JSSC CGL पास कर सरकारी नौकरी कर रहे थे दोनों
CID के मुताबिक, अक्षय तिवारी ने JSSC CGL परीक्षा पास की थी और वर्तमान में झारखंड सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत थे। जांच में यह भी सामने आया कि अक्षय ने 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी पास की थी। वहीं, अभय तिवारी की पत्नी सुष्मिता तिवारी ने भी JSSC CGL परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वह वित्त विभाग में कार्यरत थीं। CID ने पूछताछ और जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया है। मंगलवार दोपहर CID की टीम दोनों के घर पहुंची। पूछताछ के बाद दोनों को हिरासत में लेकर CID मुख्यालय लाया गया। इसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां से आगे की कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुसार होगी।पूछताछ में अभय तिवारी ने खोला कथित परीक्षा सिंडिकेट का राज
CID की जांच में अभय तिवारी की भूमिका को अहम माना जा रहा है। पूछताछ के दौरान उसने JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित तौर पर सक्रिय एक बड़े सिंडिकेट से जुड़ी जानकारी दी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट में अलग-अलग तरीकों से परीक्षा में सेटिंग की जाती थी। आरोप है कि कुछ मामलों में पेपर लीक, कंप्यूटर आधारित परीक्षा में रिमोट एक्सेस और OMR शीट में कथित हेरफेर के जरिए पैसे देने वाले अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया जाता था। CID का दावा है कि अभय तिवारी ने अपने प्रभाव और कथित सेटिंग का इस्तेमाल करते हुए खुद के अलावा अपने कई रिश्तेदारों को भी परीक्षाओं में सफलता दिलाने में मदद की।विधानसभा घेराव के दौरान पोस्टर से भी उठा था मामला
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के दौरान 10 अगस्त को विधानसभा घेराव में एक पोस्टर ने अभय तिवारी से जुड़े रिश्तों और कथित सफल अभ्यर्थियों को लेकर सवाल खड़े किए थे। पोस्टर में अभय तिवारी के साथ उनके कई रिश्तेदारों के नाम और तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं। इनमें कई लोगों के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) के पद पर चयनित होने का दावा किया गया था। पोस्टर में अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी समेत परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े कई लोगों के नाम शामिल थे। इनमें उपेंद्र मिश्रा, तेजनारायण पंडित, बापी कुमार मिश्रा, विक्रम पांडेय और सुमित कुमार तिवारी जैसे नाम भी बताए गए थे। पोस्टर में इन अभ्यर्थियों की BSO परीक्षा में अलग-अलग रैंक का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि, इन सभी दावों की पुष्टि जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। CID इन नामों और परीक्षा परिणामों से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है।अभय तिवारी की गिरफ्तारी भी जांच में अहम कड़ी
अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुका था। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा संचालन से जुड़ी उसकी भूमिका और उसके संपर्कों की वजह से वह कथित परीक्षा सिंडिकेट की महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया। CID ने इससे पहले भी इस मामले में JPSC और TDPL से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, तकनीकी कर्मियों, कथित बिचौलियों और अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है।अब तक 24 आरोपितों की गिरफ्तारी का दावा
CID के मुताबिक, JPSC मेधा घोटाले की जांच में अब तक 24 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी, तकनीकी कर्मियों और अन्य कर्मचारियों के अलावा कथित बिचौलिये और कुछ अभ्यर्थी शामिल हैं। जांच का दायरा अब उन अभ्यर्थियों तक भी पहुंच रहा है, जिनकी सफलता को लेकर जांच एजेंसी को संदेह है। CID यह पता लगाने में जुटी है कि किन परीक्षाओं में कथित तौर पर गड़बड़ी हुई और किन अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिला।आगे और गिरफ्तारियां संभव
अक्षय तिवारी और सुष्मिता तिवारी की गिरफ्तारी के बाद JPSC-JSSC परीक्षा अनियमितता मामले की जांच और तेज होने की संभावना है। CID अब अभय तिवारी से जुड़े रिश्तेदारों, परीक्षा परिणामों और कथित लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में अगर किसी अन्य अभ्यर्थी या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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