Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी को गिरफ्तार आरोपी अरुण कुमार से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। अरुण को सीआईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। जांच में उसकी बिहार की पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि और झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के बीच कड़ी सामने आने की बात कही जा रही है।
जांच के अनुसार, अरुण कुमार बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े करीब 14.3 करोड़ रुपये के गबन मामले में जेल जा चुका था। आरोप है कि जेल में रहने के दौरान ही उसकी पहचान पटना हाईकोर्ट में सेक्शन ऑफिसर रहे अभिषेक समेत कुछ अन्य लोगों से हुई। इसी संपर्क के जरिए झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित तौर पर गड़बड़ी कर पैसे वसूलने की योजना तैयार होने की जानकारी जांच में सामने आई है।
जेल से निकली झारखंड भर्ती घोटाले की कथित पटकथा
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े मामले में जेल जाने के बाद अरुण कुमार ने कथित तौर पर एक नया नेटवर्क तैयार किया। जमानत की कानूनी प्रक्रिया के दौरान पटना में उसकी मुलाकात अभिषेक से हुई। पूछताछ में अभिषेक ने पुलिस को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े काम हासिल करने के बाद कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य पेश होने के बाद ही होगी।
2022 में ही केस डायरी में दर्ज थी जानकारी
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि सितंबर 2022 में हुई पूछताछ के दौरान ही अरुण कुमार की बिहार वाली पृष्ठभूमि, उसकी जमानत और झारखंड में मिले काम से जुड़ी जानकारी पुलिस के सामने आ गई थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी अभिषेक ने पूछताछ के दौरान अरुण के बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। यह जानकारी केस डायरी में दर्ज होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद अरुण की गिरफ्तारी उस समय नहीं हो सकी। अब करीब चार साल बाद सीआईडी ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया है।
अरुण की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी के सामने 2022 में दर्ज किए गए पुराने तथ्यों की भी दोबारा समीक्षा हो रही है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब आरोपी से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही जांच के दौरान सामने आ गई थी, तो उसकी गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हुई।
रांची और हजारीबाग के कोचिंग सेंटर जांच के घेरे में
JPSC और अन्य नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान सीआईडी ने रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संस्थानों की भी जांच की है।
रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला और इसके निदेशक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास पर जांच की गई। इसके अलावा हजारीबाग स्थित मेघा कोचिंग सेंटर में भी सीआईडी ने छानबीन की। जांच के दौरान दोनों स्थानों से दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी है।
सीआईडी को पूछताछ के दौरान इन कोचिंग संस्थानों की भूमिका को लेकर कुछ संदिग्ध तथ्य मिलने की बात सामने आई है। इसी आधार पर आगे की जांच की जा रही है।
अभय तिवारी समेत कई आरोपियों से पूछताछ
सीआईडी इस पूरे मामले में अभय तिवारी, उसके भाई और उसकी पत्नी से पूछताछ कर रही है। उत्तर प्रदेश के आरोपी मो. एबाद से भी पूछताछ की गई है।
जांच के दौरान मो. एबाद ने परीक्षा के उप नियंत्रक समेत कुछ अन्य लोगों पर OMR शीट में कथित गड़बड़ी कराने का आरोप लगाया है। इसके अलावा सीआईडी ने परीक्षा में सफल रहे करीब 18 अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की है।
अब जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र, OMR शीट, कोचिंग संस्थानों और आरोपियों के बीच संभावित संपर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
JSSC Diploma भर्ती परीक्षा पर उठे गंभीर सवाल
अरुण कुमार की गिरफ्तारी और 2022 में सामने आई जानकारी ने JSSC की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़े पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सीआईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित सिंडिकेट का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी किस स्तर तक हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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