौड़ी
- आइसक्रीम
- कुल्फी
- फास्ट फूड
- स्थानीय व्यंजन
इसके अलावा कई अस्थायी रेस्टोरेंट भी लगाए गए हैं।
झारखंड की पारंपरिक मिठाइयों की महक
जैसे-जैसे श्रद्धालु मुख्य मंदिर की ओर बढ़ते हैं, वहां पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें नजर आने लगती हैं।
यहां प्रमुख रूप से मिलती हैं—
- बालूशाही
- मुरब्बा
- गुलगुला
- स्थानीय पारंपरिक मिठाइयां
इन दुकानों पर दूर-दराज से आए श्रद्धालु खरीदारी करते दिखाई देते हैं।
जानिए मेले का पूरा रूट, कहां मिलेगा क्या?
अगर पहली बार Jagannathpur Mela जा रहे हैं तो यह गाइड आपके काफी काम आएगी।
गोलचक्कर से मेले में प्रवेश
गोलचक्कर से सीधे मुख्य सड़क पर आगे बढ़ते ही सड़क के दोनों ओर छोटी-बड़ी सैकड़ों दुकानें दिखाई देने लगती हैं। यहां घरेलू सामान, कपड़े, खिलौने, कृषि उपकरण और रोजमर्रा की जरूरत की लगभग हर चीज उपलब्ध है।
मौसीबाड़ी के पीछे (मुख्य सड़क के बाईं ओर)
मुख्य सड़क के बाईं ओर, मौसीबाड़ी के पीछे वाले इलाके में झारखंड की संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें लगी हैं। यहां बांस, लकड़ी, हस्तशिल्प, कृषि उपकरण, लोक वाद्य यंत्र और पारंपरिक घरेलू सामान आसानी से मिल जाते हैं।
मुख्य सड़क के दाईं ओर
सड़क के दाईं ओर बच्चों के झूले, बड़े मनोरंजन झूले, गेम जोन और खाने-पीने के स्टॉल सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शाम के समय यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है।
मुख्य मंदिर के पास
जैसे-जैसे श्रद्धालु मंदिर की ओर बढ़ते हैं, पारंपरिक मिठाइयों, पूजा सामग्री और रसोई से लेकर घर में इस्तेमाल होने वाले लगभग हर तरह के सामान की दुकानें नजर आती हैं।
आस्था, संस्कृति और खरीदारी का संगम
Jagannathpur Mela केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की लोक संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक जीवनशैली का जीवंत उत्सव भी है। यहां एक ओर जहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन का आध्यात्मिक अनुभव मिलता है, वहीं दूसरी ओर खेती-किसानी के उपकरण, पारंपरिक घरेलू सामान, लोक वाद्य यंत्र, झारखंडी मिठाइयां, बच्चों के झूले और आधुनिक बाजार का अनोखा संगम भी देखने को मिलता है।
अगर आप रांची या आसपास के किसी जिले में हैं, तो इस बार का जगन्नाथपुर मेला सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि झारखंड की जीवंत संस्कृति को करीब से महसूस करने का भी बेहतरीन अवसर है।









