Big Breaking : झारखंड हाईकोर्ट में आज ACF और FRO यानी फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने वाली याचिका पर आज सुनवाई। दरअसल झारखंड सरकार के द्वारा 18 अगस्त को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई परीक्षाओं और नियक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। जिसके बाद हाईकोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। इसी कड़ी में आज ACF और FRO नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के फैसले पर आज सुनवाई हुई।
कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार
यह सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। जहां अदालत ने फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को काउंटर एफिडेविट फाइल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 24 सितंबर निर्धारित की गई है। ध्यान हो कि अभी इन दोनों परीक्षा में किसी तरह की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में इन दो परीक्षा के सरकार के रद्द का फैसला बरकरार रहेगा। राज्य सरकार के द्वारा कुल 22 परीक्षाएं रद्द की गई थी। जिसमें 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित की गई थी और 17 पुरानी परीक्षाओं को सीआईडी के दायरे में रखा गया था।
24 सितंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकर्ताओं की ओर से दूसरी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि जन परीक्षाओं और नियुक्तियों को सरकार ने रद्द किया है। उनमें अभ्यर्थियों की भूमिका अलग-अलग है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को एक साथ रद्द करना सही नहीं है। सरकार जांच कराए और दोषी पाए गए कर्मियों पर उचित कार्रवाई करे। जिस पर कोर्ट ने एसीएफ और एफआऱओ नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर निर्धारित की गई है। कोर्ट के आदेश के बाद एसीएफ और एफआऱओ कर्मियों को हाईकोर्ट से तत्तकाल राहन नहीं मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस किया जारी
दूसरी तरफ देखा जाए तो देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रमी कोर्ट में आज झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर सुनवाई हुई। यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में हुई। जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में परीक्षा रद्द कर नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार, जेएसएससी और जेपीएससी को नोटिस किया है। याचिकर्ता ने कोर्ट के समझ पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। याचिक में कहा गया है कि अगर सीबीआई जांच नहीं होती है, तो झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी बनाई जाए और पूरे मामले की जांच कराई जाए। सुनवाई के दौरान याचिकर्ता ने परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, ओएमआर शीट की कस्टडी और मूल्यांकण प्रक्रिया में गभीर अनियमितता के आरोप लगाए है। उनका साफ तौर कहना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी जरूरी है। साथ ही पूरी परीक्षा रद्ध करने की अपील कोर्ट से की गई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नई प्रारंभिक परीक्षा साथ ही तय सुरक्षा मानकों के तहत परीक्षा कराने का प्रस्ताव दिया गया है।

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