Jharkhand: कभी झारखंड और सारंडा के घने जंगलों में 3-3 सुरक्षा स्कॉर्ट के घेरे में घूमने वाला भाकपा (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा आखिरकार सुरक्षा एजेंसियों के शिकंजे में आ गया। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही यह साफ हो गया है कि झारखंड में माओवाद का आखिरी बड़ा गढ़ समाप्त हो चुका है।
3 स्कॉर्ट के घेरे में चलता था मिसिर बेसरा
करीब एक दशक पहले तक यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि मिसिर बेसरा जैसा दुर्दांत नक्सली कभी जिंदा गिरफ्तार होगा। सारंडा के जंगलों में उसकी सुरक्षा इतनी मजबूत मानी जाती थी कि उसके साथ हमेशा 3 अलग-अलग स्कॉर्ट दल चलते थे। इन्हीं सुरक्षा घेरों के बीच वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हर बार वह घने जंगलों और मजबूत सुरक्षा घेरे का फायदा उठाकर निकलने में सफल रहा।रणनीति बदली, सप्लाई लाइन और नेटवर्क पर किया प्रहार
हालांकि समय के साथ सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रणनीति बदली। सीधे मुठभेड़ की बजाय नक्सलियों के पूरे नेटवर्क को कमजोर करने की योजना पर काम शुरू हुआ। सबसे पहले संगठन की सप्लाई लाइन पर प्रहार किया गया। हथियार, राशन और अन्य संसाधनों की आपूर्ति बाधित की गई। इसके बाद उसके संपर्क सूत्रों और नेटवर्क को एक-एक कर ध्वस्त किया गया। लगातार चलाए गए अभियानों और आत्मसमर्पण नीति का असर यह हुआ कि मिसिर बेसरा का दस्ता धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया।सैकड़ों से सिमटकर रह गया 16 सदस्यों का दस्ता
एक समय सैकड़ों नक्सलियों की ताकत रखने वाला उसका दस्ता सिमटकर महज 16 सदस्यों तक पहुंच गया। इसके बाद भी सुरक्षा एजेंसियों का दबाव लगातार बढ़ता रहा। सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब उसके बेहद करीबी और भरोसेमंद बॉडीगार्ड शनिचरा ने आत्मसमर्पण कर दिया। शनिचरा के सरेंडर के बाद बेसरा का सुरक्षा घेरा पूरी तरह कमजोर पड़ गया और उसके साथ सिर्फ 3 सदस्य ही बचे रह गए।सटीक सूचना पर देर रात कार्रवाई, आखिरकार गिरफ्तारी
इसी कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने सटीक सूचना के आधार पर देर रात कार्रवाई की और मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ मौजूद अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया। सुरक्षा एजेंसियां इस गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलता है।गिरफ्तारी से माओवादी संगठन को बड़ा झटका
देखा जाए तो मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से झारखंड में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। वर्षों तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने रहे इस शीर्ष नक्सली का गिरफ्तार होना इस बात का संकेत है कि लगातार चल रहे अभियान, आत्मसमर्पण नीति और नेटवर्क ध्वस्त करने की रणनीति ने आखिरकार अपना असर दिखाया है। और जो रेड कॉरिडोर था उसे भी व्हाइट कॉरिडोर में बदलने की तैयारी अब शुरू कर दी जाएगी। ये भी पढ़े: Misir Besra Profile: कटहल पेड़ के विवाद से कैसे बना मिसिर बेसरा खूंखार नक्सली कमांडर, जानिए पूरी कहानी
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